अपना नया आशियाना तैयार करते समय लोग अक्सर फर्श की चमक, आकर्षक डिजाइन और बाहरी खूबसूरती पर तो पूरा ध्यान देते हैं, लेकिन बुनियादी सुरक्षा से जुड़े कई अहम कदमों को नजरअंदाज कर देते हैं। यही अनदेखी आगे चलकर परिवार के लिए सिरदर्द बन जाती है। दीमक एक ऐसा ही खामोश कीट है, जो पलंग, सोफा, अलमारी, कपड़ों और यहां तक कि घर में रखे जरूरी कागजात को भी धीरे-धीरे पूरी तरह बर्बाद कर देता है। आमतौर पर लोग मानते हैं कि दीमक केवल पुराने मकानों में ही लगती है, जबकि हकीकत यह है कि थोड़ी सी नमी मिलने पर यह नए निर्माण को भी अपनी चपेट में ले लेती है। मोतिहारी के निवासी और लगभग 10 वर्षों से इंटीरियर डिजाइनिंग का काम देख रहे अभिषेक अग्रवाल के मुताबिक, यदि निर्माण कार्य के दौरान ही सही कदम उठा लिए जाएं तो इस समस्या से हमेशा के लिए छुटकारा मिल सकता है।
दीवारों की नमी और पानी के लीकेज पर रखें कड़ी नजर
मकान की बनावट में दीमक के पनपने की सबसे बड़ी वजह लगातार बनी रहने वाली सीलन और नलों या पाइपों से होने वाला पानी का रिसाव है। जिस जगह भी ईंटों या प्लास्टर को लगातार पानी मिलता रहता है, वहां दीमक बहुत तेजी से अपना घर बना लेती है। अभिषेक अग्रवाल का कहना है कि प्लंबिंग फिटिंग का काम पूरा होते ही पूरे पाइप नेटवर्क की वाटर टेस्टिंग अनिवार्य रूप से करानी चाहिए। रिसाव की बारीक से बारीक जगह पकड़ने के लिए पानी में रंग मिलाकर पाइपलाइनों की जांच करने का नुस्खा बेहद कारगर साबित होता है। रंगीन पानी की मदद से लीकेज वाले सटीक बिंदु को तुरंत चिन्हित कर लिया जाता है, जिससे दीवार पर प्लास्टर या रंग-रोगन होने से पहले ही मरम्मत का काम पूरा हो जाता है।
बाथरूम और टाइल्स के काम में वाटरप्रूफिंग की अहमियत
फर्श या दीवारों पर टाइल्स बिठाते वक्त वाटरप्रूफिंग का खास ख्याल रखना बेहद जरूरी है। खासकर स्नानघर, वॉश एरिया और लगातार पानी के संपर्क में रहने वाले हिस्सों में यदि वाटरप्रूफिंग का काम सही ढंग से न किया जाए, तो पानी धीरे-धीरे रिसकर दीवारों की गहराई तक पहुंच जाता है। सही रासायनिक घोल और वाटरप्रूफिंग तकनीक के इस्तेमाल से पानी का नीचे या आसपास की दीवारों में उतरना रुक जाता है। जब तक नमी की मौजूदगी पूरी तरह खत्म नहीं होगी, तब तक दीमक के हमले के खतरे को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता।
लकड़ी के सामान पर केमिकल ट्रीटमेंट और सुरक्षा कवच
घर के भीतर दीमक का सबसे पहला और आसान शिकार लकड़ी से बने उत्पाद होते हैं। मेज, कुर्सी, पलंग, दरवाजे और आलमारियों को सुरक्षित बनाए रखने के लिए केवल अच्छी लकड़ी चुनना ही काफी नहीं होता, बल्कि निर्माण और इंस्टॉलेशन के वक्त उन पर केमिकल आधारित एंटी-टर्माइट ट्रीटमेंट किया जाना चाहिए। इसके साथ ही लकड़ी की सतहों पर टिकाऊ प्रोटेक्टिव कोटिंग लगाई जानी चाहिए। अभिषेक अग्रवाल दीवारों और कीमती लकड़ी के साजो-सामान को दीमक के सीधे हमले से बचाने के लिए वॉल गार्ड जैसी आधुनिक सुरक्षात्मक तकनीकों को अपनाने पर जोर देते हैं, जिससे लकड़ी सीधे दीवार की नमी के संपर्क में नहीं आती।
चींटियों और अन्य कीटों की आवाजाही को न करें नजरअंदाज
घरों में दिखने वाली चींटियां भी दीमक के विस्तार में मददगार साबित हो सकती हैं। कई बार चींटियां लकड़ी के भीतरी हिस्सों को खोखला कर अपने आने-जाने का रास्ता या घोंसला तैयार कर लेती हैं। चींटियों द्वारा बनाए गए इन सुराखों और खाली जगहों का फायदा उठाकर दीमक और दूसरे विनाशकारी कीट लकड़ी के बिल्कुल अंदर तक पैठ बना लेते हैं। इसके बाद वे अंदर ही अंदर सामान को पाउडर में बदलना शुरू कर देते हैं। इसलिए जैसे ही मकान में चींटियों या किसी भी कीड़े की हलचल दिखाई दे, उसे सामान्य समझकर टालने के बजाय तुरंत जरूरी कदम उठाने चाहिए।
समस्या आने के बाद नहीं, निर्माण के समय ही करें पूरा बंदोबस्त
एक बार अगर पूरे मकान में दीमक का जाल फैल जाए, तो उसके बाद दवाइयों का छिड़काव या इलाज कराना काफी महंगा और झंझट भरा साबित होता है। इसलिए समझदारी इसी में है कि जब नींव रखी जा रही हो और निर्माण चल रहा हो, तभी सीलन से बचाव और एंटी-टर्माइट के पुख्ता इंतजाम कर लिए जाएं। नियमित प्लंबिंग निरीक्षण, सटीक वाटरप्रूफिंग और लकड़ी के सामान की सही सुरक्षा को अपनी निर्माण योजना में शामिल करके नए मकान को दशकों तक दीमक के खतरे से महफूज रखा जा सकता है।



















