आगामी करवा चौथ और दिवाली के त्योहारों को देखते हुए दिल्ली के दिल मंडी हाउस के नजदीक स्थित आगा खान हॉल में हथकरघा परिधानों की एक खास प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है। इस बाजार में पहली बार सीधे बनारस से तैयार करवाकर लाए गए प्रामाणिक बनारसी लहंगे, सलवार सूट और साड़ियों का बड़ा संग्रह बिक्री के लिए रखा गया है। त्योहारों की पारंपरिक चमक और आधुनिक सहूलियत को ध्यान में रखकर तैयार किए गए ये परिधान उन खरीदारों के लिए लाए गए हैं जो बिना अत्यधिक खर्च किए पारंपरिक रेशमी लिबास पहनना चाहते हैं।
प्रवेश निःशुल्क और तीन दिनों का सीमित समय
इस प्रदर्शनी की एक बड़ी विशेषता यह है कि आयोजकों ने आम खरीदारों के लिए प्रवेश पूरी तरह से निःशुल्क रखा है, यानी परिसर में दाखिल होने के लिए किसी भी तरह का टिकट या एंट्री फीस नहीं चुकानी होगी। बनारस से स्टॉक लेकर पहुंचे विक्रेता फरहान ने स्पष्ट किया कि वे इस हॉल में केवल तीन दिनों के लिए यह प्रदर्शनी लगा रहे हैं। खरीदार सुबह 11:00 बजे से लेकर शाम 7:00 बजे तक यहां आकर अपनी पसंद के कपड़े देख और खरीद सकते हैं। फरहान के मुताबिक समूचा स्टॉक सीधे बनारस के करघों से दिल्ली पहुंचाया गया है, क्योंकि वहां का शुद्ध रेशम और महीन बनारसी बुनाई वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान रखती है।
21 कलियों का अनस्टिच पैटर्न और बजट विकल्प
प्रदर्शनी में उपलब्ध लहंगों की प्रमुख बनावट 21 कलियों के अनस्टिच प्रारूप में तैयार की गई है। बिना सिला कपड़ा होने के कारण महिलाएं इसे अपनी शारीरिक नाप, पसंद और खास फिटिंग के हिसाब से सिलवा सकती हैं। लहंगे के मुख्य कपड़े के साथ मैचिंग दुपट्टा और ब्लाउज पीस का पूरा सेट एक साथ दिया जा रहा है। कीमत के मामले में भी हर वर्ग की जेब का ख्याल रखा गया है। स्टॉलों पर ₹2,000 की शुरुआती कीमत से लेकर ₹20,000 तक की रेंज में सूट, साड़ियां और लहंगे बिक्री के लिए रखे गए हैं। रंगों, जटिल पैटर्न और जरी के काम में व्यापक विविधता मौजूद है, जिससे ग्राहक अपनी व्यक्तिगत रुचि के अनुसार चयन कर सकते हैं।
वजन में हल्के परिधान और उत्सव की सहूलियत
करवा चौथ की पूजा और दिवाली के मेलजोल में अक्सर भारी-भरकम परिधान संभालना महिलाओं के लिए परेशानी का सबब बन जाता है। इस प्रदर्शनी के बनारसी लहंगों को इस प्रकार तैयार किया गया है कि वे दिखने में बेहद शाही और लग्जरी लगते हैं, लेकिन उनका कुल वजन पारंपरिक भारी साड़ियों और भारी लहंगों की तुलना में काफी हल्का रहता है। वजन कम होने की वजह से इन्हें पहनकर पूजा की रस्में निभाना, उठना-बैठना और रिश्तेदारों के घर आना-जाना काफी सुविधाजनक रहता है। जो महिलाएं इस फेस्टिव सीजन में कम बजट के भीतर एक शानदार और नफासत भरा पारंपरिक लुक तलाश रही हैं, उनके लिए आगा खान हॉल का यह तीन दिवसीय आयोजन एक मुफीद मंच साबित हो रहा है।























