मेरठ में पति का कत्ल कर दिल का दौरा बताया, मोबाइल चैट से राजफाश के बाद कब्र से निकाला जाएगा शवमहिला आंदोलनकारियों से बदसलूकी के दावे निराधार, दिल्ली पुलिस ने दी सफाईराजस्थान में 2 करोड़ घूसकांड पर सख्त एक्शन, उदयपुर भूमि विवाद में फंसे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकेश सोनी सस्पेंडकटपीस कपड़ों के रिटेल स्टोर में निवेश और बचत का पूरा ब्योरा, जानिए कैसे जमता है बाजाररोजाना सिर्फ कदम गिनने से नहीं बनेगी बात, जानिए तेज चाल से चलने के असली फायदेफ्रांस और स्पेन के राजनीतिक संकट से यूरो में भारी गिरावट, 1.1220 के करीब फिसलाअमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच सीमित दायरे में फंसा ब्रिटिश पाउंड, 1.3200 के स्तर पर टिकाघर में फिसलकर गिरने के हादसों से बुजुर्गों को बचाएंगी खास ग्रिप वाली एंटी-स्लिप टाइल्सकर्नाटक में किसान ने जनसुनवाई के दौरान रखी शादी की गुहार, विवाह संकट पर मांगी सरकारी मददछुट्टी खत्म होते ही सताने लगता है दफ्तर का डर, जानिए संडे ईवनिंग एंग्जायटी का कारण
घर की छतों और बालकनी के लिए फाइबर गमलों की बढ़ी मांग, सीमेंट के मुकाबले वजन घटाने में मददगारजीवनशैली
6 अक्तू॰ 2026, 7:22 am (1 घंटे पहले)· 0

घर की छतों और बालकनी के लिए फाइबर गमलों की बढ़ी मांग, सीमेंट के मुकाबले वजन घटाने में मददगार

पारंपरिक मिट्टी और भारी सीमेंट के बर्तनों के बजाय अब गार्डनिंग के शौकीन हल्के फाइबर और प्लास्टिक के गमलों को तरजीह दे रहे हैं, जिससे छतों पर अतिरिक्त भार का खतरा कम हो रहा है।

घरों में बागवानी करने वाले लोगों के बीच अब गमलों के चयन को लेकर एक बड़ा बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। लंबे समय से छतों, बरामदों और बालकनी में हरियाली सजाने के लिए मिट्टी और सीमेंट के गमलों का व्यापक इस्तेमाल किया जाता रहा है। हालांकि, कंक्रीट और भारी मिट्टी से बने ये पात्र छत की सतह पर अत्यधिक भार डालते हैं, जिससे मकान की संरचना को नुकसान पहुंचने या दरारें पड़ने की आशंका बनी रहती है। इसी चिंता के समाधान के रूप में अब बाजार में फाइबर और प्लास्टिक के आधुनिक गमलों ने अपनी मजबूत जगह बना ली है। बागवानी प्रेमियों के बीच इन हल्के विकल्पों की खरीदारी में भारी इजाफा देखा जा रहा है।

पारंपरिक गमलों से आधुनिक विकल्पों की ओर रुझान

नर्सरी व्यवसाय से जुड़े नेक सिंह का कहना है कि पूर्व में ग्राहक केवल मिट्टी या सीमेंट से निर्मित पात्रों की ही मांग किया करते थे। वर्तमान दौर में लोगों की प्राथमिकताओं में उल्लेखनीय परिवर्तन दर्ज किया गया है। अब आवासीय भवनों की छतों, बालकनी और घरेलू बगीचों में पौधे रोपने के लिए प्लास्टिक और फाइबर के विभिन्न डिज़ाइनों को प्राथमिकता दी जा रही है। इन आधुनिक कंटेनरों की सबसे बड़ी खूबी इनका बेहद कम वजन होना है, जिसके चलते इन्हें बिना किसी मशक्कत के एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है।

ये भी पढ़ें

टिकाऊ बनावट और पौधों के विकास में लाभ

नेक सिंह के अनुसार, प्लास्टिक और फाइबर से तैयार किए गए गमले काफी मजबूत और टिकाऊ साबित होते हैं। इन पर कड़ी धूप, बारिश या ठंड जैसे मौसमी बदलावों का असर बहुत धीमा होता है, जिसके कारण ये वर्षों तक बिना टूटे या खराब हुए अपनी उपयोगिता बनाए रखते हैं। इसके अतिरिक्त, इनमें रोपे गए पौधों की वृद्धि भी संतुलित और बेहतर तरीके से होती है। सफाई बनाए रखने और स्थान बदलने में सुगमता होने के कारण आम नागरिक भारी और नाजुक पारंपरिक बर्तनों के स्थान पर इन्हें ज्यादा मुफीद मान रहे हैं।

महानगरों से छोटे शहरों तक लगातार बढ़ती मांग

प्लास्टिक और फाइबर गमलों की लोकप्रियता केवल चुनिंदा इलाकों तक सीमित नहीं है। कोलकाता और पुणे जैसे प्रमुख महानगरों में इनका चलन काफी तेजी से बढ़ा है, और अब मुरादाबाद के स्थानीय बाजारों में भी खरीदार इन विकल्पों को हाथों-हाथ ले रहे हैं। वर्ष 2024 के बाद से इस तरह के हल्के गमलों की व्यावसायिक मांग में तेज उछाल दर्ज किया गया है। आने वाले समय में जैसे-जैसे ऊंची इमारतों और अपार्टमेंट संस्कृति का विस्तार होगा, वैसे-वैसे बालकनी गार्डनिंग के लिए इन हल्के और सुरक्षित कंटेनरों की जरूरत में और अधिक वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।

सवाल-जवाब

छत और बालकनी के लिए फाइबर के गमले क्यों बेहतर माने जा रहे हैं?
फाइबर के गमले बेहद हल्के होते हैं, जिससे छत पर अनावश्यक वजन नहीं बढ़ता और संरचना सुरक्षित रहती है।
पारंपरिक मिट्टी और सीमेंट के गमलों में क्या मुख्य समस्या आती थी?
सीमेंट और मिट्टी के गमले अत्यधिक भारी होते हैं, जिससे छत को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है और उन्हें हटाना कठिन होता है।
क्या फाइबर और प्लास्टिक के गमलों पर मौसम का असर पड़ता है?
इन गमलों पर धूप, बारिश और ठंड जैसे मौसमी बदलावों का असर बहुत कम पड़ता है, जिसके कारण ये लंबे समय तक चलते हैं।
किन शहरों में प्लास्टिक और फाइबर गमलों का चलन तेजी से बढ़ा है?
कोलकाता, पुणे और मुरादाबाद समेत कई शहरों में इन हल्के गमलों की मांग में लगातार तेजी देखी जा रही है।
फाइबर गमलों की मांग में तेजी कब से दर्ज की गई है?
नर्सरी संचालक के अनुसार, वर्ष 2024 के बाद से इन गमलों की बिक्री और मांग में विशेष उछाल आया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp