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हैती में आपराधिक गिरोहों के आतंक से 5,700 से अधिक लोग हताहत, संयुक्त राष्ट्र ने दी गंभीर चेतावनीलैटिन अमेरिका
2 अक्तू॰ 2026, 4:29 pm (2 घंटे पहले)· 0

हैती में आपराधिक गिरोहों के आतंक से 5,700 से अधिक लोग हताहत, संयुक्त राष्ट्र ने दी गंभीर चेतावनी

हैती में गिरोहों के बढ़ते खूनी संघर्ष और सुरक्षा अभियानों के बीच 5,700 से ज्यादा नागरिक मारे गए या घायल हुए हैं, जबकि बच्चों की जबरन भर्ती भी तेजी से बढ़ी है।

कैरेबियाई देश हैती में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है, जहां सशस्त्र गिरोहों की आपसी जंग और उनके खिलाफ चल रही सुरक्षा कार्रवाई के बीच आम नागरिकों का जीना दूभर हो गया है। एक जनवरी से 11 सितंबर 2026 के दरमियान दर्ज किए गए आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न हिंसक झड़पों तथा सुरक्षाबलों के अभियानों में 5,700 से भी ज्यादा लोग या तो अपनी जान गंवा चुके हैं या गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं। इस खूनी टकराव की चपेट में सैकड़ों निर्दोष नागरिक उस वक्त आ गए जब वे सुरक्षा अभियानों के दौरान दोनों तरफ से हो रही गोलीबारी के बीच फंस गए थे। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने इस मानवीय त्रासदी पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया है कि देश में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं।

नागरिकों का अपहरण और महिलाओं पर यौन हिंसा

सशस्त्र आपराधिक गुटों ने आम जनता के बीच दहशत फैलाने के लिए अपहरण को एक बड़ा जरिया बना लिया है। इसी अवधि के दौरान 230 से अधिक लोगों को बंधक बनाकर फिरौती मांगने या दबाव बनाने के उद्देश्य से अगवा किया गया। इसके साथ ही महिलाओं तथा युवतियों को निशाना बनाकर की जाने वाली यौन बर्बरता ने भी बेहद भयावह रूप ले लिया है। संयुक्त राष्ट्र के संकलित ब्योरे के अनुसार, करीब 1,000 महिलाओं और बच्चियों के साथ बलात्कार किए जाने का अनुमान लगाया गया है। उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने आगाह किया कि यह आंकड़ा सिर्फ वही है जो औपचारिक दायरे में सामने आ सका है, जबकि जमीन पर वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक होने की पूरी आशंका है क्योंकि सामाजिक भय और डर की वजह से कई घटनाएं दर्ज नहीं हो पाती हैं।

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सत्ता के खालीपन से मजबूत होते हथियारबंद गुट

हैती में असामाजिक गिरोहों की अराजकता मोइसेस के दौर में भी बड़े पैमाने पर फैली हुई थी, लेकिन उनकी हत्या के बाद उपजे राजनीतिक शून्य ने इन हिंसक संगठनों को पैर पसारने का खुला मैदान दे दिया। सत्ता की शून्यता का लाभ उठाते हुए इन गुटों ने नए इलाकों पर कब्जा जमाना शुरू कर दिया और अपनी ताकत को कई गुना बढ़ा लिया। उच्चायुक्त तुर्क के अनुसार, ये गिरोह समय के साथ खुद को नए सिरे से ढाल रहे हैं और अपने प्रभाव क्षेत्र का लगातार विस्तार कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों से यह बात पुष्ट होती है कि ये गुट अब सुनियोजित रणनीति के तहत नए भूभागों और प्रमुख परिवहन मार्गों को अपने शिकंजे में ले रहे हैं, जिससे पूरे मुल्क की बुनियादी स्थिरता खतरे में पड़ गई है। परिवहन मार्गों पर नियंत्रण हो जाने से जरूरी सामानों की आपूर्ति भी ठप होने लगी है।

बच्चों का जबरन इस्तेमाल और चुनावी प्रक्रिया पर संकट

हिंसा के इस खूनी चक्र का सबसे काला पहलू नाबालिगों का शोषण है। गिरोहों में कम उम्र बच्चों की भर्ती का आंकड़ा पहले के मुकाबले लगभग तीन गुना तक बढ़ चुका है। जमीनी हालात इतने बदतर हैं कि बहुत से नाबालिगों के सामने इन आपराधिक समूहों में शामिल होने के अलावा जिंदा रहने का कोई दूसरा रास्ता ही नहीं बचता। वोल्कर तुर्क ने इस लाचारी पर अफसोस जताते हुए कहा कि किसी भी बच्चे को अपनी जान बचाने और पड़ोसियों की सुरक्षा में से किसी एक को चुनने के लिए विवश नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा, हाल के महीनों में विशेष पुलिस दस्तों द्वारा की जाने वाली संदिग्धों की हत्याओं की तादाद में कुछ गिरावट जरूर दर्ज की गई है, मगर गिरोहों से जुड़े होने के संदेह में पकड़े गए व्यक्तियों पर अब भी बिना अदालती सुनवाई के तुरंत मार दिए जाने का गहरा खतरा मंडरा रहा है। मौजूदा जमीनी हालात को देखते हुए उच्चायुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि इस साल निष्पक्ष और विश्वसनीय चुनाव आयोजित करने लायक अनुकूल माहौल बन पाना बेहद मुश्किल नजर आ रहा है।

सवाल-जवाब

हैती में जनवरी से सितंबर 2026 के बीच कितने लोग हताहत हुए हैं?
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, एक जनवरी से 11 सितंबर 2026 के दौरान गिरोहों की हिंसा और उनके खिलाफ अभियानों में 5,700 से अधिक लोग मारे गए या घायल हुए हैं।
इस दौरान कितने लोगों के अपहरण और महिलाओं पर यौन हिंसा के मामले सामने आए?
इस अवधि में 230 से ज्यादा लोगों का अपहरण हुआ है, जबकि लगभग 1,000 महिलाओं और बच्चियों के साथ बलात्कार का अनुमान है, जिसके वास्तविक आंकड़े कहीं अधिक होने की संभावना है।
आपराधिक गिरोहों में बच्चों की भर्ती को लेकर क्या जानकारी दी गई है?
संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क के अनुसार बच्चों की गिरोहों में भर्ती लगभग तीन गुना बढ़ चुकी है, क्योंकि कई नाबालिगों के लिए जिंदा रहने का यह एकमात्र जरिया बन गया है।
क्या हैती में इस साल चुनाव होने की कोई संभावना है?
उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा अस्थिर और हिंसक माहौल को देखते हुए इस साल निष्पक्ष और विश्वसनीय चुनाव आयोजित कर पाना बेहद मुश्किल है।
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