महाराष्ट्र के ठाणे जिले के डोंबिवली इलाके से कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले दस श्रद्धालुओं का एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी कोई पता नहीं चल सका है। नेपाल और चीन की सीमा पर आई भीषण बाढ़ के कारण वहां की संचार व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई थी और कई चेकपोस्ट तबाह हो गए थे, जिससे इन परिवारों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
इस आपदा के बीच केवल दो स्थानीय पर्यटक ही सुरक्षित अपने घर लौटने में कामयाब रहे हैं। इनमें प्रकाश शांताराम माने और उनकी पत्नी प्रतिभा शामिल हैं, जो किसी तरह सुरक्षित वापस पहुंच चुके हैं। हालांकि उनके साथ गए अन्य दस श्रद्धालु 26 अगस्त को तिमुरे चीनी आव्रजन जांच चौकी के पास अचानक आई बाढ़ के बाद से लापता बताए जा रहे हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में हफ्तों से संपर्क कटा होने के कारण पीड़ित परिवारों ने सरकार और प्रशासन से फौरन कदम उठाने की गुहार लगाई है।
दूसरी ओर, भारत सरकार ने आपदा प्रभावित नेपाल के लिए मदद का दायरा बढ़ाते हुए बुधवार, 2 सितंबर को पांच टन से अधिक जरूरी दवाओं की पांचवीं खेप روانه की। इस खेप के साथ 11 सदस्यों का एक विशेष बचाव दल भी नेपाल भेजा गया है ताकि राहत कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।
नेपाली अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, आपदा प्रभावित इलाकों से लगातार नए शव मिलने के कारण इस जल प्रलय में जान गंवाने वालों की कुल संख्या अब 1,243 तक पहुंच गई है। हालांकि राहत कर्मियों ने अब तक 12,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है, लेकिन व्यापक तलाश अभियानों के बावजूद लगभग 4,000 लोग अभी भी लापता हैं। विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि भारतीय वायुसेना की पांचवीं उड़ान आज काठमांडू पहुंच गई है, जिसमें एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक गोलियां, सर्जिकल उपकरण और अन्य जीवन रक्षक दवाएं शामिल हैं।
हिमालयी क्षेत्रों में लगातार हो रहे अंधाधुंध निर्माण कार्यों को इस तबाही की मुख्य वजह बताया जा रहा है। पर्यावरणविद् सुनीता नारायण ने 2 सितंबर को एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि नेपाल में आई यह अचानक बाढ़ दशकों से चली आ रही उस गलत सोच का नतीजा है जिसमें प्रकृति को अपनी मर्जी से मोड़ने की कोशिश की गई। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की महानिदेशक ने मोबियस फाउंडेशन के सम्मेलन में बोलते हुए कहा कि पहाड़ों में लगातार हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स बनाए जा रहे हैं और आज जो कुछ भी हो रहा है वह प्रकृति का गुस्सा है।
आपदा के एक हफ्ते बाद चीन ने भी हरकत में आते हुए गिरोंग सीमा बिंदु के इकलौते मार्ग को फिर से खोल दिया है, जिससे मुख्य आपदा स्थल तक भारी मशीनों का पहुंचना संभव हो गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग G216 को भारी नुकसान पहुंचने के कारण चीन को अब तक रसद और उपकरण पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल करना पड़ रहा था या बचाव दल को पैदल ही पहाड़ों को पार करना पड़ रहा था। चीनी मीडिया के अनुसार, सीमा निरीक्षण स्थल पर अब भारी मशीनरी और उपकरण तैनात कर दिए गए हैं ताकि खोज अभियानों में तेजी लाई जा सके।
इस बीच, नेपाल सरकार अपनी चीन सीमा के पास स्थित संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन पूर्व चेतावनी प्रणाली को दोबारा स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, रसुवा जिले के तिमुरे क्षेत्र में इस प्रणाली के तहत कैमरे, उपग्रह लिंक और भूकंपीय सेंसर लगाए जाएंगे ताकि भविष्य में इस तरह की आपदाओं से समय रहते सावधान किया जा सके।
बिहार में भी भारी बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं और प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी किया है। रोहतास जिले के इंद्रपुरी में स्थित सोन बैराज के सभी 69 फाटकों को पूरी तरह खोल दिया गया है ताकि पानी का दबाव कम किया जा सके और बाढ़ जैसी स्थिति को नियंत्रित रखा जा सके। जल संसाधन विभाग के अनुसार, कोसी, गंडक, गंगा और पुनपुन जैसी प्रमुख नदियां कई जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के सह-लेखक ने चेतावनी दी है कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे पहाड़ी इलाकों में ऐसी आपदाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। ऑस्ट्रिया के शोधकर्ता कार्ल-फ्रेडरिक श्लॉसनेर ने बताया कि मानवता को बढ़ते तापमान पर लगाम लगानी होगी।
इसके अलावा, नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री ने जानकारी दी है कि तिब्बत में आई इस अचानक बाढ़ की वजह से लगभग 100 नेपाली नागरिक लापता हैं। व्यापार और धार्मिक यात्रा के सिलसिले में वहां गए करीब 3,000 नागरिक फंस गए थे, जिनमें से अधिकांश लोग वापस लौट आए हैं, लेकिन केरुंग बॉर्डर पर अब भी लगभग 1,500 नेपाली नागरिक फंसे हुए हैं जिन्हें निकालने के प्रयास जारी हैं।



















