स्मार्ट वियरेबल तकनीक के क्षेत्र में एक नए प्रयोग को लेकर उत्सुकता के बीच इटरनल के प्रमुख दीपिंदर गोयल ने आने वाले डिवाइस टेंपल से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को सार्वजनिक किया है। सोशल मीडिया मंच एक्स पर उपयोगकर्ताओं की शंकाओं का समाधान करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उपकरण मानवीय विचारों को पढ़ने की क्षमता नहीं रखता है। इसमें स्वास्थ्य निगरानी के लिए फोटोप्लेथिस्मोग्राफी यानी पीपीजी तकनीक का प्रयोग किया गया है, जो ऐपल वॉच जैसे लोकप्रिय स्मार्ट वियरेबल उत्पादों में भी देखने को मिलती है।
मन की बात को टेक्स्ट में बदलने की तकनीक पर स्थिति
इस डिवाइस को लेकर तकनीकी जगत में सबसे ज्यादा चर्चा विचार को सीधे टेक्स्ट में बदलने यानी थॉट्स-टू-टेक्स्ट तकनीक की संभावनाओं पर हो रही थी। दीपिंदर गोयल ने इस पर स्पष्ट राय देते हुए बताया कि इंसानी सोच को सीधे शब्दों में दर्ज करने वाली प्रणाली को वास्तव में विकसित होने में अभी कई साल का लंबा वक्त लगेगा। उन्होंने संकेत दिया कि यह सुविधा तत्काल नहीं मिलेगी, बल्कि कंपनी इसे उत्पाद के तीसरे या चौथे संस्करण में लाने की दिशा में काम कर सकती है। वर्तमान में इस तरह की उन्नत तकनीक पर केवल शुरुआती शोध का काम चल रहा है।
चश्मे और नींद के दौरान उपयोग का आरामदायक डिजाइन
टेंपल डिवाइस के शारीरिक ढांचे को काफी बारीक और हल्का रूप दिया गया है, ताकि उपयोगकर्ताओं को रोजमर्रा की गतिविधियों में असुविधा न हो। दीपिंदर गोयल ने जानकारी दी कि इसका आकार इतना पतला रखा गया है कि नजर या धूप का चश्मा पहनने वाले लोग भी इसे बिना किसी अड़चन के अपने चश्मे के नीचे पहन सकेंगे। अक्सर वियरेबल गैजेट्स और चश्मे का एक साथ उपयोग करना सिर या कान के पास असहजता पैदा करता है, जिससे यह डिजाइन निजात दिला सकता है।
इसके अलावा सोते वक्त भी इस उपकरण के इस्तेमाल को ध्यान में रखा गया है। रात को करवट बदलते समय अथवा तकिए पर सिर दबाने के दौरान भी यह गैजेट अपनी निर्धारित जगह से फिसलेगा नहीं। इसका बाहरी ढांचा काजू के आकार जैसा बनाया गया है। इस बनावट की वजह से यह चेहरे पर बहुत छोटा प्रतीत होता है, जबकि सेंसर के काम करने के लिए आवश्यक सतह क्षेत्र बना रहता है। गोयल ने इसकी संरचना का जिक्र करते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में इसकी तुलना मानव कोशिका के माइटोकॉन्ड्रिया से भी की। डिवाइस के काले रंग के मॉडल को उन्होंने काफी चमकदार बताया है, जो दिखने और छूने में किसी धातु की तरह अहसास कराता है।
त्वचा की देखभाल और मेडिकल ग्रिप्स का उपयोग
चेहरे या त्वचा से सीधे संपर्क में रहने के कारण कंपनी ने इसके उपयोग के दौरान स्किन केयर से जुड़े निर्देशों पर भी जोर दिया है। उपयोगकर्ताओं को सलाह दी गई है कि टेंपल के ग्रिप्स को हमेशा पूरी तरह साफ और सूखी त्वचा पर ही चिपकाया जाए। एक बार उपकरण को सही जगह लगा लेने के बाद व्यक्ति अपनी जरूरत के अनुसार उसके ऊपर सनस्क्रीन, मॉइस्चराइजर या अन्य सौंदर्य प्रसाधनों का इस्तेमाल कर सकता है।
गोयल ने आगे बताया कि गैजेट को त्वचा पर थामे रखने वाले ग्रिप्स पूरी तरह सांस लेने योग्य और मेडिकल-ग्रेड सामग्री से तैयार किए गए हैं। स्वच्छता और बेहतर पकड़ बनाए रखने के लिए इन ग्रिप्स को प्रत्येक दो से तीन दिन में बदल लेना चाहिए। खास तौर पर उन लोगों को इसका ध्यान रखना होगा, जो बाहर की धूल, धूप या अत्यधिक पसीने के माहौल में काम करते हैं।
नाबालिगों के लिए उपयोगिता और प्री-ऑर्डर की तारीख
अठारह वर्ष से कम उम्र के किशोरों के संबंध में दीपिंदर गोयल का कहना है कि आम तौर पर इस वर्ग के लिए यह उपकरण जरूरी नहीं है। यदि कोई युवा ओलंपिक जैसी उच्च स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं की विशेष तैयारी नहीं कर रहा हो, तो सामान्य दिनों में उन्हें इसकी आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि गैजेट के भीतर ऐसा कोई भी हानिकारक तत्व नहीं है जो बढ़ते दिमाग के विकास पर प्रतिकूल असर डाले। व्यापक स्वास्थ्य लाभों के दावे के संदर्भ में उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों का अलग से मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
कंपनी अपने इस उत्पाद के प्री-ऑर्डर 1 नवंबर 2026 से आधिकारिक रूप से शुरू करने की योजना बना रही है। बाजार में इसे कुल छह आकर्षक रंग विकल्पों में पेश किए जाने की संभावना है। हालांकि कंपनी ने इस हार्डवेयर की आधिकारिक कीमत, सभी तकनीकी विनिर्देशों और बिक्री के अन्य माध्यमों का अभी अंतिम खुलासा नहीं किया है।



















