बरसात के दिनों में रिहायशी इलाकों और घरों के आसपास जहरीले जीवों की आवाजाही अचानक बढ़ जाती है। सर्प विशेषज्ञ महादेव पटेल के अनुसार, अधिकांश सांप भोजन की आसान उपलब्धता और सुरक्षित ठिकानों की तलाश में रिहायशी परिसरों का रुख करते हैं। यदि परिसर में उनके भोजन और छिपने के अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हों, तो यह खतरा और अधिक गंभीर रूप ले लेता है। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि कौन से कारक सांपों को आकर्षित करते हैं और उनसे कैसे बचाव किया जाए।
चूहों और छोटे जीवों की अनियंत्रित संख्या बनती है मुख्य आकर्षण
सर्प विशेषज्ञ महादेव पटेल बताते हैं कि सांपों की कई प्रजातियां मुख्य रूप से चूहों का शिकार करती हैं। अगर किसी परिसर में चूहों का भारी जमावड़ा है या उनके आने-जाने के रास्ते बने हुए हैं, तो सांप शिकार की गंध सूंघते हुए वहां पहुंच जाते हैं। चूहों के मल-मूत्र और उनकी मौजूदगी के निशान सांपों को सीधे शिकार के ठिकाने तक ले जाने में मदद करते हैं। इसी कारण घर में चूहों की समस्या को कतई हल्के में नहीं लेना चाहिए।
इसके अलावा, दीवारों और बगीचे के पास छिपकलियों, मेंढकों और अन्य छोटे कीटों की मौजूदगी भी सांपों के लिए आसान आहार साबित होती है। वर्षा ऋतु में मेंढक और विभिन्न प्रकार के कीड़े-मकौड़े बहुत अधिक सक्रिय हो जाते हैं। जब ऐसे जीवों की संख्या घर के आसपास अधिक होती है, तो उनके पीछे-पीछे शिकारी सांप भी सहज रूप से उस तरफ खिंचे चले आते हैं।
मुर्गी पालन और पालतू पक्षियों के वेस्ट का सही निस्तारण
यदि घर में कबूतर, तोते या मुर्गियां पाली जाती हैं, तो उनके दाने, पंख, अंडे और अपशिष्ट को खुले में कभी जमा न होने दें। खुले में बिखरे दानों और वेस्ट के कारण सबसे पहले चूहे तथा अन्य छोटे जीव आकर्षित होते हैं, जो आगे चलकर सांपों के लिए निमंत्रण बन जाते हैं। मुर्गियों और पक्षियों के बाड़े या पिंजरों की नियमित सफाई की जानी चाहिए और उनका दाना-पानी हमेशा अच्छी तरह ढंककर रखना चाहिए।
कुछ प्रजातियों के सांप पक्षियों के अंडों को भी अपना आहार बनाते हैं। मकान की छतों, स्टोर रूम, रोशनदानों या बगीचे के पेड़ों पर यदि पक्षियों के घोंसले मौजूद हैं, तो उनमें रखे अंडे सांपों को आहार का तैयार स्रोत प्रदान करते हैं। घोंसलों के आसपास कूड़ा-करकट और गंदगी बिल्कुल न पनपने दें। हालांकि, यदि कहीं घोंसला या उसके पास सांप नजर आ जाए, तो उसे खुद हटाने का जोखिम कभी न उठाएं।
सड़ती पत्तियां, कबाड़ और सीलन भरे कोने देते हैं छिपने का ठिकाना
बारिश के पानी से घर के बगीचों, चारदीवारी के किनारों और कोनों में गीली पत्तियां एकत्र हो जाती हैं। लंबे समय तक पड़े रहने पर इन पत्तियों में सड़न पैदा होती है और स्थायी नमी बनी रहती है। कटी हुई लकड़ियों, ईंटों, सूखे पत्तों और अनुपयोगी कबाड़ के ढेर सांपों के छिपने के लिए आदर्श और सुरक्षित ठिकाना बन जाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात के दिनों में बेसमेंट, स्टोर रूम, बाथरूम और मकान के निचले हिस्सों में सीलन काफी बढ़ जाती है। अत्यधिक नमी वाले ऐसे अंधेरे स्थानों पर कीड़े, मेंढक और अन्य छोटे जीव तेजी से पनपते हैं। यह वातावरण सांपों को एक ही जगह पर भरपूर भोजन और छिपने की बेहतरीन सुरक्षा दोनों मुहैया कराता है। मकान में कहीं भी पाइप लीकेज या पानी का रिसाव हो तो उसकी तत्काल मरम्मत कराई जानी चाहिए।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और आपातकालीन कदम
सांपों को रिहायशी दायरे से दूर रखने के लिए परिसर की झाड़ियों और ऊंची घास की समय-समय पर कटाई करना अनिवार्य है। इसके साथ ही सूखी पत्तियों, लकड़ियों, ईंटों और फालतू कबाड़ का तुरंत निस्तारण करें। मुख्य दरवाजों के नीचे बची खाली जगह, चौखटों, दीवारों की दरारों और पाइप या जल निकासी नालियों के आसपास बने छेदों को सीमेंट अथवा लोहे की जाली से पूरी तरह बंद कर देना चाहिए।
महादेव पटेल चेतावनी देते हैं कि घर के भीतर या आसपास सांप दिख जाने पर उसे स्वयं लाठी से भगाने अथवा पकड़ने की कोशिश करना जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे हालात में परिवार के सदस्यों, विशेषकर बच्चों को सुरक्षित दूरी पर रखें और जीव को तंग न करें। स्थानीय वन विभाग अथवा प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू टीम से तुरंत संपर्क साधना चाहिए। यदि दुर्भाग्यवश किसी व्यक्ति को सांप डस ले, तो झाड़-फूंक में वक्त बर्बाद किए बिना सीधे निकटतम अस्पताल पहुंचना चाहिए और तुरंत एंटी वेनम का इंजेक्शन लगवाना चाहिए।





















