त्वचा की देखभाल को लेकर इंटरनेट पर अक्सर नए प्रयोग सामने आते रहते हैं, जिनमें आजकल स्लगिंग नाम की एक पद्धति काफी सुर्खियां बटोर रही है। इस विधि में सोने से पहले अपने सामान्य स्किनकेयर रूटीन को पूरा करने के बाद चेहरे पर पेट्रोलियम जेली की एक बारीक परत लगाई जाती है। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य त्वचा के भीतर मौजूद प्राकृतिक नमी को सील करना है, जिससे सुबह सोकर उठने पर चेहरा अधिक कोमल, लचीला और चमकदार दिखाई दे। हालांकि, यह उपाय हर किसी के चेहरे के लिए मुफीद साबित नहीं होता, खासकर जिनकी त्वचा तैलीय है या जिन पर अक्सर दाने निकलते रहते हैं, उनके लिए यह तरीका नई परेशानियां खड़ी कर सकता है।
स्लगिंग का असर और इसके काम करने का तरीका
स्लगिंग की पूरी प्रक्रिया पेट्रोलियम जेली के उस गुण पर आधारित है जिसे अवरोधक या ऑक्लूसिव कहा जाता है। जब रात में चेहरे पर पेट्रोलियम जेली की एक महीन परत लगाई जाती है, तो यह त्वचा की बाहरी सतह पर एक मजबूत सुरक्षा घेरा तैयार कर देती है। यह सुरक्षा कवच त्वचा की भीतरी परतों से पानी के वाष्पीकरण को थाम लेता है, जिससे नमी बाहर नहीं निकल पाती। इसका सीधा फायदा उन लोगों को मिलता है जिनकी त्वचा अत्यधिक रूखी, बेजान या खिंची-खिंची रहती है।
यहां यह स्पष्ट समझना जरूरी है कि पेट्रोलियम जेली अपने आप में त्वचा को कोई नई नमी प्रदान नहीं करती है। इसका मूल कार्य त्वचा में पहले से मौजूद हाइड्रेशन और लगाए गए मॉइस्चराइजर को अंदर ही बांधकर रखना होता है। जब अंदरूनी नमी बाहर नहीं निकल पाती, तो कुछ समय के लिए त्वचा अधिक मुलायम, चिकनी और स्वाभाविक रूप से चमकदार नजर आने लगती है।
क्या इस पद्धति से रोमछिद्र बंद हो सकते हैं?
लोगों के मन में यह सवाल अक्सर उठता है कि क्या पेट्रोलियम जेली चेहरे के रोमछिद्रों को पूरी तरह अवरुद्ध कर देती है। असल में यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है कि हर व्यक्ति के रोमछिद्र इससे बंद ही हो जाएंगे, लेकिन इसे बिना सोचे-समझे हर तरह की त्वचा पर आजमाना भी समझदारी नहीं है। जिन लोगों की त्वचा जरूरत से ज्यादा तैलीय है या जिन्हें बार-बार मुंहासे, ब्लैकहेड्स और व्हाइटहेड्स की शिकायत रहती है, उनके चेहरे पर पेट्रोलियम जेली की मोटी परत लगाना ब्रेकआउट की समस्या को अचानक भड़का सकता है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी भी यह सुझाव देती है कि जिन लोगों की त्वचा पर आसानी से कील-मुंहासे उभर आते हैं, उन्हें केवल ऐसे उत्पादों का चुनाव करना चाहिए जिन पर नॉन-कॉमेडोजेनिक अथवा वोंट क्लॉग पोर्स स्पष्ट लिखा हो। इस वजह से, यदि आपकी त्वचा पहले से तैलीय या एक्ने-प्रोन प्रकृति की है, तो पूरे चेहरे पर स्लगिंग करने से दूरी बनाना ही सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
किन लोगों को मिल सकता है इसका असली फायदा?
स्लगिंग तकनीक विशेष रूप से उन लोगों के लिए बेहद राहत भरी हो सकती है जिनकी त्वचा में नमी का भारी अभाव रहता है और जो लगातार खिंचाव या सूखेपन से जूझते हैं। जब मौसम ठंडा और शुष्क होता है, तब भी यह पद्धति त्वचा से होने वाले पानी के नुकसान को रोकने में काफी मददगार साबित होती है। यदि किसी व्यक्ति के पूरे चेहरे पर सूखापन नहीं है, तो उसे पूरे मुंह पर जेली पोतने की जरूरत नहीं होती। ऐसे मामलों में पेट्रोलियम जेली को केवल सूखे हिस्सों जैसे फटे होंठों, आंखों के इर्द-गिर्द की शुष्क त्वचा या नाक के किनारों पर बहुत कम मात्रा में लगाकर भी बेहतरीन परिणाम पाए जा सकते हैं।
स्लगिंग करने का सही और सुरक्षित तरीका
अगर आप इस तकनीक को आजमाना चाहते हैं, तो सबसे पहले चेहरे को किसी सौम्य क्लेंजर से अच्छी तरह धोकर साफ करें। इसके तुरंत बाद अपनी त्वचा की जरूरत के अनुसार एक अच्छा मॉइस्चराइजर लगाएं। जब मॉइस्चराइजर त्वचा में पूरी तरह समा जाए, तब बहुत ही थोड़ी मात्रा में पेट्रोलियम जेली लेकर उसकी एकदम महीन परत चेहरे पर फैलाएं। पूरे चेहरे पर सफेद या भारी चिपचिपा लेप लगाने की कतई जरूरत नहीं होती, केवल नाममात्र की परत ही पर्याप्त होती है।
एक बेहद अहम सावधानी यह रखनी चाहिए कि स्लगिंग करते समय रेटिनॉल, एएचए और बीएचए जैसे एक्टिव तत्वों वाले उत्पादों को पेट्रोलियम जेली के नीचे कभी न लगाएं। चूंकि पेट्रोलियम जेली एक अभेद्य परत बना देती है, इसलिए यह इन तेज रसायनों को लंबे समय तक त्वचा पर दबाए रख सकती है, जिससे कई लोगों में गंभीर जलन, लालिमा या इरिटेशन पैदा हो सकती है।
सुबह की सफाई और जरूरी सावधानियां
अगली सुबह सोकर उठने के बाद चेहरे को एक हल्के क्लेंजर की मदद से धोना जरूरी है, ताकि रात भर लगी रही पेट्रोलियम जेली, त्वचा से निकला अतिरिक्त तेल और जमी हुई धूल आसानी से साफ हो जाए। इसके उपरांत आवश्यकतानुसार मॉइस्चराइजर और दिन के समय धूप से बचाव के लिए सनस्क्रीन लगाना न भूलें। स्लगिंग को रोजाना अपने रूटीन में शामिल करना बिल्कुल आवश्यक नहीं है। अत्यधिक रूखी त्वचा वाले लोग जरूरत पड़ने पर कभी-कभार इसका सहारा ले सकते हैं। यदि इस प्रयोग के बाद चेहरे पर दाने, लाल चकत्ते, खुजली या जलन के लक्षण दिखने लगें, तो इसे तुरंत बंद कर देना चाहिए।



















