आजकल अधिकांश परिवारों में एक जैसी चिंता देखने को मिल रही है। छोटे बच्चों को खाना खिलाना हो, उनका रोना बंद कराना हो या शांत बैठाना हो, हाथ में स्मार्टफोन देना एक आसान तरीका बन चुका है। लेकिन इसका नतीजा यह हो रहा है कि बहुत कम उम्र में बच्चों की आंखों पर चश्मे चढ़ रहे हैं और किताबों से उनका मन पूरी तरह भटक रहा है। जब माता-पिता मोबाइल छीनने की कोशिश करते हैं, तो बच्चे जिद पर अड़ जाते हैं या रोने-धोने लगते हैं। ऐसी स्थिति में डांट-डपट, गुस्सा या मारपीट कोई समाधान नहीं है, क्योंकि इससे बच्चा और ज्यादा विद्रोही तथा जिद्दी हो जाता है। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा स्क्रीन की इस लत से बाहर निकले, तो उसे मजबूर करने के स्थान पर घर में ऐसा वातावरण बनाना होगा जहाँ वह खुद किताबों की ओर आकर्षित हो।
खुद की आदतों में बदलाव और नो-फोन टाइम का नियम
बच्चे अपने आसपास के माहौल और विशेष रूप से अपने माता-पिता के आचरण से सबसे ज्यादा सीखते हैं। यदि घर में बड़े खुद दिनभर मोबाइल फोन पर समय बिताते हैं, सोशल मीडिया रील्स देखते रहते हैं या लगातार स्क्रीन से चिपके रहते हैं, तो बच्चों से किताबें पढ़ने की उम्मीद करना व्यर्थ है। माता-पिता बच्चे के पहले रोल मॉडल होते हैं। इसलिए सबसे पहला कदम यह होना चाहिए कि आप अपनी स्क्रीन टाइम की आदतों में सुधार करें। इसके लिए घर में प्रतिदिन एक निश्चित समय पर 'नो-फोन टाइम' का नियम लागू करें। जब बच्चा आपको अपने सामने हाथ में कोई किताब, पत्रिका या अखबार लेकर पढ़ते हुए देखेगा, तो उसमें स्वाभाविक उत्सुकता जागेगी। वह आपके पास आकर पूछेगा और खुद भी पन्ने पलटने तथा पढ़ने का प्रयास करेगा।
रंग-बिरंगी कॉमिक्स और सचित्र किताबों से शुरुआत
किताबों के प्रति बच्चे की रुचि जगाने के लिए शुरुआत में ही उस पर कठिन या केवल पाठ्य सामग्री से भरी किताबों का बोझ न डालें। इसके बजाय ऐसी किताबें चुनें जिनमें बड़े और आकर्षक रंग-बिरंगे चित्र हों। मनोरंजक कहानियों और कॉमिक्स शैली की पुस्तकें बच्चों को तुरंत अपनी ओर आकर्षित करती हैं। जब बच्चे चित्रों के माध्यम से कहानी की कड़ियों को समझने लगते हैं, तो उनका मस्तिष्क किताबों में भी वही दृश्य आनंद तलाशने लगता है जो उन्हें स्क्रीन पर मिलता है। इससे उनका ध्यान केंद्रित होता है और धीरे-धीरे पढ़ने में उनका रस बढ़ने लगता है। एक बार जब चित्रों के जरिए कहानी समझने का सिलसिला शुरू हो जाता है, तो बच्चा आगे चलकर बिना चित्रों वाली विस्तृत किताबें पढ़ने में भी संकोच नहीं करता।
घर में एक आकर्षक और शांत रीडिंग कॉर्नर की स्थापना
बच्चों को अपनी व्यक्तिगत जगह और मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियाँ बहुत पसंद आती हैं। इस बात का ध्यान रखते हुए घर के किसी शांत और रोशनी वाले कोने को एक विशेष 'रीडिंग कॉर्नर' के रूप में विकसित करें। इस स्थान को सजाने के लिए एक सुंदर चटाई बिछाएं, नरम व रंगीन कुशन रखें और बच्चों की पसंदीदा किताबों की एक छोटी सी रैक व्यवस्थित करें। इस जगह का स्वरूप इतना आकर्षक होना चाहिए कि बच्चा इसे अपना पसंदीदा प्ले एरिया समझे। जब बच्चे को पढ़ने के लिए एक आरामदायक, शांत और सुंदर कोना मिलता है, तो वह खुशी-खुशी वहां बैठकर कहानियां पढ़ना पसंद करता है। यह रीडिंग कॉर्नर बच्चे को स्क्रीन से दूर एक सुरक्षित और रचनात्मक दुनिया में समय बिताने की प्रेरणा देता है।
बेडटाइम स्टोरी रूटीन और कल्पनाशीलता का विकास
रात को सोते समय बच्चों के हाथ में मोबाइल फोन थमाने की गलती बिल्कुल न करें। रात में स्क्रीन देखने से बच्चों की नींद प्रभावित होती है और उनका मानसिक तनाव बढ़ता है। इसके स्थान पर नियमित रूप से 'बेडटाइम स्टोरी' का नियम बनाएं। सोने से पहले बच्चे को खुद अपने मुंह से कहानी पढ़कर या सुनाकर सुनाएं। कहानी सुनाते समय बीच-बीच में थोड़ा रुककर बच्चे से सवाल पूछें, जैसे 'आपको क्या लगता है, इसके आगे क्या हुआ होगा?' या 'इस स्थिति में मुख्य पात्र को क्या करना चाहिए?' ऐसे सवाल पूछने से बच्चे की इमेजिनेशन यानी कल्पनाशीलता और सोचने की क्षमता का तेजी से विकास होता है। वह कहानी में पूरी तरह शामिल हो जाता है और आगे की घटना जानने की उत्सुकता में खुद किताबें उठाकर पढ़ने लगता है।
रोल-प्ले गेम, उपहार और प्रशंसा के जरिए प्रोत्साहन
पढ़ाई या किताब पढ़ने को कभी भी सजा, दबाव या मजबूरी का काम न बनने दें। बच्चे के साथ पढ़ने को एक मजेदार खेल की तरह प्रस्तुत करें। आप बच्चे के साथ रोल-प्ले गेम खेल सकते हैं, जिसमें कहानी का एक किरदार आप बनें और दूसरा किरदार बच्चा निभाए। इससे कहानी जीवंत हो उठती है और बच्चे का आनंद दोगुना हो जाता है। इसके अलावा, बच्चे को प्रोत्साहित करने के लिए हर हफ्ते उसकी पसंद की कोई नई कहानी की किताब उपहार में दें। जब बच्चा किसी किताब का कुछ हिस्सा या पूरी किताब पढ़ ले, तो उसकी दिल खोलकर तारीफ करें। आपकी सराहना से बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ेगा, उसे उपलब्धि का अहसास होगा और वह मोबाइल की आभासी दुनिया को छोड़कर किताबों की असल दुनिया में खोना पसंद करेगा।



















