अक्सर लोग कान की सफाई को लेकर भारी लापरवाही बरतते हैं और मैल निकालने के लिए ईयरबड्स, चाबी या माचिस की तीली जैसी नुकीली चीजों का सहारा लेने लगते हैं। कान हमारे शरीर का बेहद संवेदनशील और नाजुक अंग है। जब लोग ईयरबड्स का इस्तेमाल करते हैं, तो कई बार उसकी रुई अंदर ही छूट जाती है। इससे कान का मैल बाहर आने के बजाय और भीतर की तरफ धकेल दिया जाता है, जिससे कान का पर्दा खतरे में पड़ सकता है। ऐसे में यह समझना बहुत जरूरी है कि कान में वैक्स क्यों बनता है, इसके ज्यादा जमने पर शरीर क्या संकेत देता है और इसे सुरक्षित ढंग से कैसे हटाया जाए।
कान में वैक्स बनने का कारण और इसका महत्व
कान में बनने वाला वैक्स असल में सुरक्षा चक्र की तरह काम करता है। यह एक एसिडिक परत तैयार करता है, जिससे बाहरी धूल, मिट्टी और कीटाणु कान के नाजुक भीतरी हिस्से तक नहीं पहुंच पाते। इस सुरक्षा परत की वजह से कान में संक्रमण होने का जोखिम काफी कम हो जाता है। यह वैक्स सामान्यतः कान की नली में बाहर की तरफ ही तैयार होता है। कुदरती तौर पर जब हम भोजन चबाते हैं या बातचीत करते हैं, तो जबड़ों की इस लगातार हरकत से मैल अपने आप खिसककर बाहर आ जाता है। समस्या तब पैदा होती है जब लोग कान के गहरे अंदरूनी हिस्से को खुरचने की कोशिश करते हैं। ऐसी जबरन सफाई से वैक्स धीरे-धीरे कान के पर्दे के पास जाकर जम जाता है और वहीं अटक जाता है, जिससे कान पूरी तरह बंद महसूस होने लगता है।
मैल जमने के लक्षण और परेशानी
जब कान में बहुत अधिक मात्रा में मैल इकट्ठा हो जाता है, तो इसके कई स्पष्ट लक्षण नजर आने लगते हैं। व्यक्ति को पहले की तुलना में थोड़ा कम सुनाई देने लगता है और आवाजें भारी या दबी हुई महसूस होती हैं। इसके अलावा कानों के भीतर लगातार सायं-सायं या अजीब सी सीटी जैसी आवाजें सुनाई देने का अहसास होने लगता है। कान में भारीपन और खिंचाव की शिकायत भी लगातार बनी रहती है। इन लक्षणों को नजरअंदाज करना परेशानी को और बढ़ा सकता है।
घरेलू नुस्खों से मैल को करें नरम
कान के सूखे मैल को बाहर निकालने का सबसे सुरक्षित तरीका उसे तरल और मुलायम बनाना है। इसके लिए हल्का गुनगुना सरसों का तेल काफी मददगार साबित होता है। रात के समय सोने से ठीक पहले कान में गुनगुने सरसों के तेल की 2 से 3 बूंदें डाली जा सकती हैं, जिससे कठोर वैक्स नरम पड़ने लगता है। इसके अलावा एक दूसरा घरेलू नुस्खा भी काम करता है, जिसमें लहसुन की 2 से 3 कलियों को सरसों के तेल में अच्छी तरह पकाया जाता है। इसके बाद तेल को छानकर सामान्य तापमान पर ठंडा होने दें। इस ठंडे तेल की 1 से 2 बूंद कान में डालने से न केवल जमा हुआ मैल ढीला होकर बाहर खिसकने लगता है, बल्कि यह कान में मौजूद हल्के-फुल्के संक्रमण को दूर करने में भी सहायता करता है।
ईयरवैक्स ड्रॉप्स और बाहरी सफाई का तरीका
अगर घरेलू तेल के बजाय मेडिकल विकल्प चाहिए, तो ईयरवैक्स ड्रॉप्स का इस्तेमाल सबसे बढ़िया और सुरक्षित रास्ता माना जाता है। मेडिकल स्टोर पर यह ड्रॉप्स 60 से 70 रुपये के आसपास आसानी से मिल जाती हैं। इस दवा की 2-2 बूंदें दिन में 3 बार कान में डाली जा सकती हैं और इस प्रक्रिया को कम से कम 5 से 6 दिनों तक नियमित अपनाना चाहिए। इससे जमा हुआ मैल पूरी तरह नरम हो जाता है। यदि वैक्स ढीला होकर कान के बाहरी हिस्से पर दिखने लगे, तो उसे किसी साफ, गीले और मुलायम कपड़े से हल्के हाथ से पोंछकर हटाया जा सकता है। जब वैक्स खुद से बाहर आने लगे तो यह सबसे बेहतर स्थिति है। बाजार में आजकल वैक्स निकालने के लिए खास किट भी मिलने लगी हैं। हालांकि, यदि ड्रॉप्स डालने के बाद भी मैल बाहर न निकले या कान पूरी तरह बंद रहे, तो खुद कोई नुकीली चीज डालने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि चिकित्सकों के पास इसे सुरक्षित ढंग से निकालने के कई चिकित्सकीय विकल्प मौजूद होते हैं।
ईयरबड्स का नुकसान
अधिकांश लोग कान साफ करने के लिए ईयरबड्स को सही मानकर उसका नियमित प्रयोग करते हैं, लेकिन वास्तव में यह बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। बड्स को कान में घुमाने से मैल बाहर आने के बजाय अंदर की ओर खिसक जाता है और कान के पर्दे से सटकर चिपक जाता है। इससे पर्दे पर दबाव बनता है और गंभीर नुकसान का अंदेशा बढ़ जाता है। इसलिए खुद डॉक्टर बनने के बजाय सुरक्षित तरल उपायों या पेशेवर मदद पर ही भरोसा करना समझदारी है।



















