धान की खेती में बालियां फूटने की अवस्था बेहद संवेदनशील मानी जाती है, क्योंकि इसी नाजुक दौर में कीटों के प्रकोप की आशंका सबसे अधिक बढ़ जाती है। फसल के कोमल तनों और हरी बालियों पर टिड्डों का हमला पौधों को कमजोर कर भारी क्षति पहुंचा सकता है। यदि खेत में इन कीटों की संख्या अचानक तेजी से बढ़ने लगे, तो समय रहते सतर्क निगरानी और ठोस प्रबंधन करना अनिवार्य हो जाता है। किसी भी देसी फार्मूले को पूरे खेत में लागू करने से पहले यह आवश्यक है कि उसे एक सीमित छोटे रकबे पर आजमाकर देखा जाए और नजदीकी कृषि विशेषज्ञ से राय ली जाए।
खेत की निरंतर देखरेख और टिड्डों की समय पर पहचान
कीटों की रोकथाम के लिए सबसे पहला व्यावहारिक कदम खेत का लगातार मुआयना करना है। टिड्डों की सक्रियता आमतौर पर सुबह की हल्की धूप या ढलती शाम के वक्त सबसे साफ नजर आती है। यदि मुआयने के दौरान पौधों की पत्तियां कटी-फटी दिखाई दें या तने के किसी हिस्से को नुकसान पहुंचा मिले, तो खेत में निगरानी तुरंत तेज कर देनी चाहिए। इसके अतिरिक्त केवल मुख्य पौधों को ही नहीं, बल्कि खेत की मेड़ों के इर्द-गिर्द उगने वाली जंगली घास और दूसरी वनस्पतियों की भी नियमित जांच जरूरी है, जहां ये कीट छिपते हैं।
नीम आधारित जैविक कीटनाशकों का संतुलित छिड़काव
फसल को कीटों से बचाने के लिए नीम पर आधारित जैव कीटनाशकों का प्रयोग एक सुरक्षित और कारगर जरिया साबित हो सकता है। नीम की निंबोली या बीजों से बने उत्पादों अथवा बाजार में पंजीकृत नीम फार्मूलेशन का इस्तेमाल हमेशा डिब्बे के लेबल पर लिखे दिशा-निर्देशों के मुताबिक ही करना चाहिए। अलग-अलग उत्पादों की सांद्रता और फार्मूलेशन भिन्न होते हैं, जिसके कारण उनकी आवश्यक खुराक भी अलग हो सकती है। बिना तकनीकी जानकारी के अधिक मात्रा में किसी भी जैव रसायन का छिड़काव फसल को नुकसान पहुंचा सकता है।
घरेलू अर्क की सीमाएं और मेड़ों की सफाई का महत्व
कई किसान घर पर ही नीम की पत्तियों को पानी में भिगोकर और अच्छी तरह मसलकर घोल तैयार करते हैं। यह घरेलू तरीका छोटे स्तर पर काम कर सकता है, लेकिन घर में बने अर्क में पंजीकृत व्यावसायिक कीटनाशकों जैसी तय मानक क्षमता नहीं होती। लिहाजा बड़े पैमाने पर फैली खेती में सिर्फ घरेलू नुस्खों के भरोसे बैठना जोखिम भरा हो सकता है। इसके साथ ही कीटों पर पूरी तरह काबू पाने के लिए केवल खड़ी फसल पर नजर रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि खेत की मेड़ों, किनारों और आसपास उगी खरपतवार व घास को नियमित उखाड़ना चाहिए। यदि खेत में कहीं टिड्डों का बड़ा झुंड या उनके अंडों के गुच्छे दिखें, तो फौरन स्थानीय कृषि विभाग अथवा कृषि वैज्ञानिक से संपर्क साधें।
रासायनिक विकल्पों के प्रयोग में बरती जाने वाली सावधानियां
जब टिड्डों का हमला बेकाबू हो जाए और फसल लगातार नष्ट हो रही हो, तब भी किसानों को अपनी मर्जी से किसी तीखे रासायनिक कीटनाशक के छिड़काव से बचना चाहिए। हमेशा स्थानीय कृषि विभाग या प्रमाणित कृषि वैज्ञानिकों द्वारा अनुशंसित कीटनाशकों का ही चयन करें। दवा का छिड़काव करते वक्त मास्क, दस्ताने जैसे उचित सुरक्षा उपकरण पहनना बेहद जरूरी है। इसके अलावा दवा छिड़कने और फसल की कटाई के बीच निर्धारित प्रतीक्षा अवधि का कड़ाई से पालन करना चाहिए ताकि अनाज में जहरीले अंश न रहें।



















