वॉशिंग मशीन से निकालने के तुरंत बाद भी अगर तौलिये से सीलन या पसीने जैसी गंध आए, तो जरूरी नहीं कि गलती तौलिये की गंदगी में हो. ज्यादातर मामलों में असली वजह धोने का तरीका और वॉशिंग मशीन से जुड़ी कुछ रोजमर्रा की आदतें होती हैं. तौलिया मोटा और पानी सोखने वाला कपड़ा होता है, इसलिए इसमें नमी और बैक्टीरिया आसानी से टिक जाते हैं, अगर धुलाई और सुखाने के तरीके में थोड़ी भी चूक हो जाए.
गीले तौलिये को मशीन में देर तक भूल जाना
वॉश साइकिल खत्म होने के बाद भी बहुत से लोग तौलिया और बाकी कपड़े घंटों तक मशीन के अंदर ही छोड़ देते हैं. बंद मशीन के अंदर हवा नहीं पहुंचती और नमी बनी रहती है, यही माहौल बैक्टीरिया और फफूंद जैसे सूक्ष्मजीवों के पनपने के लिए एकदम सही होता है. इसी वजह से धुला हुआ तौलिया भी सीलन जैसी बदबू छोड़ने लगता है. बेहतर यही है कि वॉश पूरा होते ही तौलिये को निकालकर तुरंत सुखाने के लिए फैला दिया जाए.
जरूरत से ज्यादा डिटर्जेंट डालना
ज्यादा डिटर्जेंट डालने से सफाई ज्यादा नहीं होती, बल्कि उल्टा असर होता है. तय मात्रा से ज्यादा साबुन तौलिये के रेशों के बीच फंसा रह जाता है, जिससे मशीन उसे ठीक से रिंस नहीं कर पाती. यह बचा हुआ डिटर्जेंट धीरे-धीरे बदबू का कारण बनता है, भले ही तौलिया ऊपर से साफ और सूखा दिख रहा हो. इसलिए हमेशा मशीन में डाले गए कपड़ों की मात्रा के हिसाब से ही डिटर्जेंट का इस्तेमाल करना चाहिए.
फैब्रिक सॉफ्टनर की अधिकता
फैब्रिक सॉफ्टनर तौलिये को छूने में मुलायम जरूर बना देता है, लेकिन इसकी ज्यादा मात्रा तौलिये के रेशों पर एक हल्की परत जमा कर देती है. यह परत तौलिये की पानी सोखने की क्षमता को कम कर देती है, जिससे तौलिया धोने के बाद भी ठीक से सूख नहीं पाता और नमी अंदर ही अंदर बनी रहती है. यही अधूरी सूखी नमी आगे चलकर बदबू की जड़ बन जाती है. इसलिए तौलिये के लिए फैब्रिक सॉफ्टनर सीमित मात्रा में ही इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है.
वॉशिंग मशीन की खुद अपनी सफाई न होना
बहुत बार गंदगी तौलिये में नहीं, बल्कि मशीन के अंदर ही जमा होती है. अगर मशीन के ड्रम, रबर सील या डिटर्जेंट ड्रॉअर में साबुन की परत, नमी और गंदगी जमा हो जाए, तो हर धुलाई के साथ यही गंदगी साफ किए जा रहे तौलिये तक पहुंच जाती है. फ्रंट-लोड मशीन में यह दिक्कत ज्यादा देखने को मिलती है, क्योंकि इनकी रबर सील में नमी लंबे समय तक फंसी रह जाती है. मशीन को समय-समय पर कंपनी की बताई विधि के अनुसार साफ करना चाहिए और इस्तेमाल के बाद उसका दरवाजा कुछ देर के लिए खुला छोड़ देना चाहिए, ताकि अंदर की नमी सूख सके.
तौलिये को ठीक से न सुखाना
तौलिया धोने के बाद उसे खुली और हवादार जगह पर पूरी तरह सुखाना जरूरी है. अगर तौलिया गीला या आधा सूखा रहते हुए ही मोड़कर रख दिया जाए, तो उसमें बची नमी की वजह से सीलन जैसी गंध बहुत जल्दी आने लगती है. जहां तक संभव हो, तौलिये को कुछ देर धूप में सुखाना भी फायदेमंद रहता है, क्योंकि धूप नमी सोखने के साथ बैक्टीरिया को भी कम करने में मदद करती है.
एक साथ बहुत ज्यादा तौलिये धो लेना
वॉशिंग मशीन में जरूरत से ज्यादा कपड़े भर देने पर पानी और डिटर्जेंट सभी कपड़ों तक बराबर मात्रा में नहीं पहुंच पाते. तौलिये मोटे और ज्यादा पानी सोखने वाले होते हैं, इसलिए इन्हें दूसरे कपड़ों के साथ ठूंस-ठूंसकर धोने पर सफाई और रिंसिंग, दोनों प्रभावित होती हैं. इसका नतीजा यह होता है कि तौलिया धुलने के बाद भी पूरी तरह साफ नहीं हो पाता और उसमें बदबू बनी रह जाती है.



















