दुर्गा पूजा का उत्सव शुरू होते ही चारों तरफ ढाक की गूंज, भक्तिमय माहौल और भव्य पंडालों की चहल-पहल देखने को मिलती है। इस पावन अवसर पर पारंपरिक बंगाली परिधान और आधुनिक फेस्टिव फैशन का बहुत सुंदर संगम नजर आता है। जब भी पूजा के उत्सव में शामिल होने की बात आती है, तो अधिकतर लोगों की पहली पसंद लाल रंग की सिल्क अथवा सूती साड़ी ही होती है। लाल रंग को बहुत पवित्र और मंगलकारी माना जाता है, परंतु यदि आप प्रत्येक वर्ष केवल इसी रंग का चयन करती रही हैं, तो इस बार अपनी अलमारी में नए प्रयोग शामिल किए जा सकते हैं।
सुबह की अंजलि और भोग के लिए मस्टर्ड पीला शेड
पीला रंग प्रसन्नता, सकारात्मक ऊर्जा और नए उल्लास का प्रतीक माना गया है। प्रातःकाल होने वाली अंजलि अथवा पंडालों में दोपहर के भोग के समय मस्टर्ड येलो सिल्क या कॉटन साड़ी पहनना एक ताजगी भरा पारंपरिक रूप देता है। इस पीले परिधान के साथ लाल रंग का कंट्रास्ट ब्लाउज और बालों में बंधा ताजा गजरा आपके पूरे रूप को बेहद निखार देता है।
संध्या आरती और पंडाल घूमने के लिए रॉयल ब्लू
यदि आप शाम के समय होने वाली आरती में शामिल होने या मित्रों संग विभिन्न पंडालों का भ्रमण करने की योजना बना रही हैं, तो रॉयल ब्लू एक अत्यंत शालीन और आकर्षक विकल्प सिद्ध होता है। पंडालों में सजी बहुरंगी रोशनियों के बीच यह गहरा शेड विशेष रूप से खिलकर सामने आता है। रॉयल ब्लू बनारसी या कांजीवरम साड़ी के साथ चांदी अथवा ऑक्सीडाइज्ड आभूषणों का मेल बहुत सुंदर लगता है।
शाही अंदाज के लिए एमराल्ड और बॉटल ग्रीन
हरा रंग जीवन में खुशहाली और नवप्रवर्तन का संदेश देता है। पूजा के दौरान सुनहरी जरी वाले बॉर्डर से सजी एमराल्ड अथवा बॉटल ग्रीन सिल्क साड़ी एक भारी और राजसी प्रभाव छोड़ती है। पारंपरिक सोने के गहनों के साथ इसका समन्वय किसी को भी एक गरिमामयी रूप प्रदान करने के लिए पर्याप्त है।
सदाबहार पहचान देती ऑफ-व्हाइट या आइवरी साड़ी
जो महिलाएं पूरी तरह लाल परिधान नहीं चुनना चाहतीं, लेकिन बंगाली परंपरा की मौलिकता भी बनाए रखना चाहती हैं, उनके लिए क्रीम अथवा ऑफ-व्हाइट रंग श्रेष्ठ रहता है। इस क्रम में लाल बॉर्डर वाली पारंपरिक बंगाली लाल पाड़ सादा साड़ी को वरीयता दी जा सकती है। अष्टमी की अंजलि तथा दशमी के दिन आयोजित होने वाले सिंदूर खेला के लिए यह परिधान सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है।
शाम के आयोजनों के लिए गहरा मैजेंटा और वाइन
लाल रंग से थोड़ा अलग हटकर गहरा वाइन अथवा मैजेंटा रंग एक बोल्ड और जीवंत आभा प्रस्तुत करता है। रात के सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा नवमी की शाम होने वाले धुनुची नाच के समय यह रंग बहुत उपयुक्त बैठता है। यह परिधान उत्सव के उल्लास में ग्लैमर और भव्यता का पुट जोड़ देता है।
षष्ठी और सप्तमी के लिए आधुनिक ग्रे अथवा सिल्वर रंग
षष्ठी और सप्तमी जैसे शुरुआती उत्सव दिवसों पर आधुनिक और पेस्टल अंदाज अपनाने के लिए सिल्वर या ग्रे रंग का चयन किया जा सकता है। जरी के काम या मंद चमक वाली ग्रे शिफॉन अथवा सिल्क साड़ी के साथ न्यूड लिपस्टिक और स्मोकी आइज मेकअप बहुत ही संयत और समकालीन रूप तैयार करता है।
शुरुआती दिनों के लिए चमकीला नारंगी विकल्प
नारंगी रंग पर्व की ऊर्जा और आभा को सहजता से अभिव्यक्त करता है। पंचमी और षष्ठी के दिनों में हल्की और सहज पोशाक के तौर पर ऑरेंज हैंडलूम, टिशू सिल्क या चंदेरी साड़ी का चयन किया जा सकता है। यह हल्का परिधान दिनभर की भागदौड़ में भी अत्यंत आरामदायक और सुंदर बना रहता है।
इस दुर्गा पूजा में अपनी पसंद को केवल एक ही रंग तक सीमित रखने के स्थान पर इन विविध रंगों को अपनाएं। इनके साथ सोने के आभूषण, कटवर्क सिल्वर गहने अथवा थ्रेड ज्वेलरी का सही मेल बैठाकर उत्सव का आनंद दोगुना किया जा सकता है।



















