शौचालय और स्नानागार की नियमित सफाई हर घर की रोजमर्रा की जरूरत होती है, लेकिन बाजार में उपलब्ध रासायनिक उत्पादों की बढ़ती कीमतें कई परिवारों के मासिक बजट पर असर डालती हैं। इसी दिक्कत को दूर करने के लिए सुल्तानपुर की रहने वाली सविता ने अपनी रसोई में मौजूद आम सामग्रियों के संतुलित मिश्रण से एक असरदार सफाई लिक्विड तैयार किया है। यह साधारण घोल बिना किसी अतिरिक्त खर्च के शौचालय और स्नानागार के जिद्दी निशानों को मिटाने में पूरी तरह सक्षम साबित हो रहा है।
सफाई लिक्विड बनाने की सटीक विधि और सामग्री
सविता के अनुसार इस घरेलू क्लीनर को बनाना बेहद सरल है और इसके लिए बाहर से कोई खास सामान लाने की जरूरत नहीं पड़ती। इसे तैयार करने के लिए सबसे पहले एक कप पानी लेकर उसमें दो चम्मच बेकिंग सोडा डालें और चम्मच से तब तक चलाएं जब तक वह पूरी तरह घुल न जाए। बेकिंग सोडा पानी में अच्छी तरह मिल जाने के बाद उसमें आधा कप सफेद सिरका बेहद धीरे-धीरे मिलाएं, ताकि उसमें बनने वाला झाग बाहर न छलके।
सिरका और बेकिंग सोडा मिलने के बाद इस मिश्रण में दो से तीन चम्मच ताजा नींबू का रस डालें और पूरे घोल को एक बार फिर भली-भांति मिला लें। जब सभी सामग्रियां आपस में घुल-मिल जाएं, तब इस पूरे लिक्विड को एक साफ स्प्रे बोतल में भर लें। सविता स्पष्ट रूप से सावधान करती हैं कि इस प्राकृतिक घोल में ब्लीच या किसी अन्य तेज रासायनिक उत्पाद को बिल्कुल नहीं मिलाना चाहिए, क्योंकि रसायनों का आपसी संपर्क नुकसानदेह हो सकता है।
कमोड सीट और यूरिनल के पीले निशानों से निजात
शौचालय की सीट पर पानी के लगातार जमने, खारेपन और नियमित इस्तेमाल से अक्सर भद्दे पीले दाग बन जाते हैं, जो साधारण पानी से नहीं छूटते। सविता के बताए घोल से इन्हें हटाने के लिए सबसे पहले कमोड सीट को सामान्य पानी से धोकर गीला कर लें। इसके बाद स्प्रे बोतल की मदद से तैयार लिक्विड को सीधे उन निशानों और दाग वाली जगहों पर छिड़कें।
लिक्विड छिड़कने के तुरंत बाद रगड़ने की जल्दबाजी न करें, बल्कि इसे कुछ समय तक दाग पर ही लगा रहने दें ताकि मिश्रण की अम्लीयता गंदगी को ढीला कर सके। थोड़ी देर बाद एक टॉयलेट ब्रश अथवा स्क्रबर के सहारे हल्के हाथों से उस हिस्से को रगड़ें। जब दाग पूरी तरह छूट जाएं, तो सीट को पर्याप्त साफ पानी से धो दें और अंत में सूखे कपड़े से पोंछकर सुखा लें।
दीवारों की टाइल्स और जमी हुई साबुन की परत की सफाई
स्नानागार की दीवारों पर लगी टाइल्स पर रोजाना पानी के छींटे पड़ने और साबुन का झाग सूखने से सफेद पपड़ी और मैल की परत जम जाती है। समय बीतने के साथ यह मैल टाइल्स की स्वाभाविक चमक को फीका कर देता है। ऐसे स्थानों पर भी सविता का यह प्राकृतिक लिक्विड काफी प्रभावी काम करता है।
टाइल्स पर जमी मैल पर इस लिक्विड को सीधे स्प्रे करें और थोड़ी देर के लिए छोड़ दें। जब घोल मैल को काट दे, तब स्क्रबर या ब्रश से टाइल्स की सतह को अच्छी तरह रगड़ लें। रगड़ने के बाद साफ पानी की तेज धार से टाइल्स को धो लें, जिससे मैल बह जाएगी। हालांकि सविता यह सलाह भी देती हैं कि पूरी दीवार पर घोल का उपयोग करने से पहले हमेशा किसी छोटे और कोने वाले हिस्से पर इसे आजमाकर देख लें, जिससे टाइल की पॉलिश को किसी प्रकार की हानि न पहुंचे।
बाथरूम के फर्श और ढलान वाले हिस्सों की देखभाल
स्नानागार का फर्श घर के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले और सबसे जल्दी गंदे होने वाले हिस्सों में से एक है। यहां बहने वाले पानी, साबुन के अवशेषों और पैरों से आने वाली धूल-मिट्टी के कारण धीरे-धीरे चिकनाई व कालेपन की मोटी परत जम जाती है। सविता ने अपने घरेलू प्रयोग में फर्श की इसी गंभीर समस्या का समाधान निकाला है।
फर्श की सफाई शुरू करने से पहले उस पर जमा अतिरिक्त कचरे और ऊपरी धूल को सादे पानी से बहाकर अलग कर लें। इसके बाद तैयार घरेलू लिक्विड को पूरे फर्श पर समान रूप से छिड़कें और कुछ मिनटों के लिए छोड़ दें। तय समय बीतने पर फर्श साफ करने वाले ब्रश से अच्छी तरह घिसाई करें ताकि कोनों में फंसी गंदगी भी बाहर आ जाए। अंत में भरपूर साफ पानी डालकर फर्श को धोएं, जिससे सारी जमी हुई गंदगी बह जाएगी और फर्श साफ नजर आएगा।
जिद्दी दागों के लिए विशेष तरकीब और जरूरी सावधानियां
अक्सर ऐसा देखा जाता है कि पुराने और सख्त दाग केवल एक बार रगड़ने से पूरी तरह साफ नहीं होते। ऐसी स्थिति में घबराकर बार-बार खतरनाक तेजाब या तेज केमिकल डालने की भूल नहीं करनी चाहिए, बल्कि सविता के घोल को दाग पर लगाकर कुछ अतिरिक्त मिनटों तक काम करने का वक्त देना चाहिए। यदि दाग बहुत पुराना है, तो लिक्विड लगाकर ब्रश से साफ करने की इस पूरी प्रक्रिया को दोबारा दोहराया जा सकता है।
घरेलू नुस्खों को अपनाते समय व्यक्तिगत सुरक्षा का ध्यान रखना भी अनिवार्य है। सफाई का काम करते वक्त हाथों में हमेशा रबर के दस्ताने जरूर पहनें ताकि त्वचा सुरक्षित रहे। इसके अलावा, संगमरमर, प्राकृतिक पत्थर या किसी अन्य अत्यधिक संवेदनशील सतह पर इस घोल का सीधा इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, क्योंकि सिरके और नींबू की अम्लीय प्रकृति कुछ पत्थरों की चमक को प्रभावित कर सकती है। किसी भी नई सतह पर इस्तेमाल से पहले छिपे हुए छोटे कोने में परीक्षण करना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।




















