घरों में 24 घंटे लगातार बिजली की उपलब्धता बनाए रखने के लिए इन्वर्टर आज एक बेहद जरूरी साधन बन चुका है। जिन इलाकों में बिजली कटौती की समस्या रहती है, वहां इन्वर्टर से राहत मिलती है। इन्वर्टर सिस्टम को कार्यशील रहने के लिए चार्जिंग की आवश्यकता होती है और यह बिजली को अपनी बैटरी के जरिए स्टोर करता है। बैटरी के भीतर ऊर्जा को सुरक्षित रखने के लिए इलेक्ट्रोलाइट मौजूद होता है, जो मुख्य रूप से सल्फ्यूरिक एसिड और डिस्टिल्ड वाटर का एक विशेष रासायनिक मिश्रण है।
बैटरी में पानी कम होने की प्रक्रिया और उसका प्रभाव
जब इन्वर्टर बैटरी लगातार चार्ज और डिस्चार्ज के चक्र से गुजरती है, तब रासायनिक क्रियाओं के चलते उसका पानी धीरे-धीरे हाइड्रोलाइज होकर भाप के रूप में उड़ने लगता है। पानी का स्तर घटने से बैटरी के अंदर मौजूद लेड प्लेट्स खुली रह जाती हैं और उनके खराब होने का गंभीर खतरा पैदा हो जाता है। इसी कारण बैटरी में तरल का सही स्तर बनाए रखना अनिवार्य होता है। नियमित अंतराल पर उपयुक्त पानी भरते रहने से बैटरी की चार्जिंग क्षमता स्थिर रहती है, बैकअप समय बढ़ता है और बैटरी कई वर्षों तक सुचारू रूप से चलती रहती है।
सामान्य नल या आरओ का पानी डालने से होने वाले नुकसान
इन्वर्टर बैटरी के रखरखाव में केवल डिस्टिल्ड वाटर का ही प्रयोग किया जाना चाहिए। कई लोग अनजाने में नल का सामान्य पानी, फिल्टर या आरओ का पानी बैटरी में डाल देते हैं, जो बेहद नुकसानदेह साबित होता है। साधारण पानी में आयरन और कैल्शियम जैसे कई प्रकार के मिनरल्स पाए जाते हैं। जब यह पानी बैटरी में डाला जाता है, तो ये मिनरल्स रासायनिक प्रक्रिया के दौरान लेड प्लेट्स की सतह पर जमने लगते हैं, जिससे प्लेट्स की कार्यप्रणाली बाधित होती है और बैटरी समय से पहले खराब हो जाती है।
घर पर डिस्टिल्ड वाटर तैयार करने का आसान तरीका
यदि बाजार से डिस्टिल्ड वाटर उपलब्ध न हो, तो इसे घरेलू बर्तनों की मदद से आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसके लिए एक बड़ा भगोना, कांच या स्टील का एक छोटा कटोरा, एक ढक्कन और बर्फ के कुछ टुकड़ों की जरूरत होती है।
- सबसे पहले बड़े भगोने में सामान्य पानी भरें और उसके बीच में कांच या स्टील का कटोरा तैरा दें, ध्यान रखें कि यह कटोरा पानी में डूबे नहीं।
- भगोने को उल्टे ढक्कन से ढक दें और गैस चूल्हा चालू कर दें।
- ढक्कन के ऊपर बर्फ के टुकड़े रख दें, जिससे अंदर बनने वाली भाप ढक्कन से टकराकर ठंडी होगी और बूंदों के रूप में कटोरे में एकत्र होती जाएगी।
- कटोरे में जमा हुआ यह शुद्ध पानी ही डिस्टिल्ड वाटर है, जिसे पूरी तरह ठंडा होने के बाद बैटरी में डाला जा सकता है।
फ्लोटिंग कैप से पानी का स्तर जांचने का नियम
बैटरी में पानी की स्थिति का पता लगाने के लिए फ्लोटिंग कैप की जांच करनी चाहिए। बैटरी के कैप में प्लास्टिक की एक फ्लोटिंग स्टिक लगी होती है, जो जलस्तर के आधार पर ऊपर-नीचे तैरती है। यदि यह स्टिक ऊपर की तरफ दिखाई दे रही है, तो इसका अर्थ है कि बैटरी में पानी का स्तर पर्याप्त है और फिलहाल पानी डालने की आवश्यकता नहीं है। इसके विपरीत, यदि स्टिक नीचे धंसी हुई दिखे, तो यह संकेत है कि पानी खत्म हो चुका है और उसे तुरंत भरने की जरूरत है। सामान्य तौर पर प्रत्येक 2 से 3 महीने की अवधि में बैटरी के पानी की जांच और जरूरत पड़ने पर उसे बदलना चाहिए।



















