झारखंड के पलामू जिले में प्राचीन आयुर्वेदिक विधियों को पुनर्जीवित करने की एक अनूठी पहल सामने आई है। यहां के आयुर्वेद विशेषज्ञ शिव कुमार पांडेय ने पुरानी सत्सिद्ध तकनीक का उपयोग करके एक खास इत्र गुलाब तेल तैयार किया है। आधुनिक समय में प्राकृतिक तेल बनाने का यह पारंपरिक तरीका लगभग लुप्त हो चुका था, जिसे दोबारा प्रयोग में लाया गया है।
सत्सिद्ध विधि और निर्माण की लंबी प्रक्रिया
इस विशेष गुलाब तेल को प्राचीन सत्सिद्ध पद्धति के सिद्धांतों के अनुसार बनाया गया है। पलामू निवासी शिव कुमार पांडेय लंबे समय से आयुर्वेदिक औषधियों और प्राकृतिक तेलों के निर्माण से जुड़े हुए हैं। उन्होंने नारियल तेल और ताजे गुलाब की पंखुड़ियों के सटीक संयोजन से यह औषधीय तेल तैयार किया है।
बाजार में उपलब्ध सामान्य तेलों की तुलना में इसे तैयार होने में लगभग दो से ढाई महीने का लंबा समय लगता है। इस धीमी और प्राकृतिक प्रक्रिया के दौरान नारियल का तेल गुलाब की पंखुड़ियों से उसकी प्राकृतिक सुगंध, गुण और शीतलता को पूरी तरह सोख लेता है। लंबी समयावधि के कारण तेल की शुद्धता और सौम्यता बनी रहती है।
त्वचा में कसावट और सिरदर्द से राहत
इस आयुर्वेदिक तेल के नियमित प्रयोग से त्वचा और सेहत दोनों को कई फायदे मिलते हैं। चेहरे पर इसकी कुछ बूंदों से हल्की मालिश करने पर त्वचा में कसावट आती है, प्राकृतिक निखार बढ़ता है और झुर्रियों तथा दाग-धब्बों की समस्या धीरे-धीरे कम होने लगती है।
त्वचा की देखभाल के साथ-साथ यह तेल सिर की मालिश के लिए भी बहुत उपयोगी माना गया है। इससे सिर की मालिश करने पर दिनभर की मानसिक थकान और सिरदर्द से राहत मिलती है। यह बालों की सेहत सुधारने और सिर को ठंडक प्रदान करने में भी प्रभावी भूमिका निभाता है।
अरोमा थेरेपी में उपयोग और उत्पाद की कीमत
आयुर्वेद और प्राकृतिक सुगंधों के प्रेमी इसे बेहतरीन अरोमा थेरेपी तेल के रूप में भी देखते हैं। इसकी धीमी और मनमोहक खुशबू दिमाग को सुकून देती है और शरीर में शीतलता का अहसास कराती है। हालांकि, किसी भी गंभीर बीमारी या त्वचा विकार के लिए इसे डॉक्टरी इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
प्राकृतिक सामग्रियों और ढाई महीने की मेहनत से तैयार किए गए इस शुद्ध आयुर्वेदिक तेल की 60 एमएल की बोतल की कीमत 900 रुपये रखी गई है।



















