घरों में लगातार इस्तेमाल के बाद गद्दे अक्सर दब जाते हैं, रूई बैठ जाती है या फिर उनका बाहरी खोल फट जाता है। ऐसे हालात में ज्यादातर लोग पुराने गद्दे को अनुपयोगी मानकर बाहर फेंक देते हैं और बाजार से महंगा नया गद्दा खरीद लाते हैं। हालांकि, उत्तर प्रदेश के जौनपुर स्थित कटघरा के गद्दा कारीगर सद्दाम का कहना है कि पुराने गद्दों को हटाने के बजाय उनकी मरम्मत करवाकर उन्हें बिल्कुल पहले जैसा बनाया जा सकता है। सद्दाम के अनुसार, मात्र दो सौ से तीन सौ रुपये के साधारण खर्च में कोई भी पुराना गद्दा पूरी तरह सुधरकर दोबारा इस्तेमाल के लायक हो जाता है।
घर पर या मशीन से रूई की रीसाइक्लिंग का आसान तरीका
अगर कोई व्यक्ति अपने स्तर पर प्रयास करना चाहता है, तो गद्दे का खोल खोलकर उसकी पूरी रूई बाहर निकाली जा सकती है। घर पर ही रूई के रेशों को हाथों से अलग-अलग सुलझाकर गद्दे में दोबारा भरा जा सकता है, जिससे उसमें फूलापन लौट आता है। वहीं पेशेवर तरीके से मशीन में धुनाई कराने पर यह प्रक्रिया बेहद तेज और असरदार साबित होती है। मशीन में पुरानी रूई को धुनने में महज 15 से 20 मिनट का समय लगता है, जिसके बाद दबी हुई पुरानी रूई एकदम ताजी और नई जैसी हल्की व फूली हुई बन जाती है। ऐसे में नई रूई खरीदने पर बेवजह ज्यादा पैसा खर्च करने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
कारीगर का अनुभव और काम की तय दरें
कटघरा इलाके में गद्दा बनाने का काम कर रहे कारीगर सद्दाम इस पेशे में पिछले 12-13 साल से सक्रिय हैं। वे बताते हैं कि यदि किसी पुराने गद्दे का खोल फट चुका हो या रूई कठोर होकर बैठ गई हो, तो उसकी पूरी मरम्मत संभव है। उनका काम वजन यानी किलोग्राम के हिसाब से तय होता है। कारीगर 50 रुपये प्रति किलो की तय दर पर काम करते हैं, जिसमें पुरानी रूई की मशीन से धुनाई, खोल के भीतर व्यवस्थित भराई और मजबूत धागों से तगाई की पूरी प्रक्रिया शामिल रहती है। इसके अलावा, यदि ग्राहक के घर में गद्दा खराब पड़ा है, तो कारीगर उसे खुद ग्राहक के घर से अपनी दुकान तक लाते हैं और पूरी तरह तैयार करने के बाद वापस घर तक पहुंचा देते हैं।
वजन के विकल्प और नए गद्दे के मुकाबले भारी बचत
गद्दों का निर्माण अमूमन 6 किलो वजन से शुरू होता है। कारीगरों ने ग्राहकों की जरूरत के मुताबिक 30 किलो, 40 किलो और 50 किलो तक के भारी डबल बेड गद्दे भी तैयार किए हैं। मरम्मत की कुल लागत गद्दे के कुल वजन पर निर्भर करती है। उदाहरण के तौर पर, 8 किलो के गद्दे को दुरुस्त कराने में केवल 400 रुपये का कुल खर्च आता है। इसके विपरीत, यदि बाजार से बिल्कुल नया गद्दा खरीदा जाए, तो उसकी शुरुआती कीमत 800, 900 या 1000 रुपये तक बैठती है। यदि उस पर बेहतर गुणवत्ता वाला फैंसी खोल चढ़ा हो, तो उसका दाम और अधिक बढ़ जाता है। यही वजह है कि पुराने गद्दे को फेंकने के बजाय मात्र 50 रुपये प्रति किलो पर रीसाइकिल कराना एक किफायती और समझदारी भरा फैसला साबित होता है।


















