सर्दियों के सुहावने मौसम में घर पर हरी सब्जियां उगाने का शौक रखने वालों के लिए कई बेहतरीन विकल्प मौजूद होते हैं। ठंड के इन महीनों में फूलगोभी, मेथी और पालक के साथ हरी मटर उगाना बेहद आसान माना जाता है। ताजी मटर पैदा करने के लिए किसी बड़े खेत या फैले हुए बगीचे की कतई जरूरत नहीं पड़ती। अगर आपके पास केवल एक छोटी सी बालकनी या छत पर थोड़ी खुली जगह है, तो वहां भी गमला रखकर इस स्वादिष्ट सब्जी को उगाया जा सकता है।
मटर की बेल काफी तेजी से बढ़ती है और समय आने पर इसकी फलियों में मीठे, रसीले दाने तैयार होते हैं। इन दानों का इस्तेमाल रसोई में मटर पनीर, सुगंधित पुलाव, कुरकुरे पराठे और रोजमर्रा की कई तरकारियां पकाने में किया जा सकता है। सीधे पौधे से ताजा मटर तोड़कर पकाने का स्वाद ही अलग होता है। घर पर इस फसल को तैयार करने के लिए क्षेत्रवार सही मौसम, सही गमले का चुनाव और देखभाल की बुनियादी बातों को समझना जरूरी है।
क्षेत्र के अनुसार बुवाई का सही समय
मटर मूल रूप से ठंडे वातावरण में पनपने वाली फसल है, इसलिए अलग-अलग हिस्सों में इसकी बुवाई का समय थोड़ा भिन्न होता है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में अक्टूबर से लेकर फरवरी के महीने तक मटर के बीज बोए जा सकते हैं। दूसरी ओर, दक्षिण और पश्चिम भारत के राज्यों में बुवाई का सबसे अनुकूल समय नवंबर से जनवरी के बीच माना जाता है। पूर्वी भारत के क्षेत्रों में गार्डनिंग करने वाले लोग अक्टूबर से जनवरी तक इसके बीज मिट्टी में लगा सकते हैं। मौसम की ठंडक के अलावा स्थानीय तापमान और मटर की चुनी गई किस्म पर भी अंकुरण का समय निर्भर करता है।
गमला और मिट्टी की आवश्यक तैयारी
गमले में मटर उगाने के लिए कुछ बुनियादी सामान जुटाना आवश्यक होता है। सबसे पहले 25 से 30 सेंटीमीटर गहरा और 30 से 40 सेंटीमीटर चौड़ा एक मजबूत गमला चुनें, जिसके तलवे में अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए छेद बने हों। मिट्टी तैयार करने के लिए बगीचे की सामान्य मिट्टी, कोकोपीट और वर्मीकम्पोस्ट या अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद को मिलाकर एक हल्का व भुरभुरा मिश्रण तैयार करें। इसके अलावा मटर की बढ़ती लताओं को सहारा देने के लिए लकड़ी की छड़ियों और मजबूत रस्सी की व्यवस्था पहले से कर लें।
बीज बोने का सही तरीका
बुवाई शुरू करने से ठीक पहले मटर के दानों को रातभर साफ पानी में भिगोकर छोड़ देना चाहिए। पानी में भीगने से बीजों की बाहरी सख्त परत नरम पड़ जाती है, जिससे अंकुरण की प्रक्रिया काफी तेज और आसान हो जाती है। इसके बाद गमले में मिट्टी, कोकोपीट और खाद का तैयार हल्का मिश्रण भरें और ध्यान दें कि जल निकासी का रास्ता खुला रहे।
एक गमले में लगभग 6 से 8 बीज बोए जाने चाहिए। बीजों को एक दूसरे से करीब 8 से 10 सेंटीमीटर की दूरी पर रखें और मिट्टी में लगभग 2.5 से 3 सेंटीमीटर की गहराई में दबा दें। बुवाई पूरी करने के तुरंत बाद गमले में हल्का पानी छिड़कें ताकि मिट्टी में नमी पहुंच जाए।
धूप, सिंचाई और लताओं की देखभाल
मटर का पौधा एक कोमल बेल की तरह ऊपर चढ़ता है, इसलिए शुरुआती दिनों में ही लकड़ी की छड़ियों और रस्सी की मदद से एक मजबूत ढांचा तैयार करके लताओं को सहारा दें। इस गमले को घर के ऐसे कोने में रखें जहां दिनभर में कम से कम 6 से 8 घंटे की सीधी धूप मिलती रहे।
मिट्टी के भीतर हल्की नमी बनाए रखना जरूरी है, लेकिन गमले में जरूरत से ज्यादा पानी भरने से बचना चाहिए ताकि जड़ें न गलें। पौधे के रोपण के लगभग दो सप्ताह बाद मिट्टी की ऊपरी सतह पर थोड़ी अतिरिक्त वर्मीकम्पोस्ट खाद मिलाई जा सकती है। पौधों को हानिकारक कीटों के आक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए नीम के तेल का छिड़काव उस पर छपे निर्देशों के अनुसार नियमित रूप से करना चाहिए।
तुड़ाई और लंबे समय तक सुरक्षित रखने के उपाय
बीज लगाने के लगभग 60 से 70 दिन बीत जाने के बाद मटर की हरी फलियां पूरी तरह परिपक्व हो जाती हैं। जब फलियां चटक हरी, गोल-मटोल और दानों से भरी हुई दिखाई दें, तब उन्हें आहिस्ते से डंठल से अलग कर लेना चाहिए। फलियों को तोड़ते समय बेल को जोर से खींचने से बचें, क्योंकि झटका लगने से कोमल शाखाएं टूट सकती हैं।
तोड़ी गई मटर की फलियों को बिना धोए किसी एयरटाइट डिब्बे या जिप पाउच में बंद करके सीधे फ्रिज में रखा जा सकता है। छिलके समेत रखी गई मटर लगभग एक हफ्ते तक बिल्कुल ताजा बनी रहती है। अगर आप इसे आने वाले हफ्तों या महीनों में इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो फलियों से दाने बाहर निकालकर फ्रीजर में स्टोर कर सकते हैं।



















