अक्सर सुबह दफ्तर, कॉलेज या किसी जरूरी काम के लिए निकलते वक्त अलमारी का दरवाजा खोलते ही कपड़ों का बिखरा हुआ अंबार सामने आ जाता है। मनपसंद ड्रेस तलाशने में ही कई कीमती मिनट बर्बाद हो जाते हैं और एक कपड़ा खींचते ही बाकी पूरा ढेर नीचे आ गिरता है। अधिकांश लोग इसे अलमारी छोटी होने या कपड़ों की अधिकता मान लेते हैं, लेकिन असल समस्या जगह की कमी नहीं बल्कि कपड़ों को रखने का गलत तरीका है। जब हम कपड़ों को एक के ऊपर एक लादते चले जाते हैं, तो नीचे दबे कपड़े न सिर्फ दिखना बंद हो जाते हैं बल्कि पूरी उपलब्ध जगह का ढांचा भी बिगड़ जाता है। खासकर कॉम्पैक्ट घरों और छोटे कमरों में यह रोजाना की बड़ी सिरदर्दी बन जाती है। ऐसे में नई अलमारी खरीदने या महंगे रेनोवेशन पर पैसे खर्च करने के बजाय मौजूदा स्पेस को वैज्ञानिक तरीके से व्यवस्थित करना कहीं अधिक समझदारी भरा कदम है।
अलमारी खाली कर छंटाई से करें नई शुरुआत
वार्डरोब को व्यवस्थित करने का पहला और सबसे बुनियादी कदम है कि अलमारी को पूरी तरह खाली कर दिया जाए। जब तक आप अलमारी की हर शेल्फ को एकदम साफ नहीं करेंगे, तब तक आपको उपलब्ध वास्तविक जगह का सही अंदाजा नहीं लग पाएगा। सारे कपड़े बाहर निकालने के बाद उन्हें तीन मुख्य श्रेणियों में बांटें। पहली श्रेणी में वे कपड़े रखें जिन्हें आप रोजाना या हफ्ते में बार-बार पहनते हैं। दूसरी श्रेणी में पार्टी वियर, शादी-ब्याह या कभी-कभार पहने जाने वाले परिधान होने चाहिए। तीसरी श्रेणी उन कपड़ों की बनाएं जो पिछले कई महीनों से बिल्कुल नहीं पहने गए हैं और निकट भविष्य में भी उनके इस्तेमाल की कोई गुंजाइश नहीं दिखती। जिन कपड़ों की उपयोगिता खत्म हो चुकी है, उन्हें अलमारी से स्थायी रूप से हटा दें। ऐसा करने से बिना एक भी रुपया खर्च किए अलमारी का एक बड़ा हिस्सा तुरंत खाली हो जाता है।
मौसम के हिसाब से कपड़ों का विभाजन
अलमारी में रोजाना की जगह बचाने के लिए मौसमी कपड़ों को अलग करना बेहद जरूरी रणनीति है। गर्मी या उमस के मौसम में मोटे जैकेट, भारी स्वेटर, शॉल और ऊनी कपड़ों को मुख्य शेल्फ पर सजाकर रखने का कोई औचित्य नहीं होता। ये कपड़े अलमारी की सबसे उपयोगी और सुलभ जगह को घेर लेते हैं। बेहतर तरीका यह है कि इन मौसमी कपड़ों को अच्छी तरह धोकर और सुखाकर किसी फैब्रिक स्टोरेज बैग या बॉक्स में सुरक्षित पैक कर दें। इन्हें अलमारी के सबसे ऊपरी शेल्फ पर, नीचे के खाली बक्से में या बिस्तर के अंदर बने स्टोरेज में रखा जा सकता है। जैसे ही मौसम बदले, गर्म कपड़ों को बाहर निकालें और हल्के गर्मियों के कपड़ों को पैक करके उनकी जगह रख दें। इस चक्रीय व्यवस्था से आपकी मुख्य अलमारी हमेशा हल्की और सांस लेने लायक बनी रहती है।
क्षैतिज ढेर के बजाय वर्टिकल फोल्डिंग का फॉर्मूला
पारंपरिक तौर पर हम टी-शर्ट, टॉप, सलवार और अन्य परिधानों को चौड़ा मोड़कर एक के ऊपर एक रखते हैं। इस फ्लैट तरीके की सबसे बड़ी खामी यह है कि बीच या नीचे से कोई कपड़ा निकालते ही पूरा संतुलन बिगड़ जाता है। इसका सबसे कारगर समाधान वर्टिकल फोल्डिंग यानी कपड़ों को खड़ा करके रखना है। टी-शर्ट या हल्के कपड़ों को इस तरह से कॉम्पैक्ट रोल या आयताकार रूप में मोड़ें कि वे दराज या शेल्फ में सीधे खड़े रह सकें। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि शेल्फ खोलते ही हर कपड़ा एक नजर में साफ दिखाई देता है। आप जिस कपड़े को चाहें, बिना बाकी कपड़ों को छुए या अस्त-व्यस्त किए आसानी से बाहर खींच सकते हैं। यही नियम जींस और मोटे ट्राउजर्स पर भी लागू होता है। सही चौड़ाई में फोल्ड करके रखने से अलमारी की गहराई का पूरा इस्तेमाल होता है और कपड़ों के ढेर की अनावश्यक ऊंचाई खत्म हो जाती है।
हैंगर का संतुलित और व्यावहारिक इस्तेमाल
कई लोग अलमारी में मौजूद हैंगर रॉड पर हर तरह के कपड़े लटकाने लगते हैं, जिससे हैंगिंग स्पेस तुरंत भर जाता है और कपड़े आपस में दबकर मुड़ने लगते हैं। हैंगर का इस्तेमाल बेहद चुनकर करना चाहिए। औपचारिक शर्ट, महंगे कोट, ब्लेजर, नाजुक सिल्क या ऐसी ड्रेसेस जिन्हें मोड़ने पर सिलवटें पड़ने का डर रहता है, सिर्फ उन्हें ही हैंगर पर टांगना चाहिए। साधारण टी-शर्ट, पायजामा, लोअर और घर में पहनने वाले सूती कपड़ों को फोल्ड करके शेल्फ में रखना चाहिए ताकि हैंगिंग रॉड खाली रहे। यदि आपकी अलमारी में हैंगिंग स्पेस की ऊंचाई अच्छी है, तो आप मल्टी-लेयर हैंगर्स का उपयोग कर सकते हैं। एक ही मुख्य हैंगर में नीचे की तरफ तीन से चार लेयर बनी होती हैं, जिन पर कई ट्राउजर्स या दुपट्टे एक साथ व्यवस्थित हो जाते हैं। हालांकि यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि एक ही जगह बहुत ज्यादा कपड़े न ठूंसे जाएं, वरना उन्हें निकालते और डालते समय अन्य कपड़ों में खिंचाव आ सकता है।
डेड स्पेस और भीतरी दीवारों का स्मार्ट उपयोग
अलमारी के भीतर शेल्फ के ऊपर या दो रैक्स के बीच अक्सर काफी खाली जगह छूट जाती है, जिसे आमतौर पर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इस तरह के खाली स्थानों पर छोटे पारदर्शी स्टोरेज बॉक्स, कपड़े के बने पाउच या बास्केट्स रखे जा सकते हैं। इनमें बेल्ट, टाई, स्कार्फ, घड़ियां या अन्य छोटी एक्सेसरीज सुरक्षित रखी जा सकती हैं। इसके अलावा अलमारी के दरवाजों के अंदरूनी हिस्से का भी बेहतरीन उपयोग किया जा सकता है। दरवाजे के भीतरी हिस्से पर चिपकने वाले मजबूत हुक लगाए जा सकते हैं। इन हुक्स पर टोपी, हल्के दुपट्टे, बेल्ट या रोजमर्रा के छोटे बैग्स आसानी से लटकाए जा सकते हैं। बस हुक लगाते समय यह सुनिश्चित कर लें कि उनके कारण अलमारी का दरवाजा बंद होने में कोई रुकावट न आए।
छोटे सामान के लिए शेल्फ डिवाइडर और ड्रॉअर बॉक्स
मोजे, अंडरगारमेंट्स, रुमाल और हेयर एक्सेसरीज जैसी छोटी चीजों को अगर बड़े कपड़ों के साथ या खुली शेल्फ में रख दिया जाए, तो वे मिनटों में गुम हो जाती हैं और बाकी कपड़ों को भी बिखेर देती हैं। छोटी चीजों को व्यवस्थित रखने के लिए ड्रॉअर डिवाइडर या छोटे कम्पार्टमेंट वाले डिब्बों का उपयोग करें। जब हर छोटी चीज के लिए एक निश्चित खांचा तय होगा, तो आपको किसी एक रुमाल के लिए पूरी अलमारी नहीं पलटनी पड़ेगी। इसके साथ ही एक नियम यह भी बनाएं कि रोजाना काम आने वाले परिधान आंखों के ठीक सामने वाली बीच की शेल्फ में रहें। जिन कपड़ों की जरूरत महीने में एक-दो बार पड़ती है, उन्हें सबसे ऊपर या पीछे की तरफ रखें। इससे बार-बार होने वाली उथल-पुथल पूरी तरह रुक जाती है।
कपड़े वापस रखने की आदत और नियमित रखरखाव
अलमारी को चाहे कितना भी सजा दिया जाए, अगर दैनिक आदतें नहीं बदली गईं तो एक हफ्ते में व्यवस्था फिर चरमरा जाएगी। सबसे सरल और जरूरी नियम यह है कि इस्तेमाल के बाद या धोने व प्रेस करने के बाद कपड़े को तुरंत उसके तय स्थान पर ही रखा जाए। थकावट में कपड़े को किसी भी खाली दिख रही शेल्फ पर फेंक देने की आदत ही पूरे अव्यवस्था की जड़ बनती है। जब आप हर कपड़े के लिए एक निश्चित घर तय कर देते हैं, तो उसे वापस रखने में मुश्किल से दस सेकंड का समय लगता है। अगर आप हर रात सोने से पहले या सुबह तैयार होने के बाद अलमारी को केवल एक मिनट देकर सीधा कर लें, तो आपको कभी भी घंटों बैठकर अलमारी साफ करने की नौबत नहीं आएगी।



















