केरल के पथनमथित्ता जिले स्थित मल्लपल्ली में गिरजाघरों के कब्रिस्तानों से भारी-भरकम ग्रेनाइट स्लैब चोरी होने की घटनाओं ने स्थानीय लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया है। लगातार दो दिनों के दौरान अज्ञात चोरों ने दो अलग-अलग कब्रों को अपना निशाना बनाया और उन पर लगी कीमती ग्रेनाइट की स्लैब उखाड़कर ले गए। कब्रों के इस तरह खुले पड़े मिलने से स्थानीय ईसाई समुदाय और प्रभावित परिवारों में भारी आक्रोश और दुख का माहौल है। गिरजाघर प्रबंधन की सूचना पर पुलिस ने आपराधिक मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन इस अजीबोगरीब वारदात के पीछे के मकसद को लेकर हर कोई हैरान है।
दो कब्रिस्तानों में 24 घंटे के भीतर सिलसिलेवार चोरी
चोरी की यह पहली घटना मंकुझीपाडी स्थित 'मार थोमा चर्च' के कब्रिस्तान में सामने आई। यहां थन्निक्कल परिवार से जुड़ी एक कब्र पर लगी बड़ी ग्रेनाइट स्लैब रहस्यमयी तरीके से गायब पाई गई। इस वारदात के 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए थे कि मल्लपल्ली के 'मार थोमा चर्च' कब्रिस्तान में भी ठीक इसी तरह की चोरी को अंजाम दिया गया। मल्लपल्ली वाले कब्रिस्तान में थाइकोट्टाथिल परिवार के एक सदस्य की कब्र पर रखी ग्रेनाइट की स्लैब चोरी हो गई।
गिरजाघर प्रबंधन द्वारा पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, मल्लपल्ली स्थित चर्च के कब्रिस्तान से गायब हुई ग्रेनाइट स्लैब लगभग छह फुट लंबी और तीन फुट चौड़ी थी। जब स्थानीय लोग और परिजन सुबह की प्रार्थना के लिए कब्रिस्तान पहुंचे, तब उन्हें कब्र की स्लैब गायब मिली और कब्र खुली हुई दिखाई दी, जिसके बाद तुरंत पुलिस प्रशासन को सूचना दी गई।
चोरों के संगठित गिरोह और सोची-समझी साजिश का अंदेशा
घटना की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। प्राथमिक जांच के आधार पर पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इतनी वजनदार और विशाल स्लैब को अकेला व्यक्ति उठाकर नहीं ले जा सकता। लगभग छह फुट लंबी पत्थर की स्लैब को उठाने और वहां से हटाने के लिए कम से कम कई लोगों की मदद की आवश्यकता होगी।
जांचकर्ताओं को अंदेशा है कि इस वारदात के पीछे किसी संगठित गिरोह का हाथ है, जिसने स्लैब को ले जाने के लिए किसी बड़े वाहन का इस्तेमाल किया होगा। इसके अलावा जांच में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी सामने आया है कि जिन दोनों कब्रिस्तानों में चोरी हुई, वहां सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे। पुलिस को संदेह है कि आरोपियों ने पहले इन जगहों की रेकी की और जानबूझकर बिना कैमरे वाले परिसरों को निशाना बनाया ताकि वे पहचान में न आ सकें।
आर्थिक नुकसान से बढ़कर गहरा भावनात्मक आघात
पीड़ित परिवारों का कहना है कि पत्थरों की इस चोरी से उन्हें जो आर्थिक नुकसान हुआ है, उससे कहीं अधिक गहरा आघात उनकी आस्था और भावनाओं को पहुंचा है। मल्लपल्ली के लोगों के लिए कब्रिस्तान केवल शव दफनाने का स्थान नहीं हैं, बल्कि ये उनके पूर्वजों की यादों, पारिवारिक इतिहास और धार्मिक आस्था के पवित्र प्रतीक हैं। कब्रों की मर्यादा भंग होने से स्थानीय समाज में भारी निराशा है।
फिलहाल पुलिस के हाथ दोनों मामलों में कोई ठोस सुराग नहीं लगा है और न ही किसी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान हो पाई है। पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि क्या दोनों कब्रिस्तानों में एक ही गिरोह ने चोरी की है। मल्लपल्ली के निवासियों के मन में यह सवाल कौंध रहा है कि आखिर कोई मृतकों के अंतिम विश्राम स्थल को नुकसान पहुंचाकर क्या हासिल करना चाहता है।















