इंसान की जिंदगी की बुनियादी जरूरतों में रोटी, कपड़ा और मकान शामिल हैं। जब कोई व्यक्ति अपने सपनों का आशियाना बनाता है, तो उसमें उसकी बरसों की गाढ़ी कमाई लग जाती है। यही वजह है कि घर निर्माण के दौरान हर छोटी-बड़ी बारीकी का विशेष ध्यान रखना पड़ता है ताकि भविष्य में किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सके। कई बार लोग अनजाने में या लापरवाही के चलते निर्माण के समय कुछ जरूरी काम करना भूल जाते हैं, जो बाद में बड़ी समस्या बन जाते हैं। लोग मकान का ढांचा तो बेहद शानदार बनवा लेते हैं, लेकिन दीवारों पर प्लास्टर करवाते वक्त कुछ अहम बातों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसके परिणाम स्वरूप कुछ ही सालों में दीवारों का प्लास्टर टूटने और झड़ने लगता है।
दीवारों की सुंदरता और मजबूती पर असर
दीवारों से प्लास्टर उखड़ने और झड़ने से पूरे घर की खूबसूरती पर बुरा असर पड़ता है। सवाल यह उठता है कि प्लास्टर करवाते समय किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। जहानाबाद के घोसी प्रखंड के रहने वाले बैजू कुमार पेशे से एक राजमिस्त्री हैं और साथ ही कंस्ट्रक्शन का ठेका भी लेते हैं। निर्माण कार्य में 10 साल का लंबा अनुभव रखने वाले बैजू का मानना है कि घर की खूबसूरती पूरी तरह से उसकी बनावट पर निर्भर करती है। जब तक घर का निर्माण कायदे से नहीं होता, तब तक वह न तो ज्यादा सुंदर दिख पाता है और न ही लंबे समय तक टिक पाता है। इसके लिए नींव रखने से लेकर दीवारों पर पेंट करवाने तक हर चरण में सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। कई बार अच्छी क्वालिटी का सीमेंट इस्तेमाल करने के बाद भी दीवारों का प्लास्टर कुछ समय बाद अपने आप झड़ने लगता है और मसाले की परत भुरभुरी होकर नीचे गिरने लगती है।
दीवारों को अच्छी तरह भिगोना है सबसे जरूरी
राजमिस्त्री बैजू का कहना है कि यह दिक्कत लगभग हर दूसरे घर में देखने को मिलती है। इससे बचने के लिए मकान मालिक को प्लास्टर के समय ही पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए। जब भी मिस्त्री दीवारों पर प्लास्टर करें, तो उससे पहले दीवारों को पर्याप्त मात्रा में पानी से अच्छी तरह गीला यानी तराई किया जाना चाहिए। यदि ईंटों की दीवार को कायदे से नहीं भिगोया जाएगा, तो प्लास्टर का मसाला दीवार पर मजबूती से पकड़ नहीं बना पाएगा। इसके बाद जब वह मसाला सूखता है, तो कमजोर पकड़ के कारण दिक्कतें पैदा होने लगती हैं। इसलिए हमेशा यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्लास्टर से पहले दीवारों को जितना संभव हो सके, उतनी नमी दी जाए। जब दीवारें पूरी तरह और अंदर तक भीग जाती हैं, तो प्लास्टर की गुणवत्ता काफी बेहतर हो जाती है।
सीलन से बचाव और भविष्य की सुरक्षा
विशेषज्ञ मिस्त्री आगे बताते हैं कि इस तरीके से काम करवाने पर न तो भविष्य में मसाला छूटने की शिकायत आती है और न ही दीवारों में सीलन की समस्या उत्पन्न होती है। प्लास्टर करवाते वक्त हर मकान मालिक को यह बात अपने जेहन में रखनी चाहिए कि वे अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा घर में लगा रहे हैं, इसलिए उनका निवेश सही जगह और मजबूती के साथ इस्तेमाल होना चाहिए। बैजू पिछले 10 साल से घोसी प्रखंड और उसके आसपास के इलाकों में निर्माण का काम संभाल रहे हैं। अब वे बड़े-बड़े प्लॉट के ठेके लेकर मकान बनवाने का कार्य करते हैं। उनका साफ तौर पर कहना है कि घर बनवाते समय बरती गई छोटी-छोटी सावधानियां ही असल मायने में भविष्य की सुरक्षा की गारंटी बनती हैं।



















