अक्सर घरों में दोपहर या सुबह बनाई गई रोटियां शाम का नाश्ता या रात का भोजन आते-आते कड़क और सूखी हो जाती हैं। कई बार रोटियों के किनारे इतने सख्त हो जाते हैं कि उन्हें चबाना भी मुश्किल महसूस होने लगता है। अगर आप भी इस समस्या से परेशान रहते हैं, तो आटा गूंथने से लेकर रोटियों के रखरखाव में कुछ बेहद आसान बदलाव करके अपनी चपातियों को लंबे समय तक रुई जैसी नरम और फ्रेश बनाए रख सकते हैं।
आटा गूंथते समय अपनाएं ये खास तरीके
नरम और ताजी रोटियां बनाने की नींव आटा तैयार करते समय ही रख दी जाती है। अगर आटा सही तरीके से नहीं गूंथा गया है, तो पकाने के बाद रोटियां बहुत जल्दी सूखकर कड़क हो जाती हैं।
गुनगुने दूध या दही का प्रयोग: आटा गूंथते समय सामान्य पानी के बजाय हल्का गुनगुना दूध इस्तेमाल करें। इसके अलावा आप आटे में 1-2 चम्मच ताजा दही भी मिला सकते हैं। दूध और दही में मौजूद पोषक तत्व और प्राकृतिक चिकनाई आटे के रेशों को मुलायम बनाते हैं, जिससे रोटियां घंटों बाद भी कड़क नहीं होतीं।
थोड़ा सा घी या तेल मिलाएं: आटा गूंथते वक्त उसमें एक छोटा चम्मच देसी घी या तेल डालना बहुत फायदेमंद रहता है। यह आटे में नमी को लॉक करने का काम करता है।
नरम आटा और 15-20 मिनट का आराम: रोटियों के लिए बहुत सख्त आटा कभी न गूंथें। सख्त आटे से बनी रोटी ठंडी होने के बाद तुरंत कड़ी हो जाती है। आटे को हमेशा थोड़ा लचीला और नरम गूंथें। आटा तैयार करने के बाद उसे 15-20 मिनट के लिए किसी गीले सूती कपड़े से ढककर सेट होने के लिए छोड़ दें। इससे आटे में मौजूद ग्लूटेन अच्छे से सेट हो जाता है।
रोटियों को स्टोर करने का सही तरीका
रोटी सेकने के बाद उसे किस तरह रखा जा रहा है, इसका सीधा असर उसकी ताज़गी पर पड़ता है। गलत बर्तन या गलत तरीके से रखने पर रोटियां भाप के पानी से गीली या फिर एकदम सूखी हो जाती हैं।
सूती या मलमल के कपड़े का इस्तेमाल: गर्म रोटियों को कभी भी सीधे स्टील के डिब्बे या हॉट पॉट में न रखें। डिब्बे के तल में सबसे पहले सूती या मलमल का साफ कपड़ा बिछाएं। तवे से रोटी उतारने के बाद उसे कपड़े में अच्छी तरह लपेटकर रखें। ऐसा करने से भाप की बूंदें रोटियों को गीला नहीं करेंगी और कपड़ा अतिरिक्त नमी को सोखकर रोटियों को नरम रखेगा।
हल्का घी या मक्खन लगाएं: अगर आपको सुबह बनी रोटियां शाम तक चलानी हैं, तो सेकने के तुरंत बाद उन पर हल्का देसी घी या बटर लगा देना चाहिए। घी रोटी की ऊपरी सतह पर एक सुरक्षात्मक परत बना देता है। इससे रोटी के अंदर की प्राकृतिक नमी बाहर नहीं निकल पाती और वह लंबे समय तक ताजी बनी रहती है।
एल्युमिनियम फॉयल और एयरटाइट कंटेनर: अगर आपके पास कैसरोल उपलब्ध नहीं है, तो आप एल्युमिनियम फॉयल का सहारा ले सकते हैं। रोटियों को पहले सूती कपड़े में लपेटें और फिर ऊपर से फॉयल पेपर में पैक करके किसी एयरटाइट कंटेनर में बंद कर दें। यह तरीका रोटी के तापमान और नमी दोनों को लंबे समय तक बरकरार रखता है।
ठंडी रोटियों को दोबारा गर्म करने की सही विधि
शाम के समय बची हुई ठंडी रोटियों को दोबारा गर्म करते समय थोड़ी सी सावधानी बरतनी जरूरी है, ताकि वे दोबारा ताजी जैसी नरम हो जाएं।
तवे पर गर्म करना: ठंडी रोटी को तवे पर रखते समय उस पर पानी की कुछ बूंदें छिड़कें या फिर हल्का सा घी लगाकर धीमी आंच पर गर्म करें। पानी की नमी से रोटी दोबारा सॉफ्ट हो जाती है।
माइक्रोवेव का उपयोग: अगर आप रोटियों को माइक्रोवेव में गर्म कर रहे हैं, तो रोटी को एक हल्के गीले पेपर टॉवल में लपेटें। इसके बाद माइक्रोवेव को केवल 10-15 सेकेंड के लिए चलाएं। इससे आपकी बासी या ठंडी रोटी तुरंत एकदम ताजी और सॉफ्ट हो जाएगी।



















