हाथों पर सजने वाली प्राकृतिक लाली और सोंधी खुशबू के शौकीनों के लिए राजस्थान के पाली जिले में बसा सोजत कस्बा एक अनूठा गंतव्य बनकर उभर रहा है। यह प्राचीन नगर केवल मेहंदी कारोबार का बहुत बड़ा केंद्र भर नहीं है, बल्कि अपनी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक विविधता और रोमांचक अनुभवों के दम पर सैलानियों को अपनी ओर खींचता है। यहां कदम रखने वाले मुसाफिरों के लिए सबसे खास तजुर्बा मेहंदी पर्यटन का माना जाता है, जिसमें खेतों में बुवाई और कटाई से लेकर कारखानों में पाउडर तैयार होने का पूरा सफर सीधे देखा जा सकता है। इसके साथ ही सुकड़ी नदी किनारे पहाड़ी पर डटा विशाल दुर्ग और सदियों पुराने पूजा स्थल इस जगह की सैर को बेहद खास बना देते हैं।
खेतों से कारखानों तक मेहंदी बनने का अनूठा सफर
सोजत के चारों तरफ मीलों तक फैले हरियाली से लदे खेत सैलानियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहते हैं। इन खेतों में आकर लोग आसानी से देख सकते हैं कि स्थानीय किसान किस तरह कड़ी मेहनत से फसल की देखभाल करते हैं, पत्तों की सावधानीपूर्वक कटाई करते हैं और फिर उन्हें धूप में सूखने के लिए फैलाते हैं। फसल सुखाए जाने के बाद उसे आधुनिक कारखानों तक ले जाया जाता है, जहां पत्तों की पिसाई कर उन्हें बिल्कुल महीन पाउडर में ढाला जाता है। इन निर्माण इकाइयों में सैलानी ऑर्गेनिक प्रोसेसिंग का पूरा तरीका करीब से समझ सकते हैं। इस दौरान आगंतुकों को ताजी तैयार हुई शुद्ध मेहंदी को अपने हाथों पर रचाने का मौका भी मिलता है, जो अपने चटख लाल रंग और प्राकृतिक महक के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी साख बना चुकी है।
सुकड़ी नदी किनारे डटा सोजत का ऐतिहासिक दुर्ग
प्राकृतिक और औद्योगिक आकर्षणों के अलावा सोजत का भव्य किला अपने भीतर गुजरे वक्त की कई गौरव गाथाएं समेटे खड़ा है। सुकड़ी नदी के तट पर एक ऊंची पहाड़ी पर बनाया गया यह किला राव जोधा के पुत्रों की देन है, जिसे आगे चलकर अलग-अलग दौर में और ज्यादा मजबूत किया गया था। अपनी ऊंची और चौड़ी प्राचीरों, खूबसूरत मेहराबों तथा पारंपरिक राजस्थानी स्थापत्य कला के लिए पहचाना जाने वाला यह दुर्ग वास्तुकला प्रेमियों के लिए एक नायाब जगह है। किले की सबसे ऊंची चोटी पर खड़े होकर देखने पर नीचे फैले पूरे सोजत शहर का विहंगम दृश्य साफ नजर आता है, जिसे देखना पर्यटकों के लिए बेहद सुकून भरा तजुर्बा साबित होता है।
आस्था और मनमोहक सूर्यास्त का संगम हैं यहां के मंदिर
धार्मिक आस्था और शांति की तलाश में निकलने वाले यात्रियों के लिए भी सोजत और उसके आस-पास का इलाका कई अहम पड़ाव पेश करता है। सोजत के ऐतिहासिक दुर्ग के भीतर स्थित अम्बा माता का प्राचीन मंदिर स्थानीय निवासियों के साथ दूर-दराज से आने वाले दर्शनार्थियों के लिए बड़ी श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। पहाड़ी की ऊंचाई पर बसे इस देवस्थान की सिर्फ धार्मिक महत्ता ही नहीं है, बल्कि शाम के वक्त यहां से ढलते सूरज का मनमोहक नजारा भी देखने को मिलता है। इस शांत और आध्यात्मिक परिवेश में कुछ पल बिताना हर किसी को मानसिक सुकून से भर देता है।
पारंपरिक बाजार में खरीदारी का अलग रोमांच
ऐतिहासिक इमारतों और खेतों के भ्रमण के बाद सोजत का मुख्य बाजार खरीदारों के लिए सबसे बेहतरीन ठिकाना बन जाता है। पारंपरिक परिवेश में रंगा यह बाजार राजस्थान के रंग-बिरंगे मिजाज को बखूबी बयां करता है। यहां पहुंचने वाले लोग विशेष जीआई टैग वाली सोजत मेहंदी के अलग-अलग उत्पाद खरीद सकते हैं। इसके अलावा यहां की दुकानों पर मारवाड़ का मशहूर बंधेज, हाथ से तैयार किए गए स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक मिठाइयों का स्वाद भी सैलानियों को खूब लुभाता है, जो सफर की यादों को हमेशा के लिए संजो देता है।


















