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लाइव: डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई अभी खत्म नहीं हुई है — 22 जुलाई 2026लाइव
22 जुल॰ 2026, 9:03 am (45 दिन पहले)· 1

लाइव: डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई अभी खत्म नहीं हुई है — 22 जुलाई 2026

ईरानी सेना ने जॉर्डन के अल-अज़रक बेस और बहरीन के शेख ईसा एयरबेस पर अमेरिकी फौजों को निशाना बनाने का दावा किया है, जबकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने लगातार 11वीं रात ईरान पर हमले जारी रखने की पुष्टि की। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के मुताबिक फरवरी में छिड़े इस युद्ध पर अमेरिका 37.5 अरब डॉलर फूंक चुका है।

अमेरिकी सेना ने पश्चिम एशिया में जारी महायुद्ध को और भी भयानक मोड़ देते हुए, लगातार 11वीं रात ईरान के अहम सैन्य ठिकानों पर विनाशकारी हवाई हमले किए हैं। इन हमलों ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्पष्ट संदेश दिया है कि अमेरिकी सैन्य अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि आने वाले दिनों में यह और भी ज़्यादा आक्रामक रूप ले सकता है। इस लंबी और विनाशकारी सैन्य कार्रवाई ने पूरे मध्य पूर्व में खलबली मचा दी है। पाकिस्तान में एक अंतरिम संघर्ष-विराम समझौते को बचाने के लिए जो कूटनीतिक कोशिशें चल रही थीं, इस युद्ध के कारण उन पर भी पूरी तरह से पानी फिर गया है। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि यह युद्ध अब आस-पास के देशों को भी अपनी चपेट में ले सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है और पूरे क्षेत्र का कूटनीतिक भूगोल हमेशा के लिए बदल सकता है।

रणनीतिक लक्ष्य और जलडमरूमध्य की चुनौती

अमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा जारी की गई विस्तृत सैन्य जानकारी के अनुसार, ताज़ा हवाई हमलों की योजना बेहद बारीकी से बनाई गई थी। इन रात्रिकालीन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान की हवाई ताकत को पूरी तरह से पंगु बनाना था। बमबारी के निशाने पर मुख्य रूप से बड़े ड्रोन भंडारण केंद्र और विमानों के वे हैंगर शामिल थे, जिनकी मदद से तेहरान अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करता है और जवाबी कार्रवाई को अंजाम देता है। हालांकि, पिछले डेढ़ हफ्ते से आसमान से बरस रहे इन अचूक बमों के बावजूद, पेंटागन को ज़मीनी स्तर पर कई बड़ी रणनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी नाकामी यह रही है कि अमेरिका की लगातार बमबारी होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान की मज़बूत पकड़ को कमज़ोर करने में पूरी तरह से विफल रही है। यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि युद्ध शुरू होने से पहले, दुनिया भर के कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के निर्यात का लगभग बीस प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुज़रता था। इस बेहद अहम जलमार्ग को सुरक्षित न कर पाना वॉशिंगटन की युद्ध रणनीति की सबसे बड़ी खामी साबित हो रही है। इसकी वजह से दुनिया भर के ऊर्जा बाज़ार खौफ में हैं और व्यापारिक जहाजों पर किसी भी वक्त बड़े हमले का खतरा मंडरा रहा है।

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बढ़ता आर्थिक बोझ और घरेलू स्तर पर विरोध

इस तेज़ी से फैलते युद्ध का असर अब अमेरिका के भीतर भी गहराई से महसूस किया जा रहा है। वॉशिंगटन में इस युद्ध के खिलाफ राजनीतिक विरोध और जनता का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार को रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। उन्हें एक तरफ सांसदों के तीखे सवालों के जवाब देने पड़े, तो दूसरी तरफ युद्ध की आक्रामक नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोगों के गुस्से को भी झेलना पड़ा। इन गर्मागर्म बहसों के बीच, हेगसेथ ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया। उन्होंने अनुमान लगाया कि केवल ईरान के खिलाफ छेड़े गए इस युद्ध में अमेरिका अब तक 37.5 अरब डॉलर की भारी-भरकम रकम फूंक चुका है। खजाने पर पड़ा यह भारी बोझ ऐसे वक्त में सामने आया है जब रिपब्लिकन सांसद सेना के खर्चों और व्हाइट हाउस की अन्य ज़रूरतों को पूरा करने के लिए 95 अरब डॉलर का एक नया पैकेज तैयार कर रहे हैं। हेगसेथ ने इतने बड़े खर्च को सही ठहराते हुए कहा कि युद्ध के लिए यह पूरक बजट वैश्विक स्तर पर अमेरिका की धाक बनाए रखने के लिए एक बहुत ही ज़रूरी और अहम निवेश है। इसके अलावा, उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित 1.5 ट्रिलियन डॉलर के विशाल रक्षा बजट का भी ज़ोरदार समर्थन किया और इसे अमेरिकी सेना को आधुनिक बनाने वाला एक युगांतकारी कदम बताया।

युद्ध का दायरा और बढ़ता तनाव

मंगलवार को जब ईरान की ज़मीन पर अमेरिकी बमबारी जारी थी, उसी दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आक्रामक रुख को और भी कड़ा कर लिया। उन्होंने सरेआम चेतावनी दी कि अमेरिका किसी भी सूरत में पीछे नहीं हटेगा और तेहरान के खिलाफ उसकी दंडात्मक कार्रवाई अभी खत्म नहीं हुई है। ट्रंप के इन कड़े शब्दों के साथ ही मध्य पूर्व में युद्ध का दायरा भी तेज़ी से फैल रहा है। अमेरिका के लगातार हमलों के जवाब में, ईरान ने भी अपनी आक्रामक रणनीति का विस्तार कर दिया है। तेहरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अपने समर्थित गुटों को अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमला करने की खुली छूट दे दी है। हालात तब और बिगड़ गए जब ईरान के करीबी हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के प्रमुख बंदरगाहों की पूरी तरह से नाकेबंदी करने की गंभीर धमकी दे डाली। पिछले दो हफ्तों से चले आ रहे इस भयानक संघर्ष ने ईरान के बुनियादी ढांचे को जो भारी नुकसान पहुंचाया है, उस पर बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने दुश्मन देश के भविष्य को लेकर एक खौफनाक तस्वीर पेश की। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "अगर हम इस वक्त पीछे हट जाते हैं, तो ईरान को दोबारा सब कुछ ठीक करने में 20 से 25 साल लग जाएंगे।" उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अमेरिकी सेना अपनी कार्रवाई रोकने के मूड में बिल्कुल नहीं है।

डोवर एयर बेस पर शहीदों को श्रद्धांजलि

एक तरफ जहां कूटनीतिक बयानबाज़ी और सैन्य रणनीतियां चरम पर हैं, वहीं दूसरी तरफ इस युद्ध की भयानक मानवीय कीमत आज देश के सामने होगी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज डोवर एयर फोर्स बेस पहुंचेंगे, जहां युद्ध में मारे गए सैनिकों के पार्थिव अवशेषों को पूरे सम्मान के साथ उनके परिवारों को सौंपा जाएगा। पश्चिम एशिया के इस खूनी संघर्ष में जान गंवाने वाले चार अमेरिकी सैनिकों के पार्थिव शरीरों को अंतिम विदाई देने के लिए ट्रंप खुद वहां मौजूद रहेंगे। व्हाइट हाउस ने ट्रंप के इस कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि की है और इसे सर्वोच्च सेनापति के सबसे गंभीर और हृदय विदारक कर्तव्यों में से एक बताया है। गौरतलब है कि इस साल फरवरी में ईरान के खिलाफ युद्ध का आगाज़ करने के बाद से यह तीसरा मौका है जब ट्रंप को डोवर बेस की इस शोकपूर्ण यात्रा पर जाना पड़ रहा है। यह लगातार बढ़ती संख्या इस बात का स्पष्ट संकेत है कि इस लंबे और जानलेवा युद्ध में अमेरिका को भारी जानी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

वैश्विक प्रभाव और कूटनीतिक चेतावनी

मध्य पूर्व में भड़के इस युद्ध के आर्थिक और सुरक्षा संबंधी झटके पूरी दुनिया में महसूस किए जा रहे हैं। इसे देखते हुए विदेशों में तैनात शीर्ष अमेरिकी राजनयिकों ने गंभीर चेतावनियां जारी करना शुरू कर दिया है। मनीला में आसियान देशों के विदेश मंत्रियों के साथ एक उच्च स्तरीय कूटनीतिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेते हुए, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बिगड़ते अंतरराष्ट्रीय हालात पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने दुनिया भर के देशों को आगाह किया कि अगर ईरान को होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अपना कब्ज़ा बनाए रखने दिया गया, तो यह दुनिया के लिए एक बेहद खतरनाक नज़ीर बन जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके विनाशकारी आर्थिक परिणाम केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेंगे। रूबियो का यह बयान बहुत ही सोचे-समझे वक्त पर आया, ठीक उसी समय जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान पर लगातार 11वीं रात बमबारी करने की पुष्टि की थी। इस बमबारी का मुख्य उद्देश्य इस अहम समुद्री रास्ते में व्यापारिक जहाजों को डराने की तेहरान की ताकत को कुचलना था। रूबियो ने वहां मौजूद एशियाई दूतों को चेतावनी देते हुए कहा, "अगर कोई देश किसी अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर काबिज होकर जहाजों को तबाह करता है, तो यह दुनिया के लिए एक बेहद खतरनाक मिसाल होगी।" उन्होंने यह भी चेताया कि अगर आज इस मनमानी को बर्दाश्त किया गया, तो भविष्य में दुनिया के अन्य अहम समुद्री रास्तों पर भी ऐसी ही नाकेबंदी देखने को मिल सकती है।

लेबनान की अपनी ज़मीन वापस पाने की जद्दोज़हद

जहां एक तरफ अमेरिका और ईरान का महायुद्ध दुनिया भर की सुर्खियों में छाया हुआ है, वहीं दूसरी तरफ इसी अशांत क्षेत्र में लेबनान अपनी ज़मीन पर शांति बहाल करने की एक अलग ही लड़ाई लड़ रहा है। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम अपने देश की संप्रभुता वापस पाने और सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए लगातार कूटनीतिक रास्ते तलाश रहे हैं। मंगलवार को एक अहम दौरे पर निकले प्रधानमंत्री ने देश की जनता को भरोसा दिलाया कि बेरूत की सरकार उन सभी दक्षिणी इलाकों से इज़रायली सेना की पूर्ण और बिना शर्त वापसी सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात काम कर रही है, जो अभी भी इज़रायल के कब्ज़े में हैं। अपने इस राष्ट्रव्यापी दौरे के दौरान वह ज़वतर अल-ग़रबिया भी पहुंचे। यह एक विशेष पायलट ज़ोन है जिसे हाल ही में यह साबित करने के लिए बनाया गया है कि लेबनानी राष्ट्रीय सेना सीमावर्ती इलाकों से हेज़बुल्लाह के लड़ाकों को निहत्था करने और उन्हें वहां से हटाने में पूरी तरह सक्षम है। वॉशिंगटन की मध्यस्थता से इज़रायल के साथ हुए एक जटिल कूटनीतिक समझौते में इन विशेष सुरक्षा ज़ोन को एक अहम हिस्सा माना गया है। इस समझौते का मुख्य लक्ष्य उत्तरी सीमा पर एक नया युद्ध भड़कने से रोकना है। सलाम ने वहां मौजूद लोगों से वादा करते हुए कहा, "हम दक्षिण से इज़रायल की पूरी वापसी सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक मोर्चे पर अपने प्रयास जारी रखेंगे।" चारों तरफ भड़की क्षेत्रीय आग के बीच, उनका यह बयान लेबनान की शांति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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  1. लेबनान के PM नवाफ सलाम बोले — बेरूत दक्षिण से इज़रायल की पूर्ण वापसी के लिए प्रयासरत

    लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने मंगलवार को एक गांव के दौरे पर कहा कि बेरूत उन इलाकों से इज़रायल की "पूर्ण वापसी" सुनिश्चित करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है जहां अभी भी उसका कब्जा बना हुआ है। ज़वतर अल-ग़रबिया में — जो उन कई "पायलट ज़ोन" में से एक है जहां यह साबित किया जाना है कि लेबनानी सेना हिज़बुल्लाह को निरस्त्र करने और हटाने में सक्षम है — सलाम ने कहा, "हम दक्षिण से इज़रायल की पूरी वापसी सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक मोर्चे पर अपने प्रयास जारी रखेंगे।" ये पायलट ज़ोन वॉशिंगटन की मध्यस्थता से इज़रायल के साथ हुए समझौते का अहम हिस्सा हैं।
  2. रूबियो की ASEAN को चेतावनी — होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान का कब्जा दुनिया के लिए खतरनाक नज़ीर

    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने मनीला में ASEAN देशों के विदेश मंत्रियों को आगाह किया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान का वर्चस्व पश्चिम एशिया की सीमाओं से कहीं आगे तक असर डालने वाली एक खतरनाक नज़ीर बन जाएगा। रूबियो का यह बयान तब आया जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि उसने इस अहम जलमार्ग में व्यापारिक जहाजों को खतरे में डालने की ईरान की ताकत कुंद करने के मकसद से "लगातार 11वीं रात" ईरान के भीतर सैन्य ठिकानों पर हमले किए। "अगर हम मध्य पूर्व में यह नज़ीर कायम करते हैं कि कोई देश किसी अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर काबिज होकर टोल वसूल सकता है और भुगतान न करने पर जहाज तबाह कर सकता है — तो यह एक बेहद खतरनाक मिसाल होगी जो दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी दोहराई जाएगी, इस क्षेत्र में भी," रूबियो ने ASEAN दूतों से कहा।
  3. ट्रंप डोवर एयर फोर्स बेस पहुंचेंगे, पश्चिम एशिया में मारे गए 4 अमेरिकी सैनिकों के पार्थिव अवशेषों को अंतिम सम्मान देंगे

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज डोवर एयर फोर्स बेस पहुंचेंगे, जहां पश्चिम एशिया में मारे गए चार अमेरिकी सैनिकों के पार्थिव अवशेष उनके परिवारों को सौंपे जाएंगे। व्हाइट हाउस ने बताया कि ट्रंप इस अवसर पर वहां मौजूद रहेंगे। यह समारोह किसी भी सर्वोच्च सेनापति के सबसे गंभीर और मर्मस्पर्शी कर्तव्यों में गिना जाता है। फरवरी में ईरान के खिलाफ युद्ध का आगाज करने के बाद से ट्रंप यह तीसरी बार ऐसे किसी समारोह में शिरकत करेंगे।
  4. डोनाल्ड ट्रंप ने दी चेतावनी, अमेरिका ईरान पर हमले जारी रखेगा; तेहरान ने हमलों का दायरा बढ़ाया

    मंगलवार को भी हमले जारी रहने के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई अभी "खत्म नहीं हुई" है। यह बयान तब आया है जब ईरान के सहयोगी हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के बंदरगाहों की नाकेबंदी करने की धमकी के बाद तेहरान ने खाड़ी देशों के खिलाफ अपने हमलों का दायरा बढ़ा दिया है। दोनों पुराने दुश्मनों के बीच दोबारा संघर्ष शुरू होने के दो हफ्ते बाद, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि पश्चिम एशिया युद्ध में हुए भारी नुकसान से उबरने में ईरान को 20 साल से भी अधिक का समय लगेगा। उन्होंने कहा कि अगर हम इस वक्त पीछे हट जाते हैं, तो ईरान को दोबारा सब कुछ ठीक करने में 20 से 25 साल लग जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि हम अभी पूरी तरह से रुके नहीं हैं और इस समय पीछे नहीं हट रहे हैं।
  5. रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का अनुमान, ईरान युद्ध में अमेरिका को अब तक 37.5 अरब डॉलर का खर्च आया

    ईरान के साथ जारी अमेरिकी युद्ध को लेकर मंगलवार को रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को तीखे सवालों और विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा। उन्होंने अनुमान लगाया कि इस युद्ध में अब तक 37.5 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। यह बात ऐसे समय में सामने आई है जब रिपब्लिकन सांसद सेना और व्हाइट हाउस की अन्य प्राथमिकताओं के वित्तपोषण के लिए 95 अरब डॉलर का पैकेज तैयार कर रहे हैं। पीट हेगसेथ ने कहा कि युद्ध के लिए यह पूरक बजट राशि का एक "अति आवश्यक और महत्वपूर्ण" निवेश है। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित 1.5 ट्रिलियन डॉलर के रक्षा बजट को सेना में एक युगांतकारी निवेश बताया।
  6. अमेरिकी सेना ने ईरान पर लगातार 11वीं रात भी पूरे किए हवाई हमले

    अमेरिकी सेना ने जानकारी दी कि उसने आज सुबह ईरान पर 11वीं रात के हवाई हमले पूरे कर लिए हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते हमलों के कारण पाकिस्तान में एक ढह चुके अंतरिम संघर्ष-विराम समझौते को बचाने के कूटनीतिक प्रयासों पर पानी फिरता दिख रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि हमलों के निशानों में ड्रोन भंडारण केंद्र और विमानों के हैंगर शामिल थे। यह ताज़ा हमला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस संकेत के बाद हुआ है जिसमें उन्होंने कहा था कि हवाई हमलों में और तेज़ी लाई जाएगी। अमेरिकी हमलों की इस बौछार के बावजूद, वॉशिंगटन उस जलडमरूमध्य पर ईरान के नियंत्रण को कमजोर नहीं कर पाया है, जिससे युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का निर्यात किया जाता था।

सवाल-जवाब

अमेरिका ने ईरान पर कितनी रातों तक लगातार बमबारी की है?
अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर लगातार 11 रातों तक विनाशकारी हवाई हमले पूरे कर लिए हैं।
हालिया अमेरिकी हमलों में ईरान के किन ठिकानों को निशाना बनाया गया?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इन हवाई हमलों में मुख्य रूप से ईरान के ड्रोन भंडारण केंद्रों और विमानों के हैंगरों को तबाह किया गया।
ईरान के साथ चल रहे इस युद्ध में अमेरिका अब तक कितने पैसे खर्च कर चुका है?
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने अनुमान लगाया है कि इस सैन्य अभियान पर अमेरिका अब तक 37.5 अरब डॉलर खर्च कर चुका है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य का रणनीतिक और आर्थिक महत्व क्या है?
युद्ध शुरू होने से पहले, दुनिया भर के कुल कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी अहम समुद्री रास्ते से गुज़रता था।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप डोवर एयर फोर्स बेस की यात्रा क्यों कर रहे हैं?
ट्रंप मध्य पूर्व युद्ध में जान गंवाने वाले चार अमेरिकी सैनिकों के पार्थिव अवशेषों को अंतिम सम्मान देने और उन्हें उनके परिवारों को सौंपने के लिए इस सैन्य बेस पर जा रहे हैं।
लेबनान में बनाए गए पायलट ज़ोन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
ज़वतर अल-ग़रबिया जैसे पायलट ज़ोन का लक्ष्य यह साबित करना है कि लेबनान की राष्ट्रीय सेना हेज़बुल्लाह को निरस्त्र करके वहां से हटाने में सक्षम है, ताकि इज़रायली सेना की वापसी सुनिश्चित हो सके।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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