किचन में रोजमर्रा का भोजन तैयार करते समय कटिंग बोर्ड का प्रयोग सबसे सामान्य प्रक्रियाओं में से एक है। हरी तरकारियों, फलों तथा पनीर से लेकर कच्चे चिकन अथवा मांस के टुकड़ों को इसी धरातल पर काटा और छांटा जाता है। चाकू के बार-बार चलने से इस फलक पर अनगिनत खरोंचें, महीन लकीरें और गहरी दरारें उभर आती हैं। जब इन सूक्ष्मतम छिद्रों में भोजन के बारीक अंश अटक जाते हैं और वहां नमी बरकरार रहती है, तब वह स्थान हानिकारक जीवाणुओं के पनपने का सुरक्षित केंद्र बन जाता है। ऐसी स्थिति में केवल एक गीले अथवा सूखे कपड़े से पोंछकर काम चला लेना स्वच्छता के मानकों पर बिल्कुल खरा नहीं उतरता।
दरारों में जमा गंदगी और स्वास्थ्य जोखिम
गाजियाबाद स्थित यशोदा अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन डॉक्टर भवजीत के अनुसार, कटिंग बोर्ड की सतह पर चाकू से बने कट और दरारों के भीतर जब खाद्य पदार्थों के अंश लंबे समय तक फंसे रह जाते हैं, तो वहां सूक्ष्म रोगाणु तेजी से अपनी संख्या बढ़ाने लगते हैं। जब बाद में उसी सतह पर दूसरा आहार तैयार किया जाता है, तब ये रोगाणु भोजन के माध्यम से मानव शरीर के भीतर प्रवेश कर जाते हैं। यह स्थिति पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियों तथा संक्रमण को जन्म दे सकती है, जिसके कारण बोर्ड की नियमित व गहन सफाई पर विशेष सतर्कता बरतना अनिवार्य है।
क्रॉस-कंटेमिनेशन की रोकथाम और अलग फलक का नियम
सब्जियों और कच्चे मांसाहारी अवयवों के लिए एक ही बोर्ड काम में लेने की आदत स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह साबित होती है। बहुधा घरों में देखा जाता है कि कच्चे चिकन अथवा मटन के टुकड़े करने के तुरंत बाद उसी तल पर सलाद अथवा सब्जियां काट दी जाती हैं। इससे कच्चे मांस में मौजूद घातक रोगाणु सीधे ताजी सब्जियों पर स्थानांतरित हो जाते हैं, जिसे स्वास्थ्य विज्ञान में क्रॉस-कंटेमिनेशन के रूप में चिन्हित किया जाता है। इस खतरे को पूरी तरह समाप्त करने के लिए शाकाहारी खाद्य सामग्री और कच्चे मांस के लिए हमेशा दो पृथक कटिंग बोर्ड निर्धारित किए जाने चाहिए।
धोने की सही तकनीक और हवादार स्थान पर सुखाना
प्रत्येक बार सामग्री काटने के पश्चात चॉपिंग बोर्ड को हल्के गर्म पानी और साबुन के झाग से रगड़कर साफ किया जाना चाहिए। समतल हिस्से के साथ-साथ उन सभी खरोंचों और गड्ढों को ब्रश अथवा स्पंज की सहायता से घिसना आवश्यक है जहां खाद्य कण फंसे हो सकते हैं। स्वच्छ बहते जल से धोने के उपरांत बोर्ड को तुरंत किसी बंद दराज अथवा अलमारी में रखने की भूल नहीं करनी चाहिए। इसे ऐसी खुली और हवादार जगह पर सुखाया जाए जहां हवा का प्रवाह निरंतर बना रहे, ताकि सतह पर मौजूद नमी पूरी तरह समाप्त हो जाए।
घिसे हुए बोर्ड को बदलना और स्पंज की सतर्कता
लगातार काम में आने से यदि लकड़ी अथवा प्लास्टिक के बोर्ड पर अत्यधिक गड्ढे बन जाएं, दरारें गहरी हो जाएं या प्लास्टिक की परत उधड़ने लगे, तो उसे उपयोग से हटाकर नया बोर्ड ले आना ही बुद्धिमानी है। अत्यधिक क्षतिग्रस्त सतहों के अंदरूनी भागों को सामान्य धुलाई से जीवाणुरहित करना असंभव हो जाता है। इसके अतिरिक्त, धोने में प्रयुक्त स्पंज की स्वच्छता पर भी कड़ी नजर रहनी चाहिए। अस्वच्छ स्पंज बोर्ड पर सफाई के बजाय उल्टे रोगाणुओं की परत चढ़ा देता है, इसलिए स्पंज को स्वच्छ रखना और समय पर बदलना भी उतना ही जरूरी है। कच्चे मांस के संपर्क में आए बर्तनों अथवा बोर्ड को धोने के उपरांत स्वयं अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए। यह सावधानी बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को भोजन जनित संक्रमण से सुरक्षित रखने में बेहद अहम है।



















