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सतना की पारंपरिक बघेलखंडी स्टाइल वाली करौंदे की सब्जी की रेसिपी, जानिए कैसे बनती है यह चटपटी डिशजीवनशैली
4 सित॰ 2026, 7:56 am (9 दिन पहले)· 1

सतना की पारंपरिक बघेलखंडी स्टाइल वाली करौंदे की सब्जी की रेसिपी, जानिए कैसे बनती है यह चटपटी डिश

अगर आप रोजाना की सामान्य सब्जियों से बोर हो चुके हैं, तो बघेलखंड की पारंपरिक रसोई से करौंदे की एक बेहद चटपटी और मसालेदार रेसिपी ट्राई कर सकते हैं। इसे बनाने में बहुत कम सामग्री और सरसों के तेल का इस्तेमाल होता है।

यदि आप हर दिन बनने वाले आलू, टमाटर और अन्य साधारण व्यंजनों से उब चुके हैं और अपने भोजन में कुछ देसी तथा हटकर स्वाद ढूंढ रहे हैं, तो मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र की पारंपरिक रसोई से जुड़ा करौंदा आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। करौंदे का जिक्र आते ही ज़हन में इसके खट्टेपन का अहसास तैर जाता है, लेकिन इसी फल का इस्तेमाल करके एक बेहद तीखी और मसालेदार रेसिपी भी तैयार की जाती है। सबसे खास बात यह है कि इस व्यंजन को पकाने के लिए किसी भारी-भरकम साजो-सामान या लंबी मेहनत की आवश्यकता नहीं होती है। जब इसे बघेलखंड के पारंपरिक तरीके से बनाया जाता है, तो सरसों के तेल और स्थानीय मसालों का मेल इसके स्वाद को पूरी तरह से बदल देता है और खाने का मजा दोगुना कर देता है।

सतना की रहने वाली अंजलि चतुर्वेदी ने इस पारंपरिक व्यंजन को बनाने की पूरी प्रक्रिया साझा करते हुए बताया कि सबसे पहले ताजे और कड़े करौंदे बाजार से ले आएं और उन्हें स्वच्छ पानी से अच्छी तरह धो लें। इसके बाद प्रत्येक करौंदे को बीच से दो टुकड़ों में विभाजित करें और इसके भीतर मौजूद बीजों को बाहर निकाल दें। इसके साथ ही अपने स्वाद के अनुसार कुछ हरी मिर्च लें और उन्हें बीच से चीरकर एक तरफ रख लें। करौंदे का प्राकृतिक खट्टापन और हरी मिर्च का तीखापन मिलकर इस सब्जी को एक विशिष्ट और अनोखा स्वाद प्रदान करते हैं। यदि आपको अत्यधिक तीखा भोजन पसंद है, तो आप मिर्च की मात्रा को अपनी पसंद के अनुसार थोड़ा और बढ़ा भी सकते हैं।

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सरसों के तेल और मसालों का तड़का

इस रेसिपी को असली देसी स्वाद देने के लिए चूल्हे या गैस पर एक लोहे या सामान्य कड़ाही चढ़ाएं और उसमें दो बड़े चम्मच शुद्ध सरसों का तेल डालकर अच्छी तरह गर्म करें। बघेलखंडी खानपान में सरसों के तेल का उपयोग विशेष रूप से किया जाता है क्योंकि यही वह मुख्य घटक है जो इस सूखी सब्जी को इसका ठेठ पारंपरिक जायका देता है। जब तेल पूरी तरह गर्म हो जाए और उसका कच्चापन निकल जाए, तब इसमें आधा चम्मच साबुत जीरा, आधा चम्मच राई, एक चौथाई चम्मच मेथी दाना और एक चुटकी हींग डाल दें। जब ये सभी तड़के के सामान तेल में चटकने लगें और इनसे सौंधी-सौंधी खुशबू उठने लगे, तो समझ लीजिए कि तड़का पूरी तरह तैयार हो चुका है।

तड़के के तैयार होते ही कड़ाही में पहले से काटकर रखी गई हरी मिर्च और तैयार किए गए करौंदे के टुकड़े डाल दें। अब इन सभी सामग्रियों को मध्यम आंच पर करीब दो मिनट तक लगातार चलाते हुए अच्छी तरह भूनें। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान करौंदों को हल्के हाथों से हिलाते रहें ताकि वे कड़ाही के तले में न लगें और तेल तथा मसालों के साथ पूरी तरह मिल जाएं। आंच को बहुत ज्यादा तेज करने की कोई आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि करौंदों को मध्यम या धीमी आंच पर धीरे-धीरे पकाने से उनका असली और बेहतर स्वाद खुलकर सामने आता है।

धीमी आंच पर पकाने की सही विधि

करौंदे और हरी मिर्च को ठीक से भूनने के बाद इसमें आधा चम्मच हल्दी पाउडर, एक चम्मच पिसा हुआ धनिया पाउडर, आधा चम्मच सौंफ का पाउडर और स्वादानुसार नमक मिला दें। अब इन सभी सूखे मसालों को भुने हुए करौंदों के साथ अच्छी तरह मिला लें ताकि हर एक टुकड़े पर मसालों की एक बेहतरीन परत चढ़ जाए और पूरी सब्जी का स्वाद एक जैसा हो। मसाले डालने के बाद कुछ पलों तक इसे लगातार चलाते रहें ताकि वे जले नहीं और करौंदे के अंदर तक रम जाएं।

जब सारे मसाले करौंदे के साथ अच्छी तरह रच-बस जाएं, तब कड़ाही को किसी ढक्कन से ढक दें और गैस की आंच को बिल्कुल धीमा कर दें। इसके बाद करौंदों को लगभग चार से पांच मिनट तक भाप और धीमी आंच पर पकने दें। बीच में एक आध बार ढक्कन उठाकर सब्जी को हल्के हाथों से चला देना बेहतर रहता है ताकि पकने की प्रक्रिया एक समान हो। जब करौंदे पूरी तरह नरम हो जाएं और मसाले उनके साथ पूरी तरह घुल-मिल जाएं, तो समझ लीजिए कि आपकी यह लजीज डिश बनकर बिल्कुल तैयार है।

गरमागरम परोसने के तरीके

करौंदे के अच्छी तरह पक जाने और मुलायम हो जाने के बाद गैस की फ्लेम को बंद कर दें और आपकी बघेलखंडी शैली की चटपटी, तीखी और मसालेदार करौंदे की सब्जी परोसने के लिए तैयार है। आप इस पारंपरिक व्यंजन को गरमागरम दाल और चावल के साथ परोस सकते हैं, जो इसके खट्टे-तीखे स्वाद को और बढ़ा देता है। इसके अलावा, गेहूं की ताजी रोटियों, करारी पूरियों या पराठों के साथ भी इसका स्वाद बेहद शानदार लगता है। जो लोग रोज-रोज की एक जैसी सब्जियों से बोर हो चुके हैं और अपनी थाली में कुछ अलग तथा पारंपरिक जोड़ना चाहते हैं, उनके लिए यह एक परफेक्ट रेसिपी है। कम सामग्री, बेहद आसान तरीका और देसी मसालों की खूशबू इस डिश को मध्य प्रदेश की पारंपरिक रसोई का एक नायाब हिस्सा बनाती है।

सवाल-जवाब

करौंदे की सब्जी बनाने के लिए मुख्य सामग्री क्या है?
इसके लिए ताजे करौंदे, कटी हुई हरी मिर्च, सरसों का तेल और बुनियादी मसाले जैसे हल्दी, धनिया और सौंफ पाउडर की जरूरत होती है।
इस रेसिपी में किस तेल का इस्तेमाल किया जाता है?
इस पारंपरिक व्यंजन में असली देसी स्वाद लाने के लिए विशेष तौर पर सरसों के तेल का उपयोग किया जाता है।
करौंदे को पकाने में कितना समय लगता है?
मसाले मिलाने के बाद करौंदों को धीमी आंच पर ढककर करीब 4 से 5 मिनट तक पकाया जाता है।
इस सब्जी को किसके साथ परोसा जा सकता है?
इसे गरमागरम दाल-चावल के साथ-साथ पूरी और पराठों के साथ भी परोसा जा सकता है।
तीखापन बढ़ाने के लिए क्या किया जा सकता है?
आप अपने स्वाद के अनुसार बीच से चीरी गई हरी मिर्च की मात्रा को बढ़ा सकते हैं।
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