रक्षाबंधन जैसे पर्वों के अवसर पर बाजारों में नारियल की बंपर आवक देखने को मिलती है, जिनका सेवन लोग खानपान और स्वास्थ्य लाभ के लिए बड़े चाव से करते हैं। हालांकि, ज्यादातर लोग पूजा या रसोई में इस्तेमाल के बाद नारियल के रेशेदार छिलकों और उसके कड़े खोल को कचरा समझकर यूं ही बाहर फेंक देते हैं। प्रकृति की इस देन में लंबे समय तक नमी को थामे रखने की अद्भुत क्षमता होती है, जो पौधों के विकास के लिए काफी मुफीद मानी जाती है। इसी खूबी के चलते आज के समय में बागवानी के शौकीन लोग इन बेकार हिस्सों का इस्तेमाल अपने घरों की छतों और बालकनी में लगे पौधों को हरा-भरा रखने के लिए कर रहे हैं।
मल्चिंग तकनीक से बचाएं पौधों की नमी
नारियल के बाहरी और रेशेदार छिलकों को छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित करके गमलों या क्यारियों की मिट्टी के ऊपर सतह पर फैलाया जा सकता है, जिसे कृषि और बागवानी की भाषा में मल्चिंग कहा जाता है। इस प्रक्रिया को अपनाने से मिट्टी के भीतर की नमी काफी लंबे समय तक सुरक्षित रहती है, जिससे पौधों में बार-बार पानी डालने की जरूरत घट जाती है। कड़कती धूप वाले गर्मी के दिनों में और मूसलाधार बरसात दोनों ही मौसम में यह तरीका पौधों के लिए वरदान साबित होता है। मल्चिंग की वजह से मिट्टी की ऊपरी परत जल्दी सूखती नहीं है और अनावश्यक खरपतवार भी पनप नहीं पाते हैं। इसके अतिरिक्त, तेज बारिश के दौरान पानी के बहाव से मिट्टी का कटाव रुक जाता है, जो शहरी इलाकों में बालकनी या छत पर बागवानी करने वालों के लिए बेहद सुविधाजनक है।
नारियल के खोल को बनाएं प्राकृतिक प्लांटर
नारियल के केवल छिलके ही नहीं बल्कि उसका मजबूत आंतरिक खोल भी छोटे पौधों के लिए बेहतरीन प्राकृतिक गमले की भूमिका निभा सकता है। इस खोल के भीतर थोड़ी उपजाऊ मिट्टी और खाद डालकर धनिया, पुदीना, तुलसी, पालक जैसी किचन में काम आने वाली हरी पत्तेदार सब्जियों के बीज आसानी से उगाए जा सकते हैं। जल निकासी को दुरुस्त रखने के लिए शेल के निचले हिस्से में एक छोटा सा छेद करना जरूरी होता है ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके और जड़ें गलने से सुरक्षित रहें। कई लोग अपनी क्रिएटिविटी दिखाते हुए इन खोलों को आकर्षक सजावटी प्लांटर्स का रूप देते हैं, जिससे घर के गार्डन का सौंदर्य कई गुना बढ़ जाता है। पौधे के बड़ा हो जाने पर उसे किसी अन्य बड़े गमले या जमीन में आसानी से स्थानांतरित किया जा सकता है।
जैविक खाद तैयार करने में छिलकों का उपयोग
यदि आपके पास नारियल के छिलकों का बड़ा जखीरा जमा हो गया है, तो आप उनका इस्तेमाल बेहतरीन जैविक खाद बनाने के लिए कर सकते हैं। इसके लिए छिलकों को छोटे हिस्सों में काटकर रसोई से निकलने वाले जैविक कचरे, सूखे पत्तों और पारंपरिक गोबर की खाद के साथ मिलाना होता है। कुछ हफ्तों या महीनों में ये सामग्रियां आपस में मिलकर पौधों के लिए जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर ऑर्गेनिक खाद में तब्दील हो जाती हैं। इस देसी खाद के प्रयोग से मिट्टी की बनावट और गुणवत्ता में सुधार होता है, साथ ही उसमें लाभकारी सूक्ष्म जीवों की संख्या भी तेजी से बढ़ती है। रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को कम करने का यह सबसे आसान, इको-फ्रेंडली और किफायती तरीका है, जिससे किचन गार्डन की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है और सब्जियों की बंपर पैदावार हासिल होती है।
अपनाते वक्त रखें कुछ जरूरी सावधानियां
किचन गार्डन में नारियल के छिलकों और शेल का इस्तेमाल करने से पहले कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है ताकि पौधों को कोई नुकसान न पहुंचे। उपयोग में लाने से पहले इन छिलकों को साफ पानी से अच्छी तरह धो लेना चाहिए ताकि उनमें मौजूद किसी भी प्रकार के नमक या अवांछित पदार्थ का असर खत्म हो जाए और धोने के बाद उन्हें धूप में सुखा लेना चाहिए। समय-समय पर गमलों में रखे गए इन छिलकों की स्थिति का जायजा लेते रहना चाहिए और जरूरत महसूस होने पर उन्हें बदल देना चाहिए। इस बेहद सरल और देसी नुस्खे को आजमाने से पौधों को प्राकृतिक आबोहवा तो मिलती ही है, साथ ही जल संरक्षण और पर्यावरण हितैषी खेती को भी बढ़ावा मिलता है।



















