बाजार से खरीदी गई ताजी हरी सब्जियां जब दो या तीन दिन के भीतर ही फ्रिज में मुरझाने लगती हैं, तो यह सीधे तौर पर घरेलू बजट और खानपान की गुणवत्ता दोनों को नुकसान पहुंचाती हैं। अधिकांश लोग इसके पीछे मौसम के बदलाव या रेफ्रिजरेटर की शीतलन क्षमता को मुख्य वजह मानते हैं। असल में यह समस्या उपकरण के भीतर नमी और वायु प्रवाह के असंतुलन की वजह से पैदा होती है। रेफ्रिजरेटर में स्थापित एक साधारण स्लाइडर अथवा नॉब को सही स्थिति पर लाकर खाद्य सामग्री की ताजगी को कई दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
क्रिस्पर ड्रॉअर और आंतरिक नमी का विज्ञान
आधुनिक रेफ्रिजरेटर केवल तापमान कम करने तक सीमित नहीं होते, बल्कि उनमें विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग खंड बनाए जाते हैं। रेफ्रिजरेटर के सबसे निचले हिस्से में मौजूद दराज को क्रिस्पर ड्रॉअर कहा जाता है। इस ड्रॉअर का मुख्य उद्देश्य भीतर जमा होने वाली हवा और आर्द्रता को नियंत्रित करना है। अगर इस खंड के वायु प्रवाह को सही ढंग से व्यवस्थित किया जाए, तो पत्तेदार और कोमल सब्जियों की उम्र को बिना किसी रासायनिक उपाय के काफी हद तक बढ़ाया जा सकता है।
हरी सब्जियों के भंडारण के लिए हाई ह्यूमिडिटी सेटिंग
पालक, धनिया, लेट्यूस और अन्य पत्तेदार साग में पानी की मात्रा अधिक होती है। कम आर्द्रता वाले वातावरण में इन पत्तियों से प्राकृतिक जल तेजी से वाष्पीकृत होकर बाहर निकलने लगता है, जिसके कारण पत्तियां सूखकर सिकुड़ जाती हैं। इस प्रक्रिया को रोकने के लिए क्रिस्पर ड्रॉअर के स्लाइडर को हाई ह्यूमिडिटी स्थिति में रखना आवश्यक होता है।
जब वेंट को बंद कर दिया जाता है या हाई ह्यूमिडिटी पर सेट किया जाता है, तो ड्रॉअर के भीतर मौजूद नमी बाहर नहीं निकल पाती। इससे दराज के अंदर एक आर्द्र वातावरण तैयार होता है, जिससे पत्तेदार साग, गाजर, ब्रोकली और शिमला मिर्च जैसी हरी सब्जियां अपनी स्वाभाविक बनावट और कुरकुरापन लंबे समय तक कायम रखती हैं। हालांकि प्रत्येक निर्माता के डिजाइन में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए उपकरण के पैनल पर बने चिह्नों को समझकर ही स्लाइडर समायोजित करना चाहिए।
फलों के लिए लो ह्यूमिडिटी का चयन और गैसों का प्रभाव
फल और सब्जियों की जैविक संरचना में बुनियादी अंतर होता है, जिसके कारण उन्हें एक ही माहौल में रखना नुकसानदेह साबित होता है। कई पके हुए फल प्राकृतिक रूप से एथिलीन गैस का उत्सर्जन करते हैं। यह गैस एक प्राकृतिक उत्प्रेरक का काम करती है और पास रखी हरी सब्जियों को तेजी से पकाने तथा सड़ाने लगती है।
यदि रेफ्रिजरेटर में दो पृथक क्रिस्पर ड्रॉअर उपलब्ध हैं, तो फलों वाले खंड को लो ह्यूमिडिटी पर सेट करना चाहिए। लो ह्यूमिडिटी सेटिंग में वेंट पूरी तरह खुल जाता है, जिससे फलों द्वारा छोड़ी जाने वाली अतिरिक्त नमी और एथिलीन गैस आसानी से बाहर निकल जाती है। फलों को कम नमी और सब्जियों को अधिक नमी वाले अलग-अलग खानों में व्यवस्थित रखने से खाद्य पदार्थों की शेल्फ लाइफ स्वतः बढ़ जाती है।
आदर्श तापमान का निर्धारण और भंडारण के व्यावहारिक नियम
नमी के नियंत्रण के साथ-साथ उपकरण के समग्र आंतरिक तापमान का सही स्तर पर होना भी अनिवार्य है। संयुक्त राज्य अमेरिका के कृषि विभाग (यूएसडीए) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, घरेलू रेफ्रिजरेटर का आंतरिक तापमान 40°F यानी लगभग 4.4°C या उससे कम स्तर पर बना रहना चाहिए। तापमान इससे अधिक होने पर सूक्ष्मजीव और फफूंद तेजी से सक्रिय हो जाते हैं, जबकि अत्यधिक कम तापमान संवेदनशील पत्तियों की कोशिकाओं को जमाकर नष्ट कर सकता है।
सब्जियों को क्रिस्पर ड्रॉअर में रखने से पहले उनकी उचित तैयारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। बाजार से लाने के बाद यदि सब्जियों को धोया गया है, तो उन्हें ड्रॉअर में रखने से पूर्व पूरी तरह सुखा लेना चाहिए। बची हुई अतिरिक्त जल की बूंदें बंद वातावरण में फफूंद और सड़न का कारण बनती हैं। इसके अतिरिक्त, ड्रॉअर को क्षमता से अधिक ठूंसने से बचना चाहिए, ताकि ठंडी हवा का संचार हर कोने तक समान रूप से हो सके। पुरानी या गली हुई सब्जियों को नई सामग्री से तुरंत अलग कर देना चाहिए और ड्रॉअर की नियमित स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए।

















