वर्तमान में बारिश का मौसम चल रहा है और यह समय नींबू का पौधा लगाने के लिए बहुत उपयुक्त माना जाता है। वैसे तो नींबू का पौधा लगाने का सबसे बढ़िया समय फरवरी से मार्च यानी वसंत ऋतु और जुलाई से सितंबर यानी मानसून का महीना होता है। नींबू की आवश्यकता रसोई से लेकर घर की साफ-सफाई तक पूरे साल बनी रहती है। इसकी खेती से बंपर मुनाफा कमाया जा सकता है, लेकिन कई बार पौधों में फूल और फल नहीं आते हैं। यदि आपके पास भी नींबू का पौधा है और उस पर फल नहीं लग रहे हैं, तो कुछ खास बातों और जैविक खादों की मदद से शानदार पैदावार ली जा सकती है। इसके लिए सही नर्सरी चयन से लेकर गमले के आकार और मिट्टी के मिश्रण तक की पूरी प्रक्रिया को समझना जरूरी है।
सही पौधे और गमले का चयन
घर पर नींबू का पौधा लगाने के लिए हमेशा किसी अधिकृत नर्सरी से ही प्लांट खरीदना चाहिए। यह पौधा कम से कम छह महीने पुराना होना चाहिए और नींबू की हमेशा बारहमासी वैरायटी का चुनाव करना बेहतर रहता है। कागजी नींबू की वैरायटी भी काफी अच्छी मानी जाती है। पौधे को उगाने के लिए कम से कम 18 इंची का गमला लेना चाहिए और उसके तल में ड्रेनेज होल जरूर बना लेना चाहिए। गमले की मिट्टी पूरी तरह बाग-बगीचे की होनी चाहिए जिसमें किसी प्रकार के कंकड़-पत्थर न हों। मिट्टी तैयार करते समय उसमें अच्छी मात्रा में वर्मी कंपोस्ट और सड़ी हुई गोबर की खाद मिला लें।
मिट्टी में मिलाएं जरूरी पोषक तत्व
पौधे की जड़ों को फंगस से बचाने के लिए मिट्टी में 250 ग्राम नीम खली जरूर मिलानी चाहिए, जिससे पत्तियों में प्राकृतिक चमक भी आती है। नींबू के विकास के लिए कैल्शियम बेहद जरूरी होता है, इसलिए मिट्टी में करीब 500 ग्राम स्टोन पाउडर और एक मुट्ठी आयरन पाउडर मिलाया जाना चाहिए। सभी सामग्रियों का एक बेहतरीन मिश्रण तैयार कर पौधे को गमले में रोप दें और तुरंत अच्छी तरह पानी दे दें। यदि नर्सरी से लाए गए पौधे में पहले से ही छोटे नींबू लगे हुए हैं, तो गमले में लगाने के तुरंत बाद उन फलों को तोड़ देना आवश्यक है, ताकि पौधे की मुख्य ग्रोथ में कोई रुकावट न आए।
पानी की मात्रा और प्रूनिंग की प्रक्रिया
नींबू के पौधे को बहुत अधिक पानी की जरूरत नहीं होती है। यदि आप पौधे से अधिकतम फ्रूटिंग चाहते हैं, तो समय-समय पर प्रूनिंग यानी ट्रिमिंग करना बेहद जरूरी है। पौधे की जो शाखाएं सूख या खराब हो चुकी हैं, उन्हें काटकर तुरंत हटा देना चाहिए। पुरानी शाखाओं को छांटने से नई शाखाएं फूटती हैं और पौधा घना बनता है। गमले की मिट्टी की नियमित रूप से निराई-गुड़ाई करते रहें और हर 20 से 25 दिन के अंतराल पर देसी खाद डालें ताकि मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बनी रहे। इसके अलावा, पौधे को रोजाना कम से कम 6 से 8 घंटे की धूप मिलना अनिवार्य है।
जैविक खाद और कीट नियंत्रण
मार्च से सितंबर के बीच का समय नींबू के पौधे की तीव्र वृद्धि के लिए जाना जाता है। इन महीनों में पौधे को अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है और खाद हमेशा बदल-बदल कर देनी चाहिए। यदि आपने मार्च के महीने में वर्मी कंपोस्ट दी है, तो अप्रैल के दौरान लिक्विड खाद का इस्तेमाल करें। इसके अलावा, लाल-भूरे समुद्री शैवाल के रस से तैयार जैविक खाद जिसे सागरिका कहा जाता है, उसका उपयोग भी किया जा सकता है। यह खाद पौधों में भोजन बनाने की प्रक्रिया को तेज करती है, जड़ और तनों का विकास बेहतर करती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। इसके एक छोटे ढक्कन को एक लीटर पानी में घोलकर गमले में डालने से 15 दिन के भीतर फूल आने लगते हैं। कीटों के प्रकोप से बचाने के लिए हर 15 दिन पर नीम ऑयल का छिड़काव जारी रखें।
फूल झड़ने से रोकने के उपाय और अन्य नुस्खे
जब पौधे में फूल आने लगें, तो पानी की मात्रा कम कर देनी चाहिए अन्यथा सारे फूल झड़ सकते हैं। इस चरण में गुड़ाई और निराई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। नींबू के पौधे में बंपर फूल लाने के लिए सरसों खली का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसे केवल दो बार उपयोग करना है। पहली बार फूल आने से ठीक पहले और दूसरी बार जब फूल से फल बनने की प्रक्रिया शुरू हो। इसके अलावा, आलू को मिक्सी में पीसकर पेस्ट बना लें और उसे छानकर कटोरे में आधा लीटर पानी मिला लें। इस मिश्रण को गमले में डालने के साथ-साथ पौधे पर स्प्रे भी किया जा सकता है। इसी तरह फिटकरी के पानी को भी गमले की मिट्टी में डाला जा सकता है। अगस्त के महीने में इसकी टहनियों की ट्रिमिंग अवश्य कर दें और बारिश के दौरान जो शाखाएं झुक रही हैं, उन्हें बांस की लकड़ियों का सहारा दें।



















