बागवानी और खेती में अच्छे उत्पादन की चाह रखने वाले लोगों के बीच अक्सर यह धारणा बनी रहती है कि केवल महंगे रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से ही फसलों या फलदार पेड़ों को तेजी से बढ़ाया जा सकता है। हकीकत में ऐसा सोचना बिल्कुल सही नहीं है, क्योंकि पारंपरिक जैविक खादों के सही प्रयोग से भी पेड़ों में भरपूर फल और बेहतर गुणवत्ता हासिल की जा सकती है। जैविक तरीकों का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इनके उपयोग से इंसानी सेहत पर कोई जहरीला असर नहीं पड़ता और जमीन की उपजाऊ मिट्टी भी किसी भी किस्म के नुकसान से सुरक्षित रहती है।
रासायनिक खादों का बढ़ता चलन और बंजर होती जमीनें
नालंदा जिले के खुदागंज थाना क्षेत्र के बोरी डीह गांव के रहने वाले अवधेश प्रसाद जहानाबाद और नालंदा की सीमा पर काम करते हैं। मगही पान अनुसंधान केंद्र में कई वर्षों से खेती किसानी के काम से जुड़े रहने के कारण उनके पास पेड़ों और फसलों की देखभाल का लंबा व्यावहारिक अनुभव है। वे बताते हैं कि आज के दौर में जब किसी फलदार वृक्ष में ठीक से फल नहीं आते, तो लोग बिना सोचे समझे भारी मात्रा में रासायनिक खाद डालने लगते हैं। रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल का चलन समय के साथ इतना बढ़ गया है कि खेत धीरे धीरे बंजर होने लगे हैं और तमाम लागत लगाने के बाद भी किसानों को अपेक्षित पैदावार नहीं मिल पा रही है।
सरसों की खली के पोषक तत्व और पारंपरिक पहचान
इस गंभीर समस्या के समाधान के रूप में रासायनिक उर्वरकों को पूरी तरह छोड़कर उनकी जगह सरसों की खली अपनाने की सीधी सलाह दी जाती है। यह पूरी तरह से प्राकृतिक जैविक खाद है, जिसमें पौधों के विकास के लिए जरूरी पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में मौजूद रहते हैं। पुरानी पीढ़ियों के किसान भी अपने बागों और खेतों में इसी पारंपरिक नुस्खे का इस्तेमाल किया करते थे और उन्हें बिना जमीन को नुकसान पहुंचाए लगातार बेहतरीन उत्पादन मिलता था। सरसों की खली जमीन में धीरे धीरे घुलकर पेड़ों को संतुलित पोषण देती है, जिससे पौधे तेजी से बढ़ते हैं और उनकी उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होता है।
पेड़ों में सरसों की खली डालने की सही विधि
अगर घर के आंगन या बगीचे में लगे नींबू के पौधे में फल नहीं आ रहे हैं, तो इसके लिए एक बेहद आसान और कारगर तरीका अपनाया जा सकता है। सबसे पहले पौधे के आसपास जितनी दूरी तक उसकी दोपहर की छाया पड़ती है, उतने हिस्से की मिट्टी को जड़ों के पास सावधानीपूर्वक खुरपी या कुदाल से कोड़ लें। मिट्टी की अच्छी तरह से गुड़ाई करने के बाद, कोड़े गए पूरे हिस्से में सरसों की खली को चारों तरफ एक समान रूप से बिखेर देना चाहिए। खली डालने के तुरंत बाद उस हिस्से की अच्छी तरह हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए। इस तरह जड़ों के चारों ओर जैविक खाद फैलने से थोड़े ही समय में पेड़ों पर फलने फूलने का स्पष्ट असर दिखाई देने लगता है।
कम खर्च में शानदार पैदावार का आसान नुस्खा
इस पूरी प्रक्रिया में खाद की मात्रा का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। आमतौर पर एक फलदार पेड़ के लिए लगभग आधा किलोग्राम सरसों की खली का इस्तेमाल पूरी तरह पर्याप्त माना जाता है। इसमें किसान या बागवानी के शौकीनों का कोई बड़ा खर्च भी नहीं होता और सस्ते में ही पौधा स्वस्थ होकर अप्रत्याशित रूप से फलों से लदने लगता है। इस तरह से अपने फलदार पेड़ों में प्राकृतिक जैविक खाद को प्राथमिकता देकर बेहद शानदार नतीजे आसानी से प्राप्त किए जा सकते हैं।



















