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लाइव: IMD का ऑरेंज अलर्ट — मुंबई, ठाणे और महाराष्ट्र तट पर मानसून का कहर — 1 जुलाई 2026लाइव
1 जुल॰ 2026, 10:58 am (46 दिन पहले)· 2

लाइव: IMD का ऑरेंज अलर्ट — मुंबई, ठाणे और महाराष्ट्र तट पर मानसून का कहर — 1 जुलाई 2026

केदारनाथ धाम यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं प्रतिकूल मौसम के कारण अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दी गई हैं। रुद्रप्रयाग के जिला मजिस्ट्रेट विशाल मिश्रा ने बताया कि अगले आदेश तक सभी उड़ानें स्थगित रहेंगी। इस बीच, दक्षिण-पश्चिम मानसून गुजरात में सक्रिय हो गया है और राज्य के दक्षिणी हिस्सों में भारी बारिश व जलभराव की स्थिति बन गई है।

देश के कई हिस्सों में मानसून ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। एक तरफ उत्तराखंड में केदारनाथ धाम यात्रा को झटका लगा है, तो दूसरी तरफ गुजरात के दक्षिणी इलाकों में तेज बारिश से जनजीवन प्रभावित है। इसी बीच मुंबई, ठाणे और महाराष्ट्र के तटीय इलाकों के लिए मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिससे साफ है कि आने वाले दिनों में बारिश और तेज हो सकती है।

केदारनाथ में हेलीकॉप्टर सेवाएं ठप

केदारनाथ धाम यात्रा के लिए चलने वाली हेलीकॉप्टर सेवाएं खराब मौसम के चलते अनिश्चितकाल के लिए रोक दी गई हैं। रुद्रप्रयाग के जिला मजिस्ट्रेट विशाल मिश्रा ने साफ किया कि अगले आदेश तक कोई भी उड़ान संचालित नहीं होगी। यानी फिलहाल श्रद्धालुओं को हेलीकॉप्टर से केदारनाथ पहुंचने के लिए इंतजार करना होगा, और यह कब तक जारी रहेगा, इसकी कोई तय तारीख प्रशासन ने नहीं बताई।

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गुजरात में मानसून पूरे शबाब पर

उधर गुजरात में दक्षिण-पश्चिम मानसून सक्रिय हो चुका है। राज्य के दक्षिणी हिस्सों में भारी बारिश दर्ज की जा रही है, जिससे कई जगहों पर सड़कों और निचले इलाकों में पानी भर गया है। लगातार बारिश से आम जनजीवन पर असर पड़ा है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

मुंबई, ठाणे और महाराष्ट्र तट पर ऑरेंज अलर्ट

मौसम विभाग ने मुंबई, ठाणे और महाराष्ट्र के तटीय इलाकों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। ऑरेंज अलर्ट का मतलब होता है भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका, जिसमें प्रशासन और आम लोगों को सतर्क रहने की जरूरत होती है। मुंबई में मानसून के दौरान भारी बारिश के चलते सड़कों पर जलभराव, लोकल ट्रेन सेवाओं में देरी और यातायात जाम की स्थिति अक्सर देखी जाती रही है, ऐसे में ताजा अलर्ट के बाद प्रशासन का ध्यान शहर की जल निकासी व्यवस्था और यातायात प्रबंधन पर केंद्रित है।

आगे क्या रहेगी स्थिति

तीन अलग-अलग राज्यों, उत्तराखंड, गुजरात और महाराष्ट्र से आ रही ये खबरें बताती हैं कि मानसून इस बार पश्चिमी और मध्य भारत में तेजी से सक्रिय हो रहा है। पहाड़ी इलाकों में मौसम की खराबी हवाई सेवाओं को प्रभावित कर रही है, जबकि मैदानी और तटीय इलाकों में लगातार बारिश जलभराव और आवागमन की दिक्कतें खड़ी कर रही है। प्रशासन की तरफ से लगातार अलर्ट अपडेट किए जा रहे हैं और स्थिति में बदलाव के हिसाब से आगे की कार्रवाई तय होगी।

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  1. दक्षिण गुजरात में मानसून के साथ मूसलाधार बारिश, कई इलाकों में जलभराव; 7 जुलाई तक बरसात का अनुमान

    बुधवार को दक्षिण गुजरात के कई हिस्सों में जोरदार बारिश हुई, जिससे अनेक इलाकों में पानी भर गया। IMD ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून राज्य में और गहराई तक पहुंच गया है। सूरत, नवसारी और वलसाड जिलों के साथ-साथ सौराष्ट्र क्षेत्र के कई जिलों में भी वर्षा दर्ज की गई। IMD ने दक्षिण गुजरात के लिए 5 जुलाई तक भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिसमें कुछ स्थानों पर अत्यंत तीव्र बौछारें पड़ने की भी संभावना जताई गई है। इसके अलावा, 7 जुलाई तक राज्य के विभिन्न जिलों में व्यापक बारिश का पूर्वानुमान है। मानसून की सक्रियता से दक्षिण गुजरात और सौराष्ट्र क्षेत्र में बारिश का सिलसिला जारी है। बुधवार को वलसाड जिले के कुछ हिस्सों में विशेष रूप से भारी बरसात हुई।
  2. मुंबई महानगर क्षेत्र में मूसलाधार बारिश, पालघर के लिए रेड अलर्ट

    बुधवार को ठाणे और पालघर जिलों समेत पूरे मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में मूसलाधार बारिश ने तबाही मचाई। निचले इलाकों में जगह-जगह जलभराव हो गया, तूफानी पानी की निकासी नालियां उफान पर आ गईं और कई इलाकों में नागरिक फंसकर रह गए। प्रशासन ने पालघर जिले के लिए रेड अलर्ट घोषित किया है और अगले 24 घंटों में अत्यंत भारी वर्षा की आशंका जताई है। इसके साथ ही जिला प्रशासन ने गुरुवार को पालघर के सभी स्कूलों और कॉलेजों में अवकाश घोषित कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, ठाणे जिले में आने वाले तीन दिनों तक बहुत भारी बारिश बनी रहने की संभावना है। मंगलवार की देर रात से जारी इस बारिश ने क्षेत्र के अनेक आवासीय इलाकों में गंभीर जलभराव की स्थिति उत्पन्न कर दी।
  3. उत्तराखंड में दक्षिण-पश्चिम मानसून सक्रिय, देहरादून-बागेश्वर में ऑरेंज अलर्ट जारी

    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बुधवार को देहरादून और बागेश्वर जिलों के अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी देते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया, क्योंकि दक्षिण-पश्चिम मानसून उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों में आगे बढ़ गया। मंगलवार को मानसून राज्य के ज़्यादातर क्षेत्रों में पहुंच गया, जिससे लंबे समय से पड़ रही उमस भरी गर्मी से लोगों को काफी राहत मिली। मौसम विभाग ने बताया कि अगले एक से दो दिनों के भीतर मानसून राज्य के बाकी हिस्सों को भी कवर कर लेगा। मौसम विज्ञान केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में सबसे अधिक 98 मिमी वर्षा डांगोली में दर्ज की गई। इसके बाद क्रमशः कौसानी (80 मिमी), पिथौरागढ़ (68.3 मिमी), देहरादून (62 मिमी), बनबसा और चंपावत (61-61 मिमी), गरुड़ (60 मिमी), कालसी (50.5 मिमी), जागेश्वर (48.5 मिमी) और बागेश्वर (26.5 मिमी) का स्थान रहा।
  4. महाराष्ट्र | मानसून की देरी के बाद भी पवई झील उफनी, मुंबई के सात जलाशयों में पानी बेहद कम

    मुंबई में मूसलाधार बारिश के बीच शहर के पूर्वी उपनगरों में स्थित पवई झील 1 जुलाई की तड़के उफनने लगी। हालांकि इसी दौरान महानगर को पेयजल मुहैया कराने वाले सात जलाशयों में पानी का भंडार पिछले साल की तुलना में बेहद कम स्तर पर बना हुआ है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने जानकारी दी कि झील से पानी सुबह करीब 5:30 बजे बाहर निकलने लगा। नगर पालिका ने X पर एक पोस्ट में कहा, "545 करोड़ लीटर की जलसंग्रहण क्षमता वाली इस झील का पानी केवल औद्योगिक उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाता है।" झील का अतिरिक्त पानी माहिम पर अरब सागर में समाने वाली मीठी नदी में बहता है। पिछले साल पवई झील 19 जून को ही ओवरफ्लो हो गई थी। इस बार मुंबई में मानसून की विलंब से दस्तक ने इस घटना को पीछे धकेल दिया। पूरी तरह भर जाने पर झील का जलीय विस्तार करीब 2.23 वर्ग किलोमीटर तक फैल जाता है और इसका जलग्रहण क्षेत्र 6.61 वर्ग किलोमीटर है। BMC मुख्यालय से लगभग 27 किलोमीटर दूर स्थित इस झील का निर्माण 1890 में ₹40 लाख की लागत से हुआ था। सात जलाशयों में जल भंडार चिंताजनक रूप से कम 1 जुलाई की सुबह 6 बजे तक मुंबई को पेयजल की आपूर्ति करने वाले सात जलाशयों में कुल जलस्तर उनकी क्षमता का मात्र 7.18 प्रतिशत था, जबकि ठीक एक साल पहले 1 जुलाई 2025 को यह आंकड़ा 41.17 प्रतिशत था। मुंबई को प्रतिदिन 3,850 मिलियन लीटर (385 करोड़ लीटर) पानी भातसा, अपर वैतरणा, मिडल वैतरणा, तानसा, मोडक सागर, विहार और तुलसी झीलों से प्राप्त होता है।
  5. उत्तराखंड | IMD के तीन दिवसीय ऑरेंज अलर्ट के बाद SMS चेतावनियां भेजी गईं

    उत्तराखंड सरकार ने 1 जुलाई को भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा तीन दिनों के लिए जारी भारी वर्षा के 'ऑरेंज अलर्ट' के मद्देनज़र आपातकालीन कदम उठाते हुए राज्य के संवेदनशील और उच्च-जोखिम वाले क्षेत्रों में SMS के ज़रिए मौसम की चेतावनियां प्रसारित करना शुरू किया। आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने आगाह किया कि यदि हिमालयी क्षेत्र में मूसलाधार बारिश का सिलसिला और तेज़ हुआ तो जारी चार धाम यात्रा में श्रद्धालुओं की तादाद में भारी गिरावट आ सकती है। ANI से बातचीत में उन्होंने कहा, "IMD ने तीन दिनों के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है... जिन इलाकों में भारी वर्षा की संभावना है, वहां SMS के माध्यम से अलर्ट भेजे जा रहे हैं। चार धाम यात्रा फिलहाल जारी है, लेकिन अगर बारिश और तेज़ हुई तो तीर्थयात्रियों की संख्या निश्चित रूप से घटेगी..."
  6. हिमाचल प्रदेश | प्री-मानसून की तबाही: 128 मौतें, वित्तीय क्षति 2,984.27 लाख रुपये पहुंची

    प्री-मानसून बारिश और प्रतिकूल मौसम ने हिमाचल प्रदेश में व्यापक तबाही मचाई है — बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है और 1 मार्च से 30 जून के दौरान 128 लोगों की जान जा चुकी है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) ने 1 जुलाई 2026 को जारी अपनी ताज़ा रिपोर्ट में बताया कि कुल वित्तीय क्षति 2,984.27 लाख रुपये (करीब 29.84 करोड़ रुपये) तक जा पहुंची है। ताज़ा मौसमी मार से राज्यभर में 44 सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं, जिससे यातायात व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के मुताबिक, मंडी ज़िला सर्वाधिक प्रभावित है जहां 28 सड़कें बंद हैं, इसके बाद शिमला में 17 सड़कें ठप पड़ी हैं। राजस्व विभाग के आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ ने पुष्टि की है कि चार महीने के प्री-मानसून सीजन में मौसम से जुड़ी घटनाओं में कुल 128 लोगों की मृत्यु दर्ज की गई है।
  7. उत्तराखंड | केदारनाथ धाम यात्रा: हेलीकॉप्टर सेवाएं निलंबित, श्रद्धालुओं को घोड़े-खच्चर और पालकी पर निर्भर रहना होगा

    मानसून सीजन की दस्तक के साथ ही केदारनाथ धाम यात्रा के लिए संचालित हेलीकॉप्टर सेवाएं 1 जुलाई 2026 को रोक दी गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि विपरीत मौसम और यात्री सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह कदम उठाया गया है। यह निर्णय नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। रुद्रप्रयाग के ज़िलाधिकारी विशाल मिश्रा ने स्पष्ट किया कि तीर्थयात्रा से जुड़ी समस्त हेलीकॉप्टर उड़ानें अगले आदेश तक पूरी तरह स्थगित रहेंगी। उन्होंने कहा, "थांबी एविएशन, हिमालयन हेली, राजस एयरो, यूनाइटेड हेलीचार्टर्स, पिलग्रिमेज एविएशन, चिपसन एविएशन, ट्रांस भारत एविएशन और अन्य ऑपरेटरों के हेलीकॉप्टर निलंबन के बाद अपने-अपने बेस पर वापस लौट गए हैं। मानसून काल में तीर्थयात्रियों को घोड़े, खच्चर और पालकी जैसे वैकल्पिक परिवहन साधनों का सहारा लेना होगा। जैसे ही मौसम अनुकूल होगा और आवश्यक अनुमतियां मिलेंगी, हेलीकॉप्टर सेवाएं पुनः बहाल की जाएंगी।"
  8. हिमाचल प्रदेश के सभी हिस्सों में फैला दक्षिण-पश्चिम मानसून, सामान्य से छह दिन की देरी के बाद पूरा राज्य कवर

    दक्षिण-पश्चिम मानसून आधिकारिक तौर पर 1 जुलाई, 2026 को पूरे हिमाचल प्रदेश में सक्रिय हो गया है। इसके साथ ही इस पहाड़ी राज्य में मानसून का आगमन पूरा हो गया है, जो कि इसकी सामान्य आगमन तिथि 25 जून से छह दिन की देरी से हुआ है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून 1 जुलाई को हिमाचल प्रदेश के बचे हुए हिस्सों में भी पहुंच गया, जिससे पूरा राज्य इसके प्रभाव में आ गया है। इस ताजा चरण में मानसून ने शिमला शहर सहित शिमला जिले के शेष इलाकों, सिरमौर, मंडी, कुल्लू, लाहौल और स्पीति, तथा कांगड़ा जिलों को कवर किया। इसके अलावा इसने सोलन, ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर और चंबा जिलों के भी सभी हिस्सों को अपनी जद में ले लिया। IMD ने इससे पहले संकेत दिया था कि अगले दो से तीन दिनों में हिमाचल प्रदेश के बचे हुए हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल थीं। पूरे राज्य में मानसून के पहुंचने से आने वाले सप्ताह के दौरान व्यापक वर्षा होने की उम्मीद है। मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश में व्यापक बारिश का अनुमान जताया है, जिसमें अगले कुछ दिनों के दौरान अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही, 2 जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करने वाले एक नए पश्चिमी विक्षोभ के कारण राज्य में बारिश की गतिविधियों में और तेजी आने की संभावना है।
  9. उत्तराखंड | केदारनाथ यात्रा मार्ग पर अधिकारियों की पैनी नजर, भारी बारिश के चलते अलर्ट

    मौसम विभाग की चेतावनी के बाद रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है। मानसून की शुरुआत के साथ ही जिले के लिए अलग-अलग अवधियों के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किए गए हैं। केदारनाथ सहित जिले के कई हिस्सों में लगातार भारी बारिश हो रही है। वर्तमान मौसम की स्थिति को देखते हुए, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग कंट्रोल रूम के माध्यम से स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं। वे राष्ट्रीय राजमार्गों, केदारनाथ यात्रा मार्ग और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। इससे पहले दिन में, देहरादून स्थित IMD ने उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में अगले चार दिनों (4 जुलाई तक) के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया था, जिसके बाद जिला प्रशासन ने नागरिकों से बेहद सतर्क रहने का आग्रह किया। इस पूर्वानुमान के मद्देनजर, प्रशासन ने एहतियाती कदम के तौर पर लोगों को नदियों, बरसाती नालों और भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी है। अधिकारियों ने स्थानीय लोगों और यात्रियों से अपील की है कि वे सावधानी बरतें और भारी बारिश की इस अवधि के दौरान अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। प्रशासन का कहना है कि वे हालात पर पैनी नजर रख रहे हैं और उन्होंने लोगों से आधिकारिक मौसम बुलेटिन और चेतावनियों के माध्यम से अपडेट रहने का अनुरोध किया है।
  10. हिमाचल प्रदेश | कई नदियों और सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ा, कई रास्ते बंद

    हिमाचल प्रदेश में 1 जुलाई, 2026 को कई नदियों और उनकी सहायक नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई। ऊना जिले में स्वां नदी पूरे उफान पर बह रही थी, जिसके बाद प्रशासन ने लोगों को इसके किनारे न जाने की हिदायत दी है। राज्य आपातकालीन प्रतिक्रिया संचालन केंद्र के अनुसार, मंडी में 28 सड़कें, कुल्लू में 12 और लाहौल-स्पीति तथा ऊना जिले में दो-दो सड़कें बंद कर दी गईं। मंगलवार शाम से ही राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश दर्ज की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, कांगड़ा जिले के नगरोटा सूरियां में सबसे अधिक 102.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके बाद घमरूर में 95.2 मिमी, गुलेर में 87.2 मिमी, पालमपुर में 74.4 मिमी, सलोनी में 68.2 मिमी, जोगिंदरनगर में 48 मिमी, काहू में 44.5 मिमी, देहरा गोपीपुर में 38.3 मिमी, बरठीं में 37.4 मिमी और सुजानपुर टीरा में 36 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। राज्य के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों शिमला, मनाली और धर्मशाला में भी झमाझम बारिश हुई। इसके अलावा कुफरी, पालमपुर, कांगड़ा, सुंदरनगर, जुब्बरहट्टी और भुंतर में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की घटनाएं भी सामने आईं।
  11. भारी बारिश से हिमाचल बेहाल, सड़कें अवरुद्ध और नदियाँ उफान पर

    बुधवार (1 जुलाई, 2026) को हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश हुई, जिसमें शिमला, मनाली और धर्मशाला सबसे अधिक प्रभावित रहे। अधिकारियों ने बताया कि कई सड़कें बंद हो गईं, नदियों का जलस्तर तेज़ी से बढ़ा और बिजली आपूर्ति भी ठप हो गई। गर्मी के कारण बंद किए गए सरकारी और निजी स्कूल दोबारा खुल तो गए, लेकिन तेज़ बारिश के चलते छात्रों की उपस्थिति बेहद कम रही। दक्षिण-पश्चिम मानसून पहाड़ी राज्य में सक्रिय हो जाने के बाद राहत के कोई संकेत नज़र नहीं आ रहे। स्थानीय मौसम विभाग ने 2 जुलाई से 6 जुलाई के बीच (4 जुलाई को छोड़कर) अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
  12. इंडियन ओशन डाइपोल क्या है? जानिए वह समुद्री ताकत जो मानसून की रक्षा कर सकती है

    1997 के मानसून सीज़न में मध्य प्रशांत महासागर अपने दर्ज इतिहास के सबसे भीषण अल नीनो की गिरफ्त में था। मौसम विज्ञान के सामान्य नियमों के हिसाब से इससे भारत में एक विकराल सूखा पड़ना तय लगता था। लेकिन हुआ बिल्कुल उलटा — जून से सितंबर के बीच मानसूनी वर्षा सामान्य से करीब 2% अधिक रही और देश को अधिशेष बारिश नसीब हुई। IMD के महानिदेशक म्रुत्युंजय महापात्र ने कहा है कि यह "अब तक केवल एक बार ही हुआ है।" उस अप्रत्याशित बचाव की असली शक्ति प्रशांत महासागर में नहीं, बल्कि भारत के अपने पड़ोसी समुद्र में छिपी थी — जिसे इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) कहते हैं। यह विश्लेषण IOD के मानसून पर प्रभाव को विस्तार से समझाता है, खासकर उस समय जब मौसम विशेषज्ञ एक संभावित 'सुपर अल नीनो' की चेतावनी दे रहे हैं, और साथ ही इस समुद्री परिघटना के ऐतिहासिक महत्व को भी रेखांकित करता है।
  13. मुंबई में मूसलाधार बारिश से वेस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे पर भीषण यातायात जाम

    मुंबई में भारी बारिश के कारण सांताक्रूज़ ईस्ट स्थित वेस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे पर भीषण जाम देखा गया। लगातार बारिश की वजह से सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
  14. मंडी शहर पर घने बादल छाए, 2 और 3 जुलाई के लिए ऑरेंज अलर्ट लागू

    2 और 3 जुलाई के लिए जारी ऑरेंज अलर्ट के बीच मंडी शहर के ऊपर घने बादल छा गए हैं, जो मौसम में आ रहे बदलाव का संकेत दे रहे हैं। फिलहाल ब्यास नदी अपने सामान्य जलस्तर पर बह रही है और अभी तक न तो जलस्तर में कोई असामान्य उछाल देखा गया है और न ही बाढ़ जैसी कोई स्थिति बनी है।
  15. मुंबई, ठाणे व महाराष्ट्र के तटीय जिलों में ऑरेंज अलर्ट, IMD ने तेज बारिश की जताई आशंका

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 1 जुलाई 2026 को सुबह 10:15 बजे IST से अगले तीन घंटों के लिए मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगड, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। विभाग ने इन जिलों के छिटपुट इलाकों में मध्यम से तेज बारिश के झोंके पड़ने का अनुमान जताया है। प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को आवश्यक एहतियात बरतने की सलाह दी गई है, क्योंकि अलर्ट की अवधि के दौरान प्रतिकूल मौसम की स्थिति बने रहने की आशंका है।
  16. मुंबई के वडाला में भारी बारिश के बाद सड़कों पर जलभराव

    भारी बारिश के कारण मुंबई के वडाला इलाके में सड़कों पर जलभराव की स्थिति देखने को मिली।
  17. दिल्ली में बादल छाए रहेंगे, मध्यम बारिश का अनुमान; दोपहर में तेज हवाओं के लिए पीला अलर्ट

    बुधवार को दिल्ली का न्यूनतम तापमान 28.6℃ दर्ज हुआ। IMD ने दिन के दौरान आमतौर पर बादल छाए रहने और मध्यम बारिश होने का पूर्वानुमान जारी किया है। विभाग ने दोपहर और शाम के वक्त तेज सतही हवाएं चलने की संभावना को देखते हुए पीला अलर्ट भी जारी किया है। मौसम आंकड़ों के अनुसार पालम में न्यूनतम तापमान 26℃, लोधी रोड पर 28℃, रिज पर 24.5℃ और आयानगर में 27.4℃ रहा — ये तमाम आंकड़े मौसमी सामान्य से महज एक डिग्री के दायरे में हैं। -PTI
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