अधिकांश घरों में जब भी दूध फाड़कर पनीर अथवा छेना तैयार किया जाता है, तो सफेद रंग के बचे हुए तरल को अनुपयोगी मानकर सीधे सिंक की नाली में बहा दिया जाता है। देखने में साधारण सा लगने वाला यह तरल असल में पोषण का एक बेहतरीन खजाना होता है। दूध से ठोस हिस्सा अलग होने के बाद भी इस पानी में प्रोटीन, कैल्शियम, कई जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स की प्रचुर मात्रा घुली रहती है। जब इसे नाली में बहा दिया जाता है, तो अनजाने में जरूरी पोषक तत्व बेकार चले जाते हैं। थोड़ी सी समझदारी से इस पौष्टिक पानी का रसोई, बागवानी और दैनिक जीवन में कई तरह से बहुत कारगर इस्तेमाल किया जा सकता है।
रोटियों को मुलायम और पौष्टिक बनाने का आसान तरीका
दैनिक भोजन में बनने वाली चपाती, पराठे या पूरियों को ज्यादा नरम और स्वादिष्ट बनाने के लिए इस पानी का सहारा लिया जा सकता है। आटा गूंथते समय सामान्य नल के पानी के स्थान पर पनीर के इस बचे हुए पानी का प्रयोग करना चाहिए। जब इस पोषक तत्व युक्त तरल से आटा तैयार किया जाता है, तो रोटियां बेहद मुलायम बनती हैं और सेंकते समय अच्छी तरह फूलती भी हैं। इसके अलावा भोजन की पोषण गुणवत्ता में भी भारी इजाफा होता है, क्योंकि इसमें घुला प्रोटीन और विटामिन्स आटे के साथ मिलकर पूरे परिवार के स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाते हैं।
दाल, रसेदार सब्जियां और चावल का स्वाद बेहतर करें
रसोई में दाल, कढ़ी या किसी भी रसेदार तरी वाली सब्जी की तैयारी के दौरान भी यह पानी बहुत उपयोगी साबित होता है। ग्रेवी में सादा पानी डालने के बजाय इस छाछ रूपी पानी को मिलाने से सब्जी का स्वाद कहीं अधिक गहरा और लजीज हो जाता है। साथ ही ग्रेवी को प्राकृतिक रूप से एक अच्छा गाढ़ापन मिलता है, जिससे अलग से कोई गाढ़ा करने वाला तत्व नहीं मिलाना पड़ता। यदि आप घर पर चावल उबाल रहे हैं, तो साधारण पानी की जगह इस पौष्टिक तरल में चावल पकाए जा सकते हैं। इससे चावल के दाने बिल्कुल खिले-खिले बनते हैं और उनकी पौष्टिकता में भी बढ़ोतरी होती है।
गमलों और बगीचे के पौधों के लिए प्राकृतिक खाद
यदि आपको घर में पौधे लगाने अथवा बागवानी करने की आदत है, तो पनीर का यह पानी आपके पौधों के लिए किसी संजीवनी टॉनिक जैसा प्रभाव दिखाता है। इस तरल में मौजूद नाइट्रोजन और अन्य मिनरल्स मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को बढ़ाने में सहायता करते हैं। इसका प्रयोग करते समय केवल इस बात की सावधानी रखनी चाहिए कि दूध फाड़ते वक्त उसमें नमक या नींबू की मात्रा बहुत ज्यादा न डाली गई हो। इस पानी को पूरी तरह ठंडा कर लेने के बाद ही घर के अंदर रखे पौधों या बाहर बगीचे में लगे पौधों की जड़ों में डालना चाहिए। नियमित रूप से जड़ों में यह पोषक तत्व मिलने से पौधों की पत्तियां हरी-भरी रहती हैं और उनकी वृद्धि भी तेजी से होती है।
सूप और स्मूदी के जरिए प्रोटीन की खुराक बढ़ाएं
स्वास्थ्य और फिटनेस को लेकर सजग रहने वाले लोगों के लिए अपनी दैनिक डाइट में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने का यह एक बेहद किफायती जरिया है। मिक्स वेज सूप बनाते समय बेस लिक्विड या शोरबे के आधार के रूप में सादे पानी की जगह इसे डाला जा सकता है। यदि दूध फाड़ने के तुरंत बाद मिला यह पानी पूरी तरह ताजा है, तो इसे फ्रूट स्मूदी अथवा ताजी छाछ में मिलाकर भी सीधे पिया जा सकता है। यह तरल शरीर में आसानी से घुल जाता है और तुरंत नई ऊर्जा प्रदान करता है।
त्वचा और बालों की प्राकृतिक देखभाल
पनीर का यह बचा हुआ पानी व्यक्तिगत देखभाल में भी बेहतरीन प्राकृतिक परिणाम देता है। यह त्वचा और बालों के लिए एक सौम्य और असरदार नेचुरल टोनर का काम कर सकता है। इस तरल में लैक्टिक एसिड मौजूद होता है, जो चेहरे पर जमी त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाने में मददगार साबित होता है। इसे रुई के फाहे की मदद से चेहरे पर टोनर की तरह लगाया जा सकता है और कुछ देर बाद सादे पानी से धोया जा सकता है। इसी प्रकार जब बाल धोए जाएं, तो अंतिम बार पानी से खंगालते समय इस पोषक पानी से बालों को रिंस किया जा सकता है। इससे बालों में एक प्राकृतिक चमक लौट आती है और बाल मजबूत होते हैं।
ढोकला, इडली और कुलचे में तेजी से उठाएं खमीर
घर में इडली, डोसा, ढोकला अथवा कुलचा बनाते समय बैटर में खमीर उठाने की आवश्यकता होती है। इस बैटर को तैयार करते समय पनीर के बचे हुए पानी को मिलाने से फर्मेंटेशन की प्रक्रिया बेहद तेज हो जाती है। इसमें पाए जाने वाले प्राकृतिक घटक यीस्ट को सक्रिय करने में मदद करते हैं, जिससे बैटर अच्छी तरह फूल जाता है। इसके प्रयोग से बनने वाले व्यंजन न केवल बेहद स्पॉन्जी और जालीदार बनते हैं, बल्कि उनका स्वाद भी कई गुना बढ़ जाता है। अगली बार जब भी घर पर पनीर या छेना तैयार हो, तो इस बहुपयोगी पानी को नाली में बहाने की भूल बिल्कुल न करें।



















