तमिलनाडु के सरकारी छात्रावासों के दैनिक भोजन में बीफ यानी गोमांस को जोड़ने के विषय पर राज्य स्तर पर विचार-विमर्श शुरू हो गया है। राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री वन्नी अरसु ने स्पष्ट किया है कि हॉस्टलों में रहने वाले विद्यार्थियों के एक वर्ग ने खान-पान की सूची में इसे शामिल करने का आग्रह किया है। छात्रों के बीच इस मांग को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं, जिसके चलते प्रशासन से जुड़े अधिकारियों के साथ व्यापक बातचीत के उपरांत ही इस पर कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
सैदापेट स्थित छात्रावास निरीक्षण के दौरान सामने आई मांग
सामाजिक न्याय मंत्री वन्नी अरसु ने सैदापेट में संचालित एमसी राजा सोशल जस्टिस हॉस्टल का दौरा किया और वहां छात्रों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का जायजा लिया। इस निरीक्षण के दौरान मंत्री ने बताया कि सरकारी छात्रावासों की भोजन व्यवस्था को छात्रों के फीडबैक के अनुसार लगातार सुधारा जा रहा है। वर्तमान व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को मटन और चिकन दिया जाता है, जबकि प्रत्येक सोमवार को विशेष तौर पर बिरयानी परोसी जाती है।
ग्रामीण क्षेत्रों से ताल्लुक रखने वाले कुछ विद्यार्थियों ने प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा कि मटन एक महंगा विकल्प है और वे अपने सामान्य जीवन में इसका नियमित सेवन नहीं करते हैं। इसी पृष्ठभूमि में इन छात्रों ने मेन्यू में बीफ को जोड़ने का सुझाव दिया, ताकि उन्हें उनकी नियमित आदतों के अनुसार भोजन मिल सके।
छात्रों के बंटे मत और मेन्यू में हालिया बदलाव
मंत्री ने साफ किया कि छात्रावास में रहने वाले सभी विद्यार्थी इस मांग के पक्ष में एकमत नहीं हैं। भोजन सूची में बीफ को शामिल करने को लेकर छात्रों की राय स्पष्ट रूप से विभाजित है। इसी विविधता को ध्यान में रखते हुए समाज कल्याण विभाग सभी संबंधित पक्षों और अधिकारियों के साथ गहन विचार-विमर्श करेगा और उसके बाद ही कोई कदम उठाया जाएगा।
छात्रों की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर भोजन व्यवस्था में पहले भी कई सकारात्मक संशोधन किए गए हैं। उदाहरण के तौर पर, पूर्व में दिए जाने वाले उपमा और सेवई की खिचड़ी को सुबह के नाश्ते से हटा दिया गया है। विद्यार्थियों की मांग पर उनके स्थान पर अब इडली और डोसा जैसे लोकप्रिय और पारंपरिक दक्षिण भारतीय विकल्पों को नियमित नाश्ते का हिस्सा बनाया गया है।
पुथिया तमिलगम के अध्यक्ष ने जताया कड़ा विरोध
सरकारी छात्रावासों के मेन्यू में बीफ शामिल करने की संभावना पर राजनीतिक स्तर पर भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। पुथिया तमिलगम के संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. के. कृष्णासामी ने इस संभावित कदम पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने चेतावनी दी कि छात्रावासों में इस तरह का निर्णय लागू करने से गंभीर सामाजिक परिणाम सामने आ सकते हैं।
डॉ. के. कृष्णासामी ने जोर देकर कहा कि छात्रावासों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को केवल ऐसा संतुलित आहार दिया जाना चाहिए, जिसमें पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन और आवश्यक विटामिन मौजूद हों। इसके साथ ही उन्होंने सामाजिक न्याय मंत्री से इस संबंध में दिए गए अपने बयान को तुरंत वापस लेने की मांग भी उठाई है। फिलहाल राज्य सरकार ने स्पष्ट कर रखा है कि इस दिशा में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है और केवल छात्रों की मांग पर प्रशासनिक स्तर पर विचार चल रहा है।





















