सर्दियों के दिनों में चेहरे की चमक लौटाने और रूखेपन से राहत पाने के लिए कई लोग रात को सोने से पहले चेहरे पर पेट्रोलियम जेली की मोटी परत चढ़ा रहे हैं। इस तरीके को स्लगिंग कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य रात भर त्वचा के भीतर नमी को रोककर रखना है, जिससे अगली सुबह चेहरा कोमल और चमकदार दिखे। हालांकि, यह तरीका हर व्यक्ति की त्वचा के अनुकूल नहीं बैठता। यदि त्वचा की बनावट को समझे बिना इसे आजमाया जाए, तो यह रोमछिद्रों को बंद कर मुंहासे, संक्रमण और जलन की वजह भी बन सकता है।
स्लगिंग की कार्यप्रणाली और इसका असर
स्लगिंग की प्रक्रिया में पेट्रोलियम जेली चेहरे पर एक अवरोधक कवच की तरह काम करती है। यह त्वचा की सतह से प्राकृतिक नमी को भाप बनकर उड़ने नहीं देती। जिन लोगों की त्वचा जरूरत से ज्यादा रूखी और बेजान होती है, उनके लिए यह तरीका काफी राहत भरा होता है। इससे स्किन बैरियर मजबूत होता है और त्वचा को चिकनाई मिलती है। लेकिन यही भारी परत कुछ संवेदनशील या तैलीय त्वचा वालों के लिए बंद दरवाजे की तरह काम करने लगती है, जिससे त्वचा खुलकर सांस नहीं ले पाती।
इन चार परिस्थितियों में स्लगिंग से पूरी तरह बचें
सौंदर्य विशेषज्ञों के अनुसार कुछ विशेष प्रकार की त्वचा और समस्याओं में पेट्रोलियम जेली का भारी लेप चेहरे को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है
- तैलीय और मुंहासे वाली त्वचा: यदि आपका चेहरा पहले से काफी ऑयली रहता है या बार-बार पिंपल्स निकलते हैं, तो स्लगिंग बिल्कुल न करें। वैसलीन की सघन परत त्वचा से निकलने वाले प्राकृतिक सीबम, पसीने और मृत कोशिकाओं को सतह के नीचे ही कैद कर देती है। इससे बैक्टीरिया पनपते हैं और बड़े, दर्दनाक मुंहासे फूट पड़ते हैं।
- सक्रिय तत्वों या सीरम का इस्तेमाल: जो लोग रात की दिनचर्या में रेटिनॉल, ट्रेटिनॉइन, सैलिसिलिक एसिड, ग्लाइकोलिक एसिड या विटामिन सी जैसे सक्रिय तत्वों का प्रयोग करते हैं, उन्हें इसके ऊपर पेट्रोलियम जेली नहीं थोपनी चाहिए। ऐसा करने से इन तत्वों की तीव्रता अत्यधिक बढ़ जाती है, जिससे चेहरे पर तेज जलन, लालिमा और पपड़ी जमने का खतरा रहता है।
- मिलिया की समस्या: मिलिया चेहरे पर होने वाले बारीक सफेद दानों को कहते हैं, जिनमें केराटिन भर जाता है। ये अक्सर आंखों के आसपास या गालों पर दिखाई देते हैं। पेट्रोलियम जेली जैसे भारी और घने उत्पाद केराटिन को बाहर निकलने से रोकते हैं, जिससे मिलिया के दाने और ज्यादा जिद्दी हो जाते हैं।
- खुले घाव और कोल्ड सोर का संक्रमण: अगर चेहरे पर फूटे हुए मुंहासे, कटे-छिले घाव या कोल्ड सोर जैसा कोई वायरल इंफेक्शन मौजूद है, तो उस पर भारी लेप लगाने से बचें। यह लेप बैक्टीरिया और वायरस को अंदर ही दबा देता है, जिससे संक्रमण तेजी से फैलने लगता है।
सुरक्षित और हल्के विकल्पों का चयन
यदि आपकी त्वचा स्लगिंग को बर्दाश्त नहीं कर पाती, तो नमी बरकरार रखने के लिए कई सुरक्षित विकल्प मौजूद हैं। नियासिनमाइड, हायलूरोनिक एसिड और सेंटेला एशियाटिका युक्त हल्के जेल मॉइश्चराइजर पानी जैसी ताजगी और नमी देते हैं। इसके अलावा सेरामाइड्स, स्क्वालेन और फैटी एसिड से भरपूर मॉइश्चराइजर स्किन बैरियर को भारीपन दिए बिना दुरुस्त करते हैं। चेहरे को पोषण देने के लिए मारुला ऑयल या रोजहिप सीड ऑयल की कुछ हल्की बूंदें भी एक बेहतर विकल्प साबित होती हैं।



















