ताजी सब्जियों का स्वाद और उनके पोषक तत्व बाजार में मिलने वाली पुरानी सब्जियों से कहीं अधिक होते हैं। भारतीय खानपान में लोकप्रिय भिंडी को उगाने के लिए किसी बड़े खेत या बड़े बगीचे की जरूरत नहीं होती। अगर आपके पास थोड़ी सी जगह या बालकनी उपलब्ध है, तो आप गमलों में आसानी से इसकी भरपूर खेती कर सकते हैं। कम देखभाल और सही तकनीक के साथ आप अपने घर की छत पर ही जैविक और स्वादिष्ट भिंडी की अच्छी पैदावार हासिल कर सकते हैं।
सही आकार के गमले का चुनाव
भिंडी के पौधे की जड़ें जमीन में गहराई तक फैलती हैं, इसलिए गमले का आकार सही होना बेहद आवश्यक है। इसके लिए कम से कम 12 से 15 इंच गहरा बर्तन या गमला चुनना चाहिए। गमले के निचले हिस्से में जल निकासी के छिद्र होना अनिवार्य है। यह अतिरिक्त पानी को आसानी से बाहर निकालता है, जिससे जड़ों में सड़न नहीं होती और पौधा स्वस्थ बना रहता है।
पौधों के लिए पौष्टिक मिट्टी का मिश्रण
भिंडी उगाने के लिए हल्की, भुरभुरी और उपजाऊ मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। आदर्श मिट्टी तैयार करने के लिए आप 50 प्रतिशत सामान्य बगीचे की मिट्टी, 30 प्रतिशत गोबर की खाद या कम्पोस्ट और 20 प्रतिशत रेत या कोकोपीट को अच्छी तरह मिला सकते हैं। यह मिश्रण गमले में पानी को ठहरने नहीं देता और जड़ों को सभी आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है।
बीज बोने की विधि और अंकुरण
भिंडी के बीज सीधे गमले की मिट्टी में रोपे जाते हैं। बीजों को लगभग 1 से 2 सेंटीमीटर की गहराई में दबाएं। यदि आप किसी बड़े गमले या ग्रो बैग में एक से अधिक बीज लगा रहे हैं, तो दो बीजों के बीच 8 से 10 इंच का अंतर रखना जरूरी है। बुवाई के बाद गमले में हल्का पानी छिड़कें। सामान्य स्थितियों में लगभग 5 से 10 दिनों के भीतर बीजों से छोटे अंकुर बाहर आने लगते हैं।
धूप और सिंचाई का सही नियम
भिंडी गर्म मौसम की फसल है, जिसे पनपने के लिए सीधी और तेज धूप की जरूरत होती है। गमले को ऐसी जगह पर रखें जहाँ रोजाना कम से कम 6 से 8 घंटे की सीधी धूप आती हो। पर्याप्त धूप मिलने से पौधे का विकास तेजी से होता है और उसमें अधिक फूल और फल बनते हैं। सिंचाई करते समय ध्यान रखें कि मिट्टी में नमी बनी रहे, लेकिन जलभराव न हो। जब गमले की ऊपरी मिट्टी सूखी नजर आए तभी पानी दें। बारिश के दिनों में गमले में जमा पानी तुरंत निकाल दें।
खाद और कीट नियंत्रण
पौधे के बेहतर विकास के लिए हर 15 से 20 दिन में जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट या सड़ी हुई गोबर की खाद देना लाभदायक रहता है। इससे पौधे को लगातार पोषण मिलता रहता है। यदि पौधे की पत्तियों पर कीड़े या रोग के लक्षण दिखाई दें, तो प्राकृतिक रोकथाम के लिए नीम के तेल का छिड़काव किया जा सकता है।
फसल की कटाई का सही समय
बीज बोने के लगभग 45 से 60 दिनों के बाद भिंडी तोड़ने के लिए तैयार हो जाती है। जब फल की लंबाई 3 से 5 इंच हो जाए, तब उसे पौधे से काट लें। यदि भिंडी को बहुत अधिक बड़ा होने दिया जाए, तो वह सख्त हो जाती है और उसका स्वाद तथा कोमलता खत्म हो जाती है।



















