तेलंगाना के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में लोग इन दिनों पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गांव की तरफ रुख कर रहे हैं। इस भागदौड़ की मुख्य वजह वहां मौजूद एक अनोखा कुआं है, जिसके जल को लेकर यह मान्यता फैली हुई है कि इसे पीने से दंपतियों के घर जुड़वां बच्चों का जन्म होता है। संतान सुख की आस लगाए लोग हैदराबाद, खम्मम, वारंगल और नलगोंडा जैसे प्रमुख शहरों से सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करके इस कुएं तक पहुंच रहे हैं। यह चर्चित कुआं आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के रंगमपेटा मंडल के अंतर्गत आने वाले पात दोड्डिगुंटा गांव में स्थित है, जो राजमंड्री से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर बसा हुआ है।
स्थानीय मान्यता और अनोखा दावा
इस गांव के बारे में स्थानीय लोगों का ऐसा कहना है कि यहां 150 से ज्यादा जुड़वां बच्चों के जोड़े मौजूद हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, यदि कोई भी दंपति बिना किसी अन्य जल स्रोत का सहारा लिए लगातार छह महीने तक केवल इसी कुएं के पानी का सेवन करता है, तो उन्हें जुड़वां संतान का आशीर्वाद मिलता है। इस गहरी आस्था के कारण जो लोग व्यक्तिगत तौर पर इस दूरदराज के गांव तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, वे हैदराबाद और अन्य शहरी इलाकों से कूरियर तथा पार्सल के माध्यम से इस पानी की खेप मंगवा रहे हैं। गांव के लोग इस जल के एवज में कोई कीमत नहीं वसूलते हैं, बल्कि केवल पानी के केन और परिवहन का वास्तविक खर्च ही ले रहे हैं ताकि जरूरतमंदों तक यह आसानी से पहुंच सके।
यातायात की सुविधा और बढ़ती आस्था
हैदराबाद और तेलंगाना के तमाम बड़े शहरों से राजमंड्री के लिए सीधी बस और ट्रेन सेवाएं उपलब्ध होने के कारण वीकेंड के दौरान बड़ी संख्या में परिवार अपने निजी वाहनों से पात दोड्डिगुंटा पहुंच रहे हैं। लोग बड़े-बड़े वाटर केन में यह पानी भरकर अपने साथ लाते हैं और कुएं के पास बने मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना भी करते हैं। हालांकि, दूसरी तरफ चिकित्सा विशेषज्ञों का साफ तौर पर यह मानना है कि जुड़वां बच्चों का पैदा होना पूरी तरह से जैविक और जेनेटिक कारणों पर निर्भर करता है, लेकिन इसके बावजूद तेलंगाना के सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ-साथ महानगरों में भी इस चमत्कारी कुएं के पानी को लेकर लोगों के बीच उत्सुकता और अंधविश्वास लगातार बढ़ता जा रहा है।



















