मशरूम की बेहतर खेती पूरी तरह इस बात पर निर्भर करती है कि उसके लिए कंपोस्ट कैसा तैयार किया गया है। जब कंपोस्ट की गुणवत्ता उत्तम होती है, तो मशरूम की फसल भी भरपूर और स्वस्थ निकलती है। बिहार के जमुई जिले के रहने वाले शिवेंदु कुमार पिछले 4 वर्षों से मशरूम की खेती कर रहे हैं और वे इसके लिए पूरी तरह जैविक तौर-तरीके अपनाते हैं। उनका मानना है कि ज्यादा पैदावार हासिल करने की होड़ में कई उत्पादक कंपोस्ट बनाते समय तरह-तरह के रसायनों का सहारा लेते हैं, जो स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिहाज से सही नहीं है। इसके उलट, केवल भूसे की मदद से शुद्ध जैविक कंपोस्ट बनाकर भी बेहतरीन फसल ली जा सकती है, जिसमें किसी भी रासायनिक तत्व को मिलाने की जरूरत नहीं पड़ती।
रसायनों और पोल्ट्री खाद की दुर्गंध से मुक्ति
अक्सर कंपोस्ट निर्माण के दौरान कई किसान मुर्गियों की बीट का इस्तेमाल करते हैं। इससे जहां उत्पादन स्थल पर असहनीय बदबू फैल जाती है, वहीं आसपास खड़ा रहना या काम करना भी दूभर हो जाता है। इसके विपरीत जब कंपोस्ट में केवल भूसे का उपयोग किया जाता है, तो किसी प्रकार की गंदगी या बदबू नहीं फैलती। इसके अलावा भूसे से बने माध्यम में हानिकारक फंगस और फफूंद पनपने का जोखिम काफी घट जाता है। सामान्य रासायनिक खादों में कई बार खतरनाक बैक्टीरिया सक्रिय हो जाते हैं, जो पूरी मशरूम फसल को बर्बाद कर देते हैं। भूसे के प्राकृतिक कंपोस्ट में ऐसी बीमारियां नहीं लगतीं और इससे पैदा होने वाले मशरूम का स्वाद भी लाजवाब होता है, जिसे बाजार में ग्राहक हाथों-हाथ खरीदते हैं।
लागत में बड़ी बचत और जैविक शुद्धता
बाजार से खरीदे जाने वाले रासायनिक घटक और कीटनाशक काफी महंगे आते हैं, जिससे छोटे उत्पादकों की कुल खेती लागत बढ़ जाती है। केवल भूसे से कंपोस्ट तैयार करने पर यह अतिरिक्त खर्च पूरी तरह बच जाता है और उत्पादन लागत सीमित रहती है। प्राकृतिक तरीके से उगाई गई यह उपज पूरी तरह रसायन मुक्त होती है, जिसका उपभोग करने वालों के स्वास्थ्य पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता।
भूसे से कंपोस्ट तैयार करने की पूरी विधि
शिवेंदु कुमार के अनुसार शुद्ध जैविक कंपोस्ट बनाने की प्रक्रिया बेहद सरल है। इसके लिए धान अथवा गेहूं के सूखे भूसे को लगभग 2 से 3 इंच के छोटे टुकड़ों में काट लें। इन टुकड़ों को साफ पानी में पूरी तरह डुबोकर 48 घंटे के लिए छोड़ देना चाहिए, जिससे भूसा अच्छी तरह पानी सोखकर बिल्कुल नरम हो जाए। निर्धारित समय बीतने के बाद सारा अतिरिक्त पानी निकाल दें। इसके बाद भूसे को किसी भाप वाले बर्तन में रखकर भाप लगाई जाती है। भाप के तेज तापमान से भूसे में मौजूद सभी प्रकार के बैक्टीरिया और फंगस पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं। जब यह भूसा सामान्य तापमान पर ठंडा हो जाए, तो इसे अच्छी तरह फैलाकर सुखा लें। अंत में इसमें आवश्यकतानुसार थोड़ा सा चोकर या कोई जैविक खाद मिला लें। इस तरह तैयार किया गया पोषक कंपोस्ट मशरूम की बुवाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाता है।





















