कांच की खनकती चूड़ियों की बात छिड़ते ही उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद का ख्याल सबसे पहले जेहन में आता है। सुहाग का प्रतीक मानी जाने वाली इन रंग-बिरंगी चूड़ियों की पहचान देश-दुनिया में है। अक्सर बाजार में खरीदारी करते वक्त ग्राहक केवल बाहरी चमक-दमक देखकर आकर्षित हो जाते हैं, पर हर चमकीली चूड़ी टिकाऊ नहीं होती। कई बार चूड़ियां इतनी नाजुक निकलती हैं कि थोड़ा सा जोर पड़ते ही कलाई पर टूट जाती हैं, जबकि कुछ चूड़ियां सालों-साल सही-सलामत रहती हैं। ऐसे में खरीदारी के दौरान यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि कौन सी चूड़ी पक्की और मजबूत है और कौन सी कच्ची।
भट्ठी से दुकानों तक चूड़ी बनने का पूरा सफर
कांच की चूड़ियों का निर्माण बड़े-बड़े कारखानों में बेहद सधे हुए तरीके से किया जाता है। भट्ठी के भीतर तेज आंच में कांच को पिघलाकर सबसे पहले उसे गोल छल्ले का आकार दिया जाता है। इस शुरुआती प्रक्रिया के बाद तैयार होने वाली चूड़ियां कच्ची अवस्था में होती हैं, जिन्हें आगे के काम के लिए माहिर कारीगरों तक पहुंचाया जाता है। घरों और कार्यशालाओं में महिला कारीगर बड़ी बारीकी से अपने हाथों से इन पर खूबसूरत रंग चढ़ाती हैं, नग जड़ती हैं और आकर्षक डिजाइन उकेरती हैं। हर एक चूड़ी पर होने वाली यह दस्तकारी कड़ी मेहनत मांगती है। पूरी सजावट पूरी हो जाने के बाद इन चूड़ियों को अलग-अलग रंगों और डिजाइनों के आधार पर डिब्बों में पैक करके दुकानों पर बिक्री के लिए भेजा जाता है।
कच्ची और पक्की चूड़ी में क्या होता है बुनियादी फर्क
बाजार में बिकने वाली चूड़ियां मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बंटी होती हैं, जिनमें पहली कच्ची और दूसरी पक्की यानी टिकाऊ चूड़ी होती है। फिरोजाबाद के मशहूर चूड़ी बाजार गली इमामबाड़ा में कारोबार करने वाले अंकुश अग्रवाल के अनुसार, कच्ची चूड़ी वजन में काफी हल्की होती है और थोड़ा सा भी दबाव पड़ने पर झटके से चटक जाती है। इसके विपरीत, पक्की चूड़ी अपेक्षाकृत भारी, ठोस और लंबे समय तक चलने वाली होती है। आम खरीदार के लिए सिर्फ आंखों से देखकर इन दोनों में भेद कर पाना आसान नहीं होता, क्योंकि ऊपर से दोनों की रंगत और सजावट एक जैसी ही नजर आती है।
खनक से पहचानें असली और टिकाऊ चूड़ी
मजबूत चूड़ी छांटने के लिए किसी खास उपकरण की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि एक बेहद सरल देसी नुस्खा काम आता है। चूड़ी खरीदते समय उसे आपस में या उंगली से हल्का सा बजाकर उसकी आवाज सुननी चाहिए। जिस चूड़ी से खन-खन की बिल्कुल साफ, स्पष्ट और सुरीली ध्वनि निकले, वह चूड़ी पक्की और मजबूत मानी जाती है। वहीं यदि बजाने पर आवाज दबी हुई, भारी या फंसी हुई महसूस हो, तो समझ लेना चाहिए कि वह कच्ची चूड़ी है और जल्दी टूट सकती है। फिरोजाबाद के स्थानीय निवासी और अनुभवी खरीदार पीढ़ियों से इसी तरीके को आजमाकर अच्छी चूड़ियों का चयन करते आ रहे हैं।
किफायती दामों में उपलब्ध हैं मनपसंद डिजाइन
फिरोजाबाद की चूड़ियों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह हर किसी के बजट में आसानी से फिट बैठ जाती हैं। यहां कांच की चूड़ियों के दाम 25 रुपये प्रति दर्जन से शुरू होते हैं। इसके बाद अलग-अलग नक्काशी, नग के काम और आधुनिक डिजाइन के आधार पर इनकी कीमत 80 रुपये प्रति दर्जन तक जाती है। इसलिए अगली बार जब भी आप चूड़ियों की खरीदारी करने निकलें, तो केवल रंग-रूप और डिजाइन देखकर फैसला न लें, बल्कि उसकी खनक सुनकर ही अपनी पसंद तय करें।



















