सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में एक अहम कदम उठाया है। 20 जुलाई को हुई एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान, देश की शीर्ष अदालत ने वर्तमान जांच प्रक्रिया की गहन समीक्षा की और मामले की निष्पक्ष तथा विस्तृत जांच सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन का मजबूत सुझाव दिया। अदालत का यह सीधा दखल इस बहुचर्चित मामले में उच्च स्तरीय निगरानी लाने के उद्देश्य से किया गया है, जिसने जनता का ध्यान खींचा है और जिसके कारण कई कानूनी याचिकाएं दायर की गई हैं।
जांच की स्टेटस रिपोर्ट और गिरफ्तारियां
उत्तर प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जांच से जुड़ी एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करके अदालत को नवीनतम घटनाक्रमों से अवगत कराया। अपनी दलीलों के दौरान, उन्होंने पीठ को सूचित किया कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने इस दिशा में ठोस प्रगति की है और कथित दान चोरी के सिलसिले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि, तुषार मेहता ने जांच के अन्य बारीक पहलुओं का खुलासा करने से परहेज किया। उन्होंने अदालत को स्पष्ट किया कि चूंकि जांच की प्रक्रिया अभी भी सक्रिय रूप से चल रही है, इसलिए इस मौजूदा चरण में सार्वजनिक रूप से इससे अधिक ब्यौरा साझा करना संभव या उचित नहीं होगा।
जांच प्रक्रिया पर चीफ जस्टिस के सीधे सवाल
चल रही जांच की कार्यप्रणाली को लेकर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने सीधे सवाल किए। चीफ जस्टिस ने विशेष रूप से यह जानना चाहा कि क्या कोई विशेष जांच दल (SIT) इस मामले की जमीनी स्तर पर सीधे तौर पर जांच कर रहा है। पीठ के इस सवाल के जवाब में, सॉलिसिटर जनरल ने जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस वर्तमान में दिन-प्रतिदिन की जांच कर रही है। हालांकि यह पुलिस कार्रवाई SIT की व्यापक निगरानी में की जा रही है, लेकिन SIT स्वयं मुख्य जांच एजेंसी के रूप में सीधे तौर पर जांच का संचालन नहीं कर रही है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को शामिल करने का निर्देश
वर्तमान व्यवस्था को लेकर, चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने आधिकारिक निगरानी के स्तर को बढ़ाने के लिए एक स्पष्ट निर्देश जारी किया। सॉलिसिटर जनरल को संबोधित करते हुए, CJI ने कहा, "कृपया निर्देश प्राप्त करें कि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, लखनऊ रेंज के IG, को मौजूदा SIT में सदस्य के रूप में शामिल किया जाए।" यह सख्त निर्देश सुप्रीम कोर्ट के उस इरादे को रेखांकित करता है जिसमें यह सुनिश्चित किया जाना है कि एक महत्वपूर्ण रैंक और अनुभव वाला अधिकारी जांच की निगरानी करने वाली मुख्य टीम का सीधा हिस्सा बने।
मामले को राजनीतिक रंग न देने की सख्त चेतावनी
जांच के प्रशासनिक विवरणों से परे, अदालत ने मुकदमेबाजी के इर्द-गिर्द बुने जा रहे व्यापक विमर्श को भी संबोधित किया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मामले को अदालत के समक्ष लाने वाले याचिकाकर्ताओं को सख्त हिदायत दी और उन्हें इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने के किसी भी प्रयास के खिलाफ स्पष्ट रूप से चेतावनी दी। उन्होंने राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं को महज एक "साधारण आपराधिक अपराध" करार दिया। किसी भी राजनीतिक या वैचारिक रंग को हटाकर, अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया कि इस मामले को पूरी तरह से मानक आपराधिक कानून के मापदंडों के भीतर ही देखा जाना चाहिए।
नई SIT के गठन की ओर कदम और आगामी सुनवाई
सुनवाई के आगे बढ़ने पर, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने औपचारिक रूप से इस विशिष्ट प्रकरण की जांच के लिए एक नई SIT के गठन का सुझाव दिया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस न्यायिक प्रस्ताव पर अपनी पूर्ण सहमति व्यक्त की। इसके परिणामस्वरूप, अदालत ने उन्हें निर्देश दिया कि वे इस SIT के गठन और ढांचे के विषय में उत्तर प्रदेश के DGP के साथ परामर्श प्रक्रिया शुरू करें। सुनवाई के समापन से पहले, चीफ जस्टिस ने इस एक ही मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर की गई याचिकाओं की भारी संख्या का भी संज्ञान लिया और इस अत्यधिक मुकदमेबाजी पर अपनी स्पष्ट आपत्ति जताई। पीठ ने पुष्टि की कि वह आगे की कार्यवाही तय करने से पहले प्रस्तुत की गई स्टेटस रिपोर्ट का पूरी तरह से अध्ययन करेगी, और इसी के साथ मामले को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया गया।



















