अक्सर लोग पैकेट या बर्तन में रखे दही के ऊपर हल्का पीला या सफेद पानी जमा हुआ देखकर यह मान लेते हैं कि दही खराब हो चुका है और वे पूरे दही को बेकार समझकर फेंक देते हैं। लेकिन हर परिस्थिति में ऐसा सोचना बिल्कुल सही नहीं है, क्योंकि यह सतह पर दिखने वाला तरल असल में दही की निर्माण प्रक्रिया का ही एक स्वाभाविक हिस्सा होता है। विज्ञान की भाषा में इस तरल को मट्ठा या व्हे कहा जाता है, जो दूध के जमने के दौरान प्राकृतिक रूप से अलग हो जाता है। इसका प्रकट होना इस बात का प्रमाण नहीं है कि दही खाने लायक नहीं बचा है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि दही अपनी रासायनिक प्रक्रिया से पूरी तरह गुजर चुका है।
दूध से अलग होने की वैज्ञानिक प्रक्रिया
जब दूध से दही का निर्माण होता है, तब उसमें मौजूद प्रोटीन के कण आपस में जुड़कर एक ठोस और गाढ़ी संरचना का रूप ले लेते हैं। इस जमने की प्रक्रिया के दौरान दूध के अंदर का कुछ पानी और अन्य घुलनशील घटक अपनी जगह छोड़ देते हैं और किनारों या सतह पर एकत्र हो जाते हैं। विशेष तौर पर जब दही को कुछ घंटों तक बिना हिलाए-डुलाए एक ही स्थान पर रख दिया जाता है, तब यह अलग हुआ पानी बहुत साफ और स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगता है। इसलिए केवल पानी की इस मौजूदगी को देखकर ही दही के खराब होने का निष्कर्ष निकालना एक गलतफहमी साबित हो सकता है।
पोषक तत्वों से भरपूर होता है यह तरल
इस प्रकार अलग होने वाले तरल हिस्से में किसी भी तरह की गंदगी या खराबी नहीं होती, बल्कि इसमें कई प्रकार के आवश्यक पोषक तत्व समाहित रहते हैं। इस पानी में पानी की मात्रा के साथ-साथ महत्वपूर्ण प्रोटीन, लैक्टोज और विभिन्न प्रकार के खनिज भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यही कारण है कि इस स्वास्थ्यवर्धक तरल को नाली में बहाने या फेंकने के बजाय वापस दही में ही मिला देना सबसे समझदारी भरा कदम माना जाता है। जब आप चम्मच की सहायता से दही को अच्छी तरह फेंटते हैं या चलाते हैं, तो यह पानी आसानी से दोबारा दही में घुलमिल जाता है और दही की मूल बनावट भी पहले जैसी सामान्य हो जाती है।
फ्रीज में रखने पर क्यों बढ़ता है अलगाव
दही को लंबे समय तक ठंडी जगह यानी फ्रिज के अंदर संग्रहित करने पर भी इसके ऊपर पानी की परत जम जाना एक बेहद सामान्य घटना है। तापमान में होने वाले निरंतर उतार-चढ़ाव और बार-बार डिब्बे को बाहर निकालकर उपयोग करने से भी ठोस हिस्से और तरल हिस्से का यह अलगाव तेजी से होने लगता है। यदि आपके रखे हुए दही की प्राकृतिक खुशबू और उसका मौलिक स्वाद बिल्कुल सामान्य है, तो सिर्फ पानी के अलग हो जाने मात्र से उसे अखाद्य या दूषित घोषित नहीं किया जा सकता है। सही प्रकार से ढक्कन लगाकर दही को फ्रिज में सुरक्षित रखने से इस तरह की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
किन स्थितियों में दही को फेंक देना चाहिए
हालांकि हर तरह का तरल पदार्थ इस बात की गारंटी नहीं देता कि दही पूरी तरह सुरक्षित और खाने योग्य है। अगर दही से किसी भी प्रकार की तेज खट्टी या सड़े हुए भोजन जैसी दुर्गंध आने लगे, उसका प्राकृतिक रंग पूरी तरह बदल जाए, या सतह पर हरे, काले अथवा गुलाबी रंग के फफूंदी के धब्बे दिखाई दें, तो उस दही का सेवन करने से पूरी तरह बचना चाहिए। इसके अतिरिक्त, यदि दही का स्वाद बहुत अधिक असामान्य या कड़वा लगे और उसकी बनावट में अजीब सा बदलाव आ जाए, तो किसी भी प्रकार का जोखिम उठाने के बजाय सावधानी बरतना ही स्वास्थ्य के हित में होता है।
दही के पानी के अन्य उपयोगी विकल्प
दही के ऊपर जमा होने वाले इस पानी का उपयोग आप अपनी रसोई में कई अलग-अलग तरीकों से कर सकते हैं। इसे वापस दही में मिलाने के अलावा, आप इसका इस्तेमाल स्वादिष्ट छाछ या मट्ठा तैयार करने में भी आसानी से कर सकते हैं। यदि आपको लगता है कि दही से कुछ ज्यादा ही मात्रा में पानी अलग हो गया है, तो आप एक चम्मच की मदद से उसे जोरदार तरीके से फेंट लें। ऐसा करने से दही काफी हद तक अपनी एकसार अवस्था में वापस आ जाता है और उसका स्वाद भी बिल्कुल प्रभावित नहीं होता है, जिससे किसी भी प्रकार की बर्बादी से बचा जा सकता है।
रखने और उपयोग करने के सही तौर-तरीके
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि दही को लंबे समय तक सामान्य कमरे के तापमान पर खुला छोड़ना बिल्कुल उचित नहीं माना जाता है। विशेष रूप से गर्मियों के मौसम में तापमान अधिक होने के कारण दही बहुत कम समय में खराब हो सकता है। इसलिए दही के पूरी तरह जम जाने के बाद उसे तुरंत आवश्यकतानुसार फ्रिज के भीतर रख देना चाहिए और निकालते समय हमेशा एक साफ और सूखे चम्मच का ही प्रयोग करना चाहिए। दही के मुख्य डिब्बे के अंदर कोई भी गंदा या पहले से इस्तेमाल किया हुआ चम्मच डालने से हानिकारक बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं, जिससे पूरा दही बहुत जल्दी खराब हो जाता है।
निष्कर्ष और सतर्कता
इसलिए अगली बार जब भी आप दही के ऊपर थोड़ा सा पानी जमा हुआ देखें, तो बिना सोचे-समझे पूरे डिब्बे को कचरे के डिब्बे में फेंकने की आवश्यकता नहीं है। सबसे पहले आपको उसकी महक, उसके रंग और उसके स्वाद की भली-भांति जांच करनी चाहिए। यदि ये सभी चीजें बिल्कुल सामान्य पाई जाती हैं, तो आप ऊपर जमा हुए उस पानी को वापस दही के अंदर मिला सकते हैं, क्योंकि यह केवल एक प्राकृतिक तरल हिस्सा होता है। लेकिन यदि दही के खराब होने के पुख्ता और स्पष्ट संकेत नजर आ रहे हैं, तो थोड़े से दही को बचाने के प्रयास में अपने स्वास्थ्य के साथ कभी भी किसी प्रकार का समझौता न करें।



















