सावन के पवित्र महीने में जयपुर शहर के बाजारों और शॉपिंग स्थलों पर उत्सव का माहौल बना हुआ है। महिलाओं की ओर से पारंपरिक वस्त्रों, साड़ियों और श्रृंगार के सामान की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए शहर में विशेष प्रदर्शनियों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में जयपुर के मशहूर जवाहर कला केंद्र परिसर में उमंग आर्ट एंड क्राफ्ट सिल्क एक्सपो की शुरुआत हुई है। इस भव्य एक्सपो में भारत के 15 अलग-अलग राज्यों से आए कुशल बुनकर और हस्तशिल्प कारीगर अपने बेहतरीन उत्पादों के साथ भाग ले रहे हैं। इस आयोजन का मुख्य आकर्षण यह है कि महिलाओं को एक ही स्थान पर देश भर के प्रसिद्ध और प्रामाणिक हथकरघा उत्पाद बेहद सस्ती कीमतों पर खरीदने का मौका मिल रहा है।
15 राज्यों की समृद्ध हस्तकला और वस्त्र परंपरा का संगम
बदलते दौर और आधुनिक मशीनी उत्पादन के बीच कई पारंपरिक हस्तशिल्प कलाएं अपनी विशिष्ट पहचान खोने की चुनौती से जूझ रही हैं। ऐसे समय में उमंग सिल्क एक्सपो पारंपरिक भारतीय कारीगरी को बढ़ावा देने और उसे जीवंत रखने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। इस मेले में देश के विभिन्न कोनों से आए दस्तकार अपनी कलाकृतियों और पारंपरिक पहनावे का प्रदर्शन कर रहे हैं। एक्सपो में मुख्य रूप से असम का मशहूर प्राकृतिक मल्बरी सिल्क और टसर सिल्क, उत्तर प्रदेश की विश्व प्रसिद्ध बनारसी हैंडलूम साड़ियां, बिहार की सुप्रसिद्ध मधुबनी चित्रकला से सजे उत्पाद, दक्षिण भारत का शाही कांजीवरम सिल्क और राजस्थान का स्थानीय पसंदीदा जयपुर का लहरिया प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। सावन के मौसम में इन पारंपरिक साड़ियों और पहनावों की महिलाओं के बीच विशेष मांग देखी जा रही है।
कश्मीरी कढ़ाई से लेकर दक्षिण के रेशम तक स्टॉल्स की भरमार
जवाहर कला केंद्र में सजे इस मेले में उत्तर से लेकर दक्षिण तक और पूर्व से लेकर पश्चिम तक की समृद्ध वस्त्र विविधता देखने को मिल रही है। एक्सपो में लगी अधिकांश स्टॉल्स महिलाओं के पहनावे और श्रृंगार सामग्री पर केंद्रित हैं। यहां कश्मीर से कन्याकुमारी तक तैयार होने वाली कीमती और प्रामाणिक साड़ियां, सलवार सूट और क्षेत्रीय परिधान उपलब्ध कराए गए हैं। मेले में लगे प्रमुख आकर्षणों में मदुरई और कांजीवरम सिल्क साड़ियां, पंजाब के प्रसिद्ध पारंपरिक सूट, बैंगलोर का नामी सिल्क, कोसा गडवाल साड़ियां, गुजरात की प्रसिद्ध बंधनी, आंध्र प्रदेश की कलमकारी कला, गुजरात का पाटन पटोला, उत्तर प्रदेश के लखनवी चिकनकारी वर्क सूट, पंजाब का मशहूर फुलकारी वर्क, कोलकाता बुटीक की साड़ियां और बिहार के भागलपुर की सिल्क साड़ियां तथा ड्रेसेस शामिल हैं।
बिना GST शुल्क के सीधी खरीदारी और विशेष डिस्काउंट का लाभ
उमंग सिल्क एक्सपो की एक सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां आने वाले खरीदार कारीगरों और बुनकरों से सीधे उत्पाद खरीद सकते हैं। इस कारण ग्राहकों को किसी भी तरह का GST शुल्क नहीं चुकाना पड़ता, जिससे सभी सामान बाजार दर से काफी कम कीमत पर उपलब्ध हो रहे हैं। गुणवत्ता में अव्वल होने के साथ-साथ यह उत्पाद दिखने में बेहद आकर्षक हैं। मेले में भाग ले रहे कई स्टॉल संचालकों की ओर से खरीदारों को विशेष डिस्काउंट भी दिया जा रहा है। इसी वजह से किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण सामान खरीदने के लिए एक्सपो में खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ रही है। अब तक इस एक्सपो में लाखों रुपये के उत्पादों की बिक्री हो चुकी है और प्रतिदिन खरीदारी के लिए लोगों का आना जारी है।
वस्त्रों के साथ हस्तशिल्प, घरेलू सामान और जायके का तड़का
यह एक्सपो न केवल कपड़ों तक सीमित है, बल्कि महिलाओं के लिए यहां सुंदर और किफायती ज्वैलरी भी उपलब्ध कराई गई है जो सामान्य बाजारों की तुलना में काफी सस्ती और आकर्षक है। इसके अलावा घर को सजाने और दैनिक उपयोग में आने वाले ढेरों उत्पाद भी मेले में प्रदर्शित किए गए हैं। खरीदार यहां खूबसूरत गुलदस्ते, गमले, विभिन्न प्रकार के हैंडीक्राफ्ट आइटम, लकड़ी, मिट्टी और लोहे से बने बर्तन तथा आकर्षक पेंटिंग्स की खरीदारी कर सकते हैं। इसके साथ ही खान-पान के शौकीन लोगों के लिए भी मेले में कई तरह के स्वादिष्ट और चटपटे खाद्य पदार्थ उपलब्ध हैं। लोग यहां शुद्ध आचार, विभिन्न प्रकार की नमकीन, पापड़, गुणवत्तापूर्ण ड्राई फ्रूट्स और असली मसालों की खरीदारी भी काफी कम दामों में कर रहे हैं।
समय, स्थान और आगंतुकों के लिए उपलब्ध सुविधाएं
जयपुर के जवाहर कला केंद्र में चल रहा यह उमंग सिल्क एक्सपो 17 अगस्त तक जारी रहेगा। इस मेले में खरीदारी के लिए समय सुबह 11:00 बजे से लेकर रात 10:00 बजे तक निर्धारित किया गया है। आयोजकों की ओर से मेले में आने वाले सभी आगंतुकों के लिए प्रवेश बिल्कुल नि:शुल्क रखा गया है। इसके अलावा परिसर में आने वाले खरीदारों और दर्शकों की सुविधा के लिए सभी प्रकार के वाहनों की पार्किंग की समुचित व्यवस्था की गई है, साथ ही अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। सावन के इस खरीदारी उत्सव का लाभ उठाने के लिए शहर के हर हिस्से से लोग लगातार जवाहर कला केंद्र पहुंच रहे हैं।



















