त्योहारों की दस्तक के साथ ही बाजारों में सजावट की रौनक बढ़ जाती है। धनतेरस और दिवाली की तैयारी के दौरान अमूमन लोग हर साल नए दीये, आधुनिक लाइटें और महंगे सजावटी सामान खरीदने लगते हैं। हालांकि हर पर्व पर नई खरीदारी करना ही एकमात्र विकल्प नहीं होता। पिछले साल इस्तेमाल किए गए मिट्टी के दीये यदि घर में सहेज कर रखे गए हैं, तो थोड़ी सी रचनात्मकता और हल्की मेहनत के जरिए उन्हें बिल्कुल नया रूप दिया जा सकता है। बेकार समझे जाने वाले इन दीयों का पुनर्चक्रण न केवल बजट को संतुलित रखता है, बल्कि घर के हर कोने को एक अनोखा और व्यक्तिगत स्पर्श भी प्रदान करता है।
ऐक्रेलिक रंगों की मदद से दें पारंपरिक नया लुक
मिट्टी के पुराने दीयों को फिर से उपयोगी बनाने का सबसे सरल और प्रभावी उपाय उनकी रंगाई करना है। इस काम के लिए ऐक्रेलिक पेंट सबसे उपयुक्त माने जाते हैं। रंगाई शुरू करने से पहले दीयों को अच्छी तरह पानी से धोकर सुखाना जरूरी होता है ताकि उन पर जमी पुरानी कालिख या तेल पूरी तरह हट जाए। पूरी तरह सूखने के बाद उन पर सुनहरा, रूपहला, चटख लाल, पीला या कोई भी पसंदीदा आधार रंग लगाया जा सकता है। जब बेस पेंट सूख जाए, तब बारीक ब्रश के सहारे उन पर छोटी बिंदियां, बेल-बूटे, फूल-पत्तियों की आकृतियां अथवा अन्य पारंपरिक मांडना पैटर्न उकेरे जा सकते हैं। इस तरह तैयार दीयों को बालकनी की रेलिंग, खिड़कियों की चौखट और पूजा घर में कतारबद्ध रूप से सजाया जा सकता है।
शीशों, मोतियों और कुंदन वर्क से तैयार करें शाही रूप
अगर सादे दीयों को थोड़ा भव्य और शाही स्वरूप देना हो, तो शिल्प सामग्री की मदद ली जा सकती है। इसके लिए क्राफ्ट की दुकानों पर मिलने वाले छोटे कुंदन, रंगीन शीशे, मोती और लेस का उपयोग किया जा सकता है। किसी मजबूत क्राफ्ट ग्लू की मदद से दीये के बाहरी किनारों पर मोतियों की लड़ चिपकाई जा सकती है और मध्य भाग में छोटा शीशा लगाया जा सकता है। जब इन दीयों में बाती जलती है, तो शीशों और मोतियों पर पड़ने वाला प्रकाश बेहद मनमोहक चमक पैदा करता है। इस प्रकार तैयार किए गए आकर्षक दीयों को किसी सुंदर थाली में सजाकर सेंटरपीस के रूप में भी प्रयोग में लाया जा सकता है।
कांच के बर्तन और पंखुड़ियों के साथ फ्लोटिंग कैंडल का प्रबंध
कई पुराने दीये ऐसे होते हैं जिनके किनारे टूट जाते हैं या जिनमें तेल डालकर लंबे समय तक जलाना कठिन होता है। ऐसे दीयों को कांच के सजावटी बर्तनों के साथ तालमेल बिठाकर खूबसूरत फ्लोटिंग कैंडल डेकोर में बदला जा सकता है। एक चौड़े कांच के कटोरे में स्वच्छ पानी भरकर उसमें गेंदे और गुलाब की ताजी पंखुड़ियां बिखेरें। इसके बाद साफ किए गए और रंगे हुए दीयों को पानी के पात्र के बाहरी किनारों पर आकर्षक ढंग से सजाएं। पात्र के मध्य में तैरने वाली फ्लोटिंग कैंडल रखी जा सकती है। यदि किसी दीये को पानी में उतारना हो, तो पहले उसकी स्थिरता की जांच कर लेना आवश्यक है ताकि वह संतुलन न खोए।
रंगोली की रूपरेखा को दीयों के उजाले से निखारें
धनतेरस और लक्ष्मी पूजन के पावन अवसर पर मुख्य द्वार के समीप रंगोली बनाना अत्यंत शुभ माना जाता है। पहले से तैयार की गई पारंपरिक रंगों या फूलों की रंगोली के चारों ओर रंगे हुए दीये रखकर उसके पूरे आकर्षण को कई गुना बढ़ाया जा सकता है। मुख्य द्वार के फर्श पर बनाई गई डिजाइन के किनारों पर इन दीयों को रखें और उनके साथ ताजे फूलों की पंखुड़ियों तथा छोटी मोमबत्तियों का समन्वय करें। रंगों और दीयों का यह संगम घर के प्रवेश द्वार को भव्य और ऊर्जावान बना देता है।
सक्युलेंट्स और सजावटी पौधों के लिए बनाएं मिनी प्लांटर
बड़े आकार के पुराने मिट्टी के दीयों को छोटे और आकर्षक इनडोर प्लांटर्स में भी ढाला जा सकता है। इन दीयों के बाहरी हिस्से को चटख रंगों से पेंट करके उनमें थोड़ी सी उपजाऊ मिट्टी भरी जा सकती है। इसके बाद इनमें छोटे सक्युलेंट या कम पानी की जरूरत वाले सजावटी पौधे रोपे जा सकते हैं। चूंकि अधिकांश दीयों में पानी निकासी के लिए नीचे छेद नहीं होता, इसलिए अतिरिक्त नमी से पौधे को बचाने के लिए सीधे रोपण के बजाय किसी बेहद छोटे प्लास्टिक गमले को दीये के भीतर रखा जा सकता है। ये छोटे प्लांटर लिविंग रूम की मेज, खिड़की की चौखट या बालकनी में रखे जाने पर बेहद खूबसूरत दिखते हैं।
सजावटी प्लेट या लकड़ी की ट्रे से तैयार करें भव्य सेंटरपीस
कम खर्च में लिविंग रूम की मुख्य मेज को सजाने के लिए पुराने दीयों से एक शानदार सेंटरपीस तैयार किया जा सकता है। इसके लिए किसी पुरानी लकड़ी की ट्रे या धातु की सजावटी प्लेट का आधार बनाएं। उस ट्रे में रंगे और सजाए गए दीयों को करीने से रखें। दीयों के बीच खाली बची जगहों पर गेंदे के खिले हुए फूल, लाल गुलाब की पंखुड़ियां, सुनहरे मोती और बैटरी से चलने वाली छोटी लाइटें पिरोएं। यह सेंटरपीस ड्राइंग रूम के वातावरण को उत्सव के अनुकूल बना देता है और पुराने सामान के बेहतरीन उपयोग का उदाहरण पेश करता है।



















