भारतीय संस्कृति में आम के पौधे को प्रेम, समृद्धि और आध्यात्मिक विकास का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक शास्त्रों में इस पावन पौधे को देव वृक्ष की पदवी से नवाजा गया है। लोग अपने घरों और छतों पर गमलों में भी आम का पौधा बड़ी आसानी से लगा लेते हैं। भारत में सबसे ज्यादा संख्या में लोग देसी आम के पौधे लगाना पसंद करते हैं। हालांकि यह भी एक सच्चाई है कि कई बार आम के पौधे में आसानी से फल नहीं आते हैं और वह केवल हरा-भरा ही बना रहता है। कई बार उचित देखभाल न मिलने के कारण इसकी ग्रोथ बीच में ही थम जाती है या फिर पौधा सूख जाता है। अगर आपके पौधे की बढ़वार रुक गई है और आप उस पर बंपर फल पाना चाहते हैं, तो इसकी सही देखभाल से जुड़े तमाम तरीकों को जानना बेहद जरूरी है।
गमले में आम का पौधा लगाने के लिए बारिश का मौसम सबसे बेहतरीन माना जाता है। जुलाई, अगस्त और सितंबर के महीनों के दौरान आप आसानी से गमले में आम का पौधा लगा सकते हैं। पौधे को हमेशा किसी अच्छी नर्सरी से खरीदकर लाना चाहिए। अगर आप ग्राफ्टेड पौधा लाते हैं, तो उस पर फल बहुत जल्दी आने लगते हैं। यदि आप आम की गुठली से पौधा तैयार करते हैं, तो उसे फल देने में करीब 5 से 6 साल का लंबा समय लग सकता है। ऐसे में नर्सरी से किसी उन्नत किस्म का ग्राफ्टेड पौधा लाना ही समझदारी है। ब्लैक कस्तूरी और बार्क उदय जैसी उन्नत ग्राफ्टेड किस्में लगानी सबसे फायदेमंद साबित होती हैं। इस वैरायटी के पौधे लगभग 1 से 2 साल के भीतर ही फल देना शुरू कर देते हैं। अगर आप गुठली से ही पौधा उगाते हैं, तो बाद में आपको घर पर ही उसकी ग्राफ्टिंग करनी पड़ेगी।
आम का पौधा लगाने के लिए कम से कम 20 इंच का बड़ा गमला या ग्रो बैग का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके लिए मिट्टी हमेशा खेत की या फिर बाग-बगीचे की ही लेनी चाहिए। गमले की मिट्टी तैयार करने के लिए 50 प्रतिशत बगीचे की मिट्टी में 20 प्रतिशत वर्मी कंपोस्ट और 30 प्रतिशत कोकोपीट या रेत को अच्छी तरह मिला लें। इसी मिट्टी के मिश्रण में 500 ग्राम नीम खली और कैल्शियम पाउडर भी मिला देना चाहिए। सभी चीजों को आपस में अच्छी तरह मिलाकर एक उपजाऊ मिश्रण तैयार कर लें। इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि गमले में पानी की निकासी के लिए ड्रेनेज होल जरूर होना चाहिए। अब गमले में सबसे पहले मिट्टी की एक परत बिछाएं। नर्सरी से लाए गए पौधे को उसके बैग से बाहर निकालते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उसकी जड़ें सुरक्षित रहें। पौधे को इस बड़े गमले में स्थापित करने के बाद उसमें अच्छी तरह से पानी डाल दें।
आम के पौधे की परवरिश में काफी ज्यादा धैर्य की आवश्यकता होती है। आमतौर पर इसमें कम से कम दो साल बाद ही फल आने शुरू होते हैं। फल वाले पौधों में निराई-गुड़ाई का काम बहुत जरूरी होता है। नियमित निराई-गुड़ाई करने से मिट्टी को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है, जिससे पौधे की ग्रोथ तेजी से होती है। पौधे को हर 20 से 25 दिन के अंतराल पर नियमित रूप से खाद देते रहना चाहिए। आप कभी दो से तीन मुट्ठी वर्मी कंपोस्ट दे सकते हैं तो कभी सड़े हुए गोबर की खाद का उपयोग कर सकते हैं। जब भी पौधे को खाद देनी हो, उससे ठीक दो दिन पहले पानी देना बंद कर दें। यदि आप चाहते हैं कि आपका आम का पौधा घना और मजबूत बने, तो इसकी प्रूनिंग यानी कटाई-छंटाई करना बहुत जरूरी है। प्रूनिंग के लिए सबसे सही समय 15 जून से 30 जून के बीच का होता है। अगर आप पौधे की कटाई-छंटाई नहीं करेंगे, तो वह सिर्फ लंबाई में बढ़ता जाएगा। सही तरीके से प्रूनिंग करने से पौधे में नई-नई शाखाएं फूटती हैं, जिससे पौधा घना होता है और जितने ज्यादा घने पौधे होंगे, उस पर उतने ही अधिक फल आएंगे। प्रूनिंग करते समय हमेशा ध्यान रखें कि कट 45 डिग्री के एंगल पर होना चाहिए ताकि वहां पानी की बूंदें न ठहर सकें। इसके बाद कटे हुए हिस्से पर तुरंत हल्दी का लेप लगा देना चाहिए ताकि पौधे में किसी तरह का फंगस न लगे।
जब आपका पौधा 4 से 5 महीने का हो जाए, तो उसमें वर्मी कंपोस्ट के साथ दो चम्मच प्रोम खाद जरूर मिलानी चाहिए। यह फॉस्फोरस युक्त एक बेहतरीन ऑर्गेनिक मैन्योर होती है। इस जैविक खाद को मुख्य रूप से गोबर, कंपोस्ट और रॉक फॉस्फेट को आपस में मिलाकर तैयार किया जाता है। इसके अलावा पौधे में एक मुट्ठी धानुका की धनज़ाइम गोल्ड भी डाल देनी चाहिए। यह एक प्रकार का जैविक प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर और बायो-स्टिमुलेंट है, जिसे समुद्री घास यानी सीवीड से तैयार किया जाता है। इसके प्रयोग से पौधे की बढ़वार बहुत अच्छी होती है और पैदावार भी शानदार मिलती है।
जब आम का पौधा एक साल का हो जाए, तब उसे एक बार में एक किलोग्राम खाद की आवश्यकता होती है। बाजार में अब विशेष प्रकार की फ्रूटिंग मिक्स खाद भी मिलने लगी है, जिसमें आयरन, जिंक, फॉस्फोरस, कैल्शियम और पोटाश जैसे जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। इस तरह की खाद देते समय गमले की ऊपरी मिट्टी को थोड़ा हटा लेना चाहिए, फिर खाद डालकर उसे ऊपर से मिट्टी से अच्छी तरह ढंक देना चाहिए। इस प्रकार की खाद साल में छह महीने पर सिर्फ एक बार ही दी जानी चाहिए। कई बार आम के पौधे में फूल और फल न आने की समस्या बहुत आम होती है। यदि आपने ग्राफ्टेड पौधा लगाया है और रोपण के तीन साल बाद भी उस पर फूल नहीं आ रहे हैं, तो गमले की ऊपर की मिट्टी को बाहर निकाल लें। अब एक किलोग्राम वर्मी कंपोस्ट लेकर उसकी पहली परत गमले में बिछा दें। इसके बाद उस पर 15 ग्राम डीएपी खाद डाल दें और फिर से वर्मी कंपोस्ट की एक और परत बना दें। अंत में पौधे में पानी डाल दें। इसके दो-तीन दिन बाद 5 रुपये के एग्रीकल्चरल सल्फर की एक चम्मच को पानी में अच्छी तरह घोलकर पूरे पौधे पर स्प्रे कर देना चाहिए। इस प्रक्रिया के ठीक 15 दिन बाद पौधे में फूल आने शुरू हो जाएंगे।
आम के पौधे में भरपूर मात्रा में फूल और फल लाने के लिए आप एक और बेहद आसान उपाय आजमा सकते हैं। इसके लिए गमले की मिट्टी की अच्छी तरह से गुड़ाई कर लें। अब चार मुट्ठी सड़ा हुआ गोबर, चार मुट्ठी वर्मी कंपोस्ट, एक मुट्ठी बायोजाइम ग्रेन्यूल्स और एक मुट्ठी सीवीड एक्सट्रैक्ट को आपस में मिला लें। इस मिश्रण में आखिर में दो मुट्ठी नीम खली पाउडर भी मिला दें। आप हर तीन महीने में एक बार इस विशेष खाद का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके प्रयोग के सिर्फ 15 दिन बाद ही आपको बड़ा बदलाव नजर आने लगेगा और पौधे में फूल दिखाई देने लगेंगे। इसके अलावा फिटकरी को पानी में घोलकर भी पौधे की जड़ों में डाला जा सकता है। पौधे की सेहत और ग्रोथ के लिए नीला थोथा यानी कॉपर सल्फेट को चूने में घोलकर देना भी काफी फायदेमंद होता है। सरसों की खली को पानी में भिगोकर घोल तैयार करने और उसे पौधे में डालने से पेड़ों पर अधिक से अधिक फल आते हैं। आम के पौधे की पत्तियों में कीड़े बहुत तेजी से लगते हैं, जिनसे बचाव के लिए समय-समय पर नीम ऑयल का छिड़काव करते रहना चाहिए। अगर आप इन तमाम बातों को ध्यान में रखकर अपने आम के पौधे की देखभाल करेंगे, तो यकीनन आपको बंपर पैदावार हासिल होगी।



















