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ई-रिक्शा से 650 किमी नापकर स्पीति वैली पहुंचा मुजफ्फरनगर का सुमित, दोस्तों के तंज को बनाया ताकतजीवनशैली
19 सित॰ 2026, 10:54 pm (39 दिन पहले)· 0

ई-रिक्शा से 650 किमी नापकर स्पीति वैली पहुंचा मुजफ्फरनगर का सुमित, दोस्तों के तंज को बनाया ताकत

गाड़ी न होने पर दोस्तों ने मजाक उड़ाया तो मुजफ्फरनगर के सुमित कुमार ने अपने आमदनी के साधन ई-रिक्शा से ही करीब 650 किलोमीटर लंबा सफर 3 दिन में तय कर स्पीति वैली पहुंचकर दिखाया।

पहाड़ों की दुर्गम राहों पर अक्सर मजबूत गाड़ियों के भी पहिए थम जाते हैं, लेकिन अगर हौसला अटूट हो तो साधारण साधन भी ऐतिहासिक सफर तय कर लेते हैं। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर निवासी सुमित कुमार के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। सुमित का सपना स्पीति वैली के मनमोहक नजारों और वादियों को देखने का था। जब उन्होंने अपने साथियों के सामने इस खूबसूरत घाटी में घूमने का प्रस्ताव रखा, तो साथियों ने यह कहकर बात टाल दी और मजाक उड़ाया कि वहां जाने के लिए उनके पास कोई कार नहीं है। दोस्तों का यह कटाक्ष सुमित के दिल में उतर गया। उन्होंने इस निराशा को कमजोरी बनाने के बजाय एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया और उसी वाहन से निकलने की ठान ली जो उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का आधार था।

चुनौतियों से भरी स्पीति घाटी की राह

स्पीति वैली का नाम जेहन में आते ही खतरनाक मोड़, संकरी और पथरीली सड़कें, दूर-दराज का सन्नाटा और कठिन चढ़ाई की तस्वीर उभरती है। इस इलाके में आधुनिक और बड़ी-बड़ी गाड़ियों का चलना भी खासा जोखिम भरा माना जाता है। पहाड़ी रास्तों पर वाहनों में खराबी आना आम बात है, जबकि पूरी स्पीति घाटी में गिने-चुने मैकेनिक ही उपलब्ध होते हैं। ऐसे हालात में अगर कोई गाड़ी बीच रास्ते में बंद पड़ जाए, तो मैकेनिक का मिलना और उसकी मदद हासिल करना एक बड़ी परीक्षा साबित होता है। इन तमाम जमीनी जोखिमों और चेतावनी भरी परिस्थितियों की जानकारी होने के बावजूद सुमित के कदम नहीं डगमगाए।

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रोजी-रोटी के वाहन को बनाया सफर का साथी

सुमित कुमार कोई संपन्न उद्योगपति या किसी लग्जरी वाहन के मालिक नहीं हैं। वे एक साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं और ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। जिस वाहन के जरिए वे दिन-रात मेहनत कर घर का खर्च चलाते हैं, उसी तिपहिया ई-रिक्शा को उन्होंने अपने दुर्गम सफर की सवारी में तब्दील कर दिया। किसी महंगी गाड़ी की व्यवस्था करने या दूसरों के सहारे बैठने के बजाय उन्होंने अपने ही ई-रिक्शा की चाबी घुमाई और 650 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करने निकल पड़े।

तीन दिन की कठिन यात्रा और सपना साकार

मुजफ्फरनगर से स्पीति घाटी तक का यह लंबा रास्ता करीब 650 किलोमीटर का था। सुमित ने लगातार तीन दिनों तक धैर्य और लगन के साथ ई-रिक्शा चलाया और आखिरकार स्पीति वैली पहुंचकर अपने सपने को हकीकत में बदल दिया। उन्होंने दोस्तों के साथ अपनी यात्रा की चाहत को पूरा कर दिखाया। यह कारनामा सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने भर का नहीं है, बल्कि यह बताता है कि साधनों का अभाव कभी भी इंसान के मजबूत इरादों और संकल्प के आड़े नहीं आ सकता। जिस गाड़ी को लोग केवल शहर की गलियों में रोजी कमाने का जरिया मानते हैं, उसी ने सुमित को हिमालय की वादियों तक पहुंचा दिया।

सवाल-जवाब

सुमित कुमार कहां के रहने वाले हैं और वे क्या काम करते हैं?
सुमित कुमार उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के निवासी हैं और वे ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार की आजीविका चलाते हैं।
सुमित ने ई-रिक्शा से स्पीति जाने का फैसला क्यों किया?
जब दोस्तों ने उनके पास कार न होने का मजाक उड़ाया, तो उन्होंने इस तंज को चुनौती मानकर अपने ई-रिक्शा से ही स्पीति जाने का फैसला किया।
मुजफ्फरनगर से स्पीति घाटी की दूरी कितनी है और इसे तय करने में कितना समय लगा?
यह दूरी करीब 650 किलोमीटर की थी, जिसे सुमित ने अपने ई-रिक्शा से लगभग तीन दिनों में पूरा किया।
स्पीति घाटी का मार्ग वाहनों के लिए कठिन क्यों माना जाता है?
स्पीति घाटी में सड़कें संकरी और बेहद खतरनाक हैं, जहां अक्सर बड़ी गाड़ियां भी खराब हो जाती हैं और पूरे क्षेत्र में मैकेनिक बेहद कम मिलते हैं।
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