दीपावली महापर्व की शुरुआत धनतेरस के दिन से होती है, जिस दौरान खरीदारी की विशेष परंपरा निभाई जाती है। यदि कोई श्रद्धालु इस पावन अवसर पर मूल्यवान सोने अथवा चांदी की वस्तुएं खरीदने की स्थिति में नहीं है, तो वे रसोई के साधारण नमक को अपने घर ला सकते हैं। धार्मिक दृष्टिकोण से इस विशिष्ट तिथि पर नमक क्रय करना अत्यंत कल्याणकारी समझा जाता है, परंतु इस दौरान एक सावधानी अवश्य बरतनी चाहिए कि किसी अन्य व्यक्ति के साथ नमक का लेन-देन बिल्कुल न किया जाए।
नमक के जल से स्वच्छता और सकारात्मकता
इस तिथि पर दोपहर अथवा मध्याह्न काल में एक विशेष अनुष्ठान का विधान बताया गया है। घर की साफ-सफाई करते समय पानी में थोड़ा सा नमक मिलाकर फर्श पर पोछा लगाना चाहिए। ऐसी आध्यात्मिक मान्यता है कि यह साधारण उपाय परिवार के भीतर मौजूद समस्त नकारात्मक तरंगों का शमन कर देता है और संपूर्ण वातावरण को शुद्ध व सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण बना देता है।
माता लक्ष्मी की कृपा हेतु पीली कौड़ियों का विधान
पंडित कल्कि राम के अनुसार, इस पावन दिन बाजार जाकर न्यूनतम 16 की संख्या में पीले रंग वाली कौड़ियां अवश्य लानी चाहिए। पारंपरिक मान्यताओं में इन कौड़ियों का सीधा संबंध धन की देवी माता लक्ष्मी से माना गया है। सांझ ढलने के उपरांत घर के खुले आंगन में शुद्ध घी से भरे 13 दीपक प्रज्वलित करने का नियम है। इन तेरह दीपकों में से प्रत्येक के भीतर एक-एक कौड़ी अर्पित कर देनी चाहिए, जिसे अत्यंत मंगलकारी कृत्य माना गया है।
पूजा विधान और गोमती चक्र का विशेष महत्व
दीपदान संपन्न होने के पश्चात जो शेष तीन कौड़ियां बच जाएं, उन्हें लाल रंग के स्वच्छ सूती वस्त्र पर रखकर देवी लक्ष्मी की प्रतिमा के समक्ष स्थापित कर दें। तत्पश्चात इन पवित्र कौड़ियों पर कुमकुम तथा हल्दी का तिलक लगाना चाहिए। माता के सम्मुख श्रद्धापूर्वक दीप जलाकर मंत्रों का ध्यानपूर्वक जाप करना फलदायी रहता है। इसके अतिरिक्त, इस अवसर पर कौड़ियों के साथ-साथ 11 अथवा 16 गोमती चक्र भी खरीदे जा सकते हैं, क्योंकि धार्मिक परंपराओं के अनुसार गोमती चक्र को भी सीधे तौर पर माता लक्ष्मी के स्वरूप से जुड़ा माना गया है।


















