ठंड का आगमन होते ही बालों और सिर की त्वचा को अतिरिक्त हिफाजत की दरकार होती है। बालों को कंडीशन करने, कुदरती रंगत देने और पोषण पहुंचाने के लिए बड़ी संख्या में लोग पारंपरिक तौर पर मेंहदी का सहारा लेते हैं। हालांकि सर्दियों के दिनों में इस घरेलू नुस्खे को आजमाते वक्त खास सावधानी बरतना जरूरी हो जाता है, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही भी सिरदर्द, गंभीर जुकाम और बालों के अत्यधिक रूखेपन की वजह बन सकती है।
तासीर ठंडी होने से सेहत पर असर का खतरा
आयुर्वेदिक और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार मेंहदी की प्रकृति शीत यानी ठंडी मानी जाती है। इसी वजह से कम तापमान वाले मौसम में जब इसे सिर पर लगाया जाता है, तो कई लोगों को सिर में तेज ठंडक महसूस होने लगती है। जिन व्यक्तियों को पहले से साइनस, माइग्रेन या बार-बार छींकें व जुकाम होने की तकलीफ रहती है, उन्हें सर्दियों में मेंहदी लगाते वक्त बेहद चौकन्ना रहने की जरूरत होती है। लापरवाही बरतने पर सिर की ठंडक पूरे शरीर में जकड़न पैदा कर सकती है।
पेस्ट का तापमान और लगाने का सही समय
सर्दियों के महीनों में मेंहदी घोलने के बाद उसे बहुत देर तक किसी ठंडी जगह पर छोड़ देने से उसका तापमान काफी गिर जाता है। सीधे ऐसी ठंडी मेंहदी को स्कैल्प पर लगाने से शरीर को झटका लग सकता है और ठंड बैठ सकती है। इसलिए मिश्रण को हमेशा सामान्य कमरे के तापमान पर ही रखें और बहुत ठंडे हो चुके पेस्ट को सिर पर लगाने से पूरी तरह बचें।
इसके अलावा मेंहदी लगाने की टाइमिंग भी बेहद अहम है। सर्दियों में सुबह या धूप खिली दोपहर का समय इसके लिए सबसे मुफीद रहता है। शाम या रात के समय इसे लगाने की गलती कभी न करें, क्योंकि सूरज ढलने के बाद वातावरण में ठंडक बढ़ जाती है और सिर देर तक गीला रहने से बीमार पड़ने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
सिर पर रखने की अवधि और सुखाने की प्रक्रिया
गर्मियों के मौसम में लोग अक्सर मेंहदी को 3 से 4 घंटे तक बालों में लगाए रखते हैं, परंतु ठंड में यह आदत सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। गीली मेंहदी को सिर पर ज्यादा देर रखने से शरीर के आंतरिक तापमान में गिरावट आ सकती है। लिहाजा सर्दियों में 1.5 से 2 घंटे के भीतर ही बालों को साफ पानी से अच्छी तरह धो लेना चाहिए।
बाल धोने के तुरंत बाद उन्हें प्राकृतिक तरीके से अथवा हल्के हेयर ड्रायर की मदद से पूरी तरह सुखा लेना चाहिए। सर्दियों की सर्द हवा में गीले बालों के साथ बाहर निकलना न केवल सर्दी-जुकाम को दावत देता है, बल्कि बालों की जड़ों को भी कमजोर बना सकता है।
घोल में पौष्टिक तत्वों का मेल और रूखेपन से बचाव
सर्दियों में बालों का रूखा होना एक आम समस्या है। इस मौसम में मेंहदी के घोल में दही मिलाने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि दही की तासीर भी ठंडी होती है। इसके बजाय पेस्ट में एलोवेरा जेल, कच्चा अंडा, नारियल तेल या मेथी पाउडर मिलाना बेहतर विकल्प है। ये सामग्रियां बालों को भीतर से नमी प्रदान करती हैं और रूखापन दूर रखती हैं।
यदि किसी नए ब्रांड या नए तरह की मेंहदी का इस्तेमाल किया जा रहा है, तो सिर पर लगाने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना न भूलें। इससे किसी भी तरह की एलर्जी या जलन से बचाव हो जाता है। साथ ही सर्दियों में महीने में केवल एक या दो बार ही मेंहदी का प्रयोग करें, क्योंकि बार-बार इस्तेमाल से बाल जरूरत से ज्यादा बेजान और रूखे हो सकते हैं।


















