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शादी की खरीदारी में कुंदन के गहने चुनते समय असली और मिलावटी सेट की ऐसे करें पहचानजीवनशैली
19 सित॰ 2026, 11:39 pm (39 दिन पहले)· 2

शादी की खरीदारी में कुंदन के गहने चुनते समय असली और मिलावटी सेट की ऐसे करें पहचान

शाही और पारंपरिक लुक के लिए मशहूर कुंदन गहनों की मांग शादियों में खूब रहती है, लेकिन बाजार में नकली सेट की भरमार के बीच शुद्धता जांचना बेहद जरूरी है।

भारतीय वैवाहिक समारोहों में पारंपरिक आभूषणों की बात हो तो पीली धातु के साथ ही कुंदन के गहनों का क्रेज हमेशा शीर्ष पर रहता है। विवाह के पावन अवसर पर वधू को एक गरिमामयी और राजसी स्वरूप देने के लिए कुंदन के हार तथा संपूर्ण सेट को सबसे पहली प्राथमिकता दी जाती है। इस आभूषण की विशिष्टता इसकी मनमोहक बनावट, महीन नक्काशी और बीच में जड़े रंग-बिरंगे बहुमूल्य पत्थरों से झलकती है। इस ऐतिहासिक आभूषण कला की शुरुआत मुगल काल के दौरान मानी जाती है, जब शुद्ध सोने के आधार में नायाब रत्नों को बहुत ही कलात्मक ढंग से जड़ा जाता था। सदियां बीत जाने के बाद भी अपनी उसी राजसी भव्यता के दम पर यह कला आज भी आधुनिक दुल्हनों के बीच बेहद लोकप्रिय है।

बाजार में नकली गहनों की भरमार और शुद्धता की चुनौती

कुंदन की लगातार बढ़ती लोकप्रियता के कारण वर्तमान दौर के बाजार में कम गुणवत्ता वाले और नकली कुंदन सेट का अंबार लग चुका है। साधारण दिखने वाले आर्टिफिशियल सेट को भी इस तरह तराशा जाता है कि सामान्य ग्राहक असली और नकली के अंतर को समझ नहीं पाते। यदि आप भी परिणय सूत्र में बंधने जा रहे हैं और शादी की खरीदारी के लिए एक शानदार कुंदन हार लेने का मन बना रहे हैं, तो खरीदारी की मेज पर जाने से पूर्व इसकी वास्तविकता परखने के महत्वपूर्ण पहलुओं को भलीभांति जान लेना चाहिए।

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प्रमाणिकता की गारंटी के लिए हॉलमार्क और लैब सर्टिफिकेट

कुंदन के पारंपरिक आभूषण खरीदते समय सबसे पहला कदम धातु पर हॉलमार्क और साथ मिलने वाले प्रामाणिकता सर्टिफिकेट की जांच करना होना चाहिए। एक प्रतिष्ठित और विश्वसनीय आभूषण विक्रेता हमेशा अपने गहनों की शुद्धता, इस्तेमाल किए गए बेस मेटल और पत्थरों के विवरण से जुड़ा आधिकारिक प्रमाणपत्र ग्राहक को सौंपता है। यदि कोई विक्रेता ऐसा दस्तावेज देने से हिचकिचाता है, तो ऐसे आभूषण की गुणवत्ता पर संदेह होना स्वाभाविक है।

जड़े गए रत्नों और पत्थरों की बनावट पर गौर करें

एक असली और पारंपरिक कुंदन आभूषण में हमेशा उच्च गुणवत्ता वाले और बेदाग रत्नों का प्रयोग किया जाता है। आभूषण हाथ में लेते ही पत्थरों की सतह को रोशनी में बहुत बारीक नजर से देखना चाहिए। पत्थरों के भीतर किसी तरह की महीन दरार, खरोंच, टूट-फूट या कोई खुरदरापन बिल्कुल नहीं दिखना चाहिए। उत्कृष्ट डिजाइनों में आज भी पन्ना, नीलम और हीरे जैसे दुर्लभ रत्नों की जड़ाई की जाती है, जो पूरे हार को बेहद आकर्षक और बेशकीमती लुक प्रदान करते हैं।

कारीगरी की सफाई और आभूषण का पिछला हिस्सा

कुंदन की वास्तविक पहचान उसके बेहद बारीक और सधे हुए शिल्प कौशल में छिपी होती है। कारीगर जब पत्थरों को जड़ते हैं, तो उनकी सेटिंग इतनी सटीक होती है कि दो पत्थरों के बीच में रत्ती भर भी खाली स्थान नजर नहीं आता। केवल सामने की चमक देखकर आभूषण का चुनाव न करें, बल्कि हार को पलटकर उसके पिछले हिस्से की फिनिशिंग भी बारीकी से जांचें। पीछे की कारीगरी में भी चमकदार सफाई और सही बनावट होनी चाहिए। यदि आभूषण का पिछला भाग अधूरा, असमान या घटिया काम दर्शाता है, तो उसे खरीदने से सीधे इनकार कर दें।

आभूषण का वजन और बहुत सस्ते ऑफर्स का सच

हल्के और नकली आभूषणों की तुलना में वास्तविक कुंदन सेट वजन में काफी भारी महसूस होता है। इसका स्वाभाविक कारण यह है कि पत्थरों को गहराई से टिकाने के लिए उनके आधार में शुद्ध सोने या चांदी की कई सघन परतों की पन्नी का उपयोग किया जाता है। यदि कोई कुंदन सेट हाथ में उठाने पर असामान्य रूप से बहुत हल्का लग रहा है, तो समझ लीजिए कि उसमें प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता घटिया है। हमेशा पूरी पड़ताल के बाद ही किसी जाने-माने ब्रांड या पारिवारिक भरोसेमंद जौहरी से खरीदारी करें। बाजार में मिलने वाले अत्यधिक सस्ते दामों और भ्रामक छूट वाले विज्ञापनों के झांसे में न आएं, क्योंकि अत्यंत कम कीमत का सीधा अर्थ गुणवत्ता और असलियत के साथ समझौता होना होता है।

सवाल-जवाब

कुंदन आभूषणों की ऐतिहासिक शुरुआत किस दौर से मानी जाती है?
कुंदन आभूषणों की शुरुआत मुगल काल के दौरान हुई थी, जब शुद्ध सोने में बहुमूल्य पत्थरों को जड़कर शाही गहने बनाए जाते थे।
असली कुंदन ज्वेलरी खरीदते समय सबसे पहले क्या देखना चाहिए?
खरीदते समय सबसे पहले धातु पर हॉलमार्क और जौहरी से आभूषण की गुणवत्ता का आधिकारिक सर्टिफिकेट मांगना चाहिए।
असली कुंदन सेट हाथ में उठाने पर भारी क्यों महसूस होता है?
असली कुंदन में पत्थरों के नीचे सोने या चांदी की कई सघन परतों की पन्नी लगाई जाती है, जिससे इसका वजन नकली सेट से अधिक होता है।
कुंदन के आभूषण में पत्थरों की जांच कैसे करनी चाहिए?
पत्थरों में किसी प्रकार की दरार, खरोंच या टूट-फूट नहीं होनी चाहिए तथा वे बिना किसी खाली जगह के बहुत सफाई से जड़े होने चाहिए।
कुंदन के हार का पिछला हिस्सा देखना क्यों जरूरी है?
असली सेट के पिछले हिस्से पर चमकदार और उच्च स्तर की फिनिशिंग होती है, जबकि अधूरा या खराब काम नकली आभूषण का संकेत है।
क्या बहुत कम दाम के कुंदन आभूषणों को खरीदना सुरक्षित है?
बहुत कम कीमत और भारी छूट वाले आभूषणों से बचना चाहिए क्योंकि अत्यधिक सस्ते दाम के पीछे गुणवत्ता और असलियत से समझौता होता है।
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