देश के अलग-अलग नगर अपनी खास भौगोलिक और सांस्कृतिक बनावट के चलते अलग उपनामों से पहचाने जाते हैं. जैसे जयपुर को गुलाबी शहर और उदयपुर को झीलों की नगरी के रूप में जाना जाता है, वैसे ही पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता को एक खास पहचान मिली हुई है. अपनी चौड़ी सड़कों, औपनिवेशिक दौर की भव्य इमारतों, ऐतिहासिक गिरजाघरों और यूरोपीय स्थापत्य शैली के प्रभाव के कारण इस शहर को लोकप्रिय रूप से 'भारत का लंदन' कहा जाता है. पुराने समय में कलकत्ता के नाम से जाना जाने वाला यह शहर आज भी अपनी गलियों और स्मारकों में बीते दौर की झलक समेटे हुए है.
राजधानी का रुतबा और 139 साल का इतिहास
इस शहर का ब्रिटिश प्रशासन के साथ बेहद पुराना और गहरा संबंध रहा है. साल 1772 से लेकर साल 1911 तक कोलकाता ब्रिटिश भारत की आधिकारिक प्रशासनिक राजधानी बना रहा. इस 139 वर्ष के लंबे दौर में यहां शासन, बड़े पैमाने पर समुद्री और थल व्यापार के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा की महत्वपूर्ण गतिविधियां संचालित होती रहीं. हुकूमत चलाने, अधिकारियों के ठहरने और कामकाज संभालने के लिए अंग्रेजों ने यहां कई विशालकाय भवनों का निर्माण करवाया. इन संरचनाओं में यूरोपीय स्थापत्य का प्रभाव पूरी तरह दिखाई देता है, जिसने पूरे शहर के स्वरूप को लंदन जैसी आभा दी. यह उपनाम लोगों की जुबान पर चढ़ा एक लोकप्रिय संबोधन है, इसे कोई औपचारिक सरकारी उपाधि नहीं दी गई है.
सफेद संगमरमर से सजा विक्टोरिया मेमोरियल
महारानी विक्टोरिया की स्मृति में निर्मित विक्टोरिया मेमोरियल इस शहर का सबसे प्रमुख और लोकप्रिय केंद्र है. सफेद संगमरमर से तैयार की गई यह ऐतिहासिक इमारत स्थापत्य का बेजोड़ नमूना पेश करती है. इसके चारों ओर फैले विस्तृत हरे-भरे बगीचे पर्यटकों को शांति का अहसास कराते हैं, जबकि इमारत के अंदर संचालित संग्रहालय में ब्रिटिश हुकूमत के समय की कई ऐतिहासिक वस्तुएं और दस्तावेज सहेज कर रखे गए हैं. यहां आने वाले लोग औपनिवेशिक काल के भारत को करीब से समझ सकते हैं.
गोथिक शैली का सेंट पॉल कैथेड्रल
विक्टोरिया मेमोरियल के ठीक पास सेंट पॉल कैथेड्रल स्थित है, जो शहर की धार्मिक और वास्तुकला से जुड़ी अहम धरोहरों में गिना जाता है. इस गिरजाघर का निर्माण कार्य साल 1839 में शुरू हुआ था और यह साल 1847 के बीच बनकर तैयार हुआ. गोथिक शैली में निर्मित इस कैथेड्रल की ऊंची मीनारें और रंगीन कांच से सजी खिड़कियां देखने वालों को प्रभावित करती हैं. इसकी पूरी बनावट यूरोपीय गिरजाघरों के स्थापत्य से मेल खाती है.
प्रशासन का केंद्र रहीं इमारतें: राइटर्स बिल्डिंग और जनरल पोस्ट ऑफिस
शहर के बीबीडी बाग इलाके में मौजूद राइटर्स बिल्डिंग ब्रिटिश काल की प्रमुख प्रशासनिक इमारतों में शामिल है. उस दौर में यह ईस्ट इंडिया कंपनी के जूनियर कर्मचारियों यानी लेखकों के दफ्तर के रूप में उपयोग की जाती थी. इसके साथ ही शहर का जनरल पोस्ट ऑफिस अपनी विशाल गुंबददार छत और आकर्षक बाहरी बनावट के लिए जाना जाता है. ये सभी इमारतें इस तथ्य की पुष्टि करती हैं कि औपनिवेशिक काल में कोलकाता प्रशासन का एक विशाल और शक्तिशाली केंद्र हुआ करता था.
हुगली के किनारे: हावड़ा ब्रिज और प्रिंसेप घाट
कोलकाता की यात्रा हुगली नदी पर बने प्रतिष्ठित हावड़ा ब्रिज को देखे बिना पूरी नहीं मानी जाती. इस विशालकाय कैंटिलीवर पुल को रवींद्र सेतु के नाम से भी जाना जाता है, जो पूरी दुनिया में शहर का मुख्य प्रतीक चिन्ह बन चुका है. नदी के किनारे बने प्रिंसेप घाट पर शाम बिताना एक सुखद अहसास देता है. इस ऐतिहासिक घाट से हुगली नदी का विस्तार और दूसरी ओर आधुनिक विद्यासागर सेतु का विहंगम दृश्य साफ देखा जा सकता है.


















