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बहराइच के त्रिलोकी ने घर की दीवार के सहारे उगाया ड्रैगन फ्रूट, आंगन में तैयार किया हरा-भरा किचन गार्डनजीवनशैली
19 सित॰ 2026, 9:24 pm (39 दिन पहले)· 1

बहराइच के त्रिलोकी ने घर की दीवार के सहारे उगाया ड्रैगन फ्रूट, आंगन में तैयार किया हरा-भरा किचन गार्डन

उत्तर प्रदेश के बहराइच में किसान त्रिलोकी ने बिना खेत केवल गमलों, प्लास्टिक बैग्स और आंगन की दीवार के सहारे ड्रैगन फ्रूट और रंग-बिरंगी सब्जियां उगाकर मिसाल कायम की है।

शहरी और ग्रामीण इलाकों में सीमित जगह के भीतर फल और हरी सब्जियां उगाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। अपनी छतों और आंगनों को हरा-भरा बनाकर लोग न केवल शौक पूरा कर रहे हैं, बल्कि घर की रसोई के लिए ताजी उपज भी हासिल कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के किसान त्रिलोकी ने भी अपने मकान के छोटे से आंगन को एक व्यवस्थित घरेलू नर्सरी का रूप दे दिया है। उन्होंने अपने आंगन में गमलों और प्लास्टिक के थैलों के सहारे शिमला मिर्च, लाल भिंडी, हरी मिर्च और बंदगोभी जैसी कई सब्जियां तैयार की हैं। इसके अलावा उनके परिसर का सबसे बड़ा आकर्षण घर की पक्की दीवार के सहारे फलता-फूलता ड्रैगन फ्रूट का विदेशी पौधा है।

सीमित संसाधनों और गमलों में तैयार की घरेलू बगिया

त्रिलोकी ने बहुत बड़े बजट या खुली खेती वाली जमीन के बिना ही यह पूरा किचन गार्डन स्थापित किया है। उन्होंने पौधों की रोपाई के लिए प्लास्टिक के थैलों, साधारण गमलों और सीमित मात्रा में उपजाऊ मिट्टी का इस्तेमाल किया। इन बुनियादी संसाधनों के जरिए तैयार पौधों से अब उनके परिवार की रोजमर्रा की हरी सब्जियों की जरूरत आसानी से पूरी हो जाती है। घर में ही उगाई गई इन ताजी सब्जियों के कारण उन्हें छोटी-मोटी जरूरतों के लिए बार-बार स्थानीय बाजार पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

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रंग-बिरंगी शिमला मिर्च और अमरूद से महका आंगन

आंगन में रखे गमलों में विविधता साफ दिखाई देती है। यहां लाल, पीली और हरी शिमला मिर्च के अलग-अलग गमले कतार में सजाए गए हैं। इनके साथ ही तीखी हरी मिर्च, पत्तेदार बंदगोभी, लाल भिंडी और फलदार अमरूद के पौधे भी पूरी तरह स्वस्थ होकर विकसित हो रहे हैं। त्रिलोकी के अनुसार, इन पौधों की नियमित देखभाल से घरेलू स्तर पर पर्याप्त मात्रा में सब्जियां मिल जाती हैं, जिससे घर के बजट और सेहत दोनों को सहारा मिलता है।

दीवार के सहारे ढाई साल में तैयार हुआ ड्रैगन फ्रूट

इस पूरे किचन गार्डन में सबसे अनोखा प्रयोग ड्रैगन फ्रूट का है। व्यावसायिक स्तर पर जब ड्रैगन फ्रूट की खेती की जाती है, तब पौधों को सीधा खड़ा रखने के लिए खेतों में सीमेंट के खंभे और लोहे या कंक्रीट की रिंग जैसे भारी सहारे लगाए जाते हैं। त्रिलोकी ने इस महंगे ढांचे के बजाय अपने घर की साधारण दीवार के किनारे पौधा रोप दिया। यह कैक्टस प्रजाति का पौधा धीरे-धीरे दीवार की सतह को सहारा बनाकर ऊपर चढ़ता गया। लगभग ढाई साल के लंबे इंतजार और उचित देखभाल के बाद अब इस बेलनुमा पौधे पर फल आने लगे हैं, जिसे देखने के लिए आसपास के लोग भी पहुंच रहे हैं।

उद्यान विभाग की यात्रा से मिला था नया विचार

त्रिलोकी के अनुसार इस अनूठे प्रयोग की प्रेरणा उन्हें सरकारी उद्यान विभाग के दौरे के दौरान मिली थी। वहां उन्होंने ड्रैगन फ्रूट के पौधों को देखा और समझा। इसके बाद वह वहां से एक पौधा लेकर अपने घर आए और उसे आंगन में दीवार के पास लगा दिया। समय के साथ तना मजबूत होता गया और बिना किसी विशेष खंभे के दीवार की मदद से फलता-फूलता रहा। उनका यह अनुभव स्पष्ट करता है कि जिनके पास बड़ी कृषि भूमि नहीं है, वे भी छत, बालकनी या आंगन में सही देखभाल, नियमित पानी और गमलों की मदद से अपनी जरूरत के फल और सब्जियां आसानी से उगा सकते हैं।

सवाल-जवाब

त्रिलोकी ने किचन गार्डन कहां और किस जिले में तैयार किया है?
त्रिलोकी ने यह किचन गार्डन उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में अपने घर के आंगन में तैयार किया है।
त्रिलोकी के किचन गार्डन में कौन-कौन सी सब्जियां और फल लगे हैं?
उनके आंगन में लाल, पीली और हरी शिमला मिर्च, हरी मिर्च, बंदगोभी, लाल भिंडी, अमरूद और ड्रैगन फ्रूट उगे हुए हैं।
पौधे लगाने के लिए उन्होंने किन चीजों का उपयोग किया?
उन्होंने पौधों को उगाने के लिए साधारण गमलों, प्लास्टिक के थैलों और सीमित मात्रा में मिट्टी का इस्तेमाल किया।
दीवार के सहारे लगे ड्रैगन फ्रूट में फल आने में कितना समय लगा?
दीवार के सहारे ऊपर चढ़े इस ड्रैगन फ्रूट के पौधे में करीब ढाई साल बाद फल आने शुरू हुए।
त्रिलोकी को ड्रैगन फ्रूट घर पर लगाने की प्रेरणा कहां से मिली?
उन्हें यह विचार तब आया जब उन्होंने उद्यान विभाग के कार्यालय में ड्रैगन फ्रूट का पौधा देखा था।
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