मध्य प्रदेश के सेंधवा के जामली स्थित एकलव्य आदर्श विद्यालय के सैकड़ों छात्र-छात्राएं अपनी विभिन्न समस्याओं और गंभीर शिकायतों को लेकर बड़वानी कलेक्टर जयंती सिंह से मिलने के लिए पैदल ही कलेक्ट्रेट की ओर रवाना हो गए। इन बच्चों का मुख्य आरोप है कि शैक्षणिक संस्थान के भीतर उन्हें जरूरी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं, और इसके अलावा उन्हें जातिसूचक शब्दों से प्रताड़ित भी किया जा रहा है। इन गंभीर मुद्दों से नाराज होकर छात्र बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए और लंबा सफर तय करके अपनी बात प्रशासन तक पहुँचाने की जिद पर अड़े रहे। इस घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया और फौरन पुलिस व प्रशासनिक अमला बच्चों को समझाने के लिए मौके पर पहुँच गया।
छात्रों के इस लंबे पैदल मार्च की शुरुआत सुबह 7:00 बजे हुई थी और वे लगातार चलते हुए अब तक करीब 17 किलोमीटर का सफर तय कर चुके हैं। इतनी लंबी दूरी तय करने के बावजूद कलेक्ट्रेट पहुँचने पर जब उनकी मुलाकात कलेक्टर से नहीं हो पाई, तो बच्चों का गुस्सा और अधिक बढ़ गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेंधवा के एसडीएम, बड़वानी के एडिशनल एसपी और तीन प्रमुख थानों जिनमें सेंधवा, जुलवानिया और नांगलवाड़ी शामिल हैं, का भारी पुलिस बल मौके पर तैनात कर दिया गया। ये सभी अधिकारी और पुलिसकर्मी लगातार बच्चों को समझाने और शांत करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर पूरी तरह से अड़े हुए हैं और पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं के लिए डॉक्टर भी मौके पर तैनात
लगातार कई किलोमीटर पैदल चलने और बच्चों की बढ़ती नाराजगी तथा थकान को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और सेहत के पुख्ता इंतजाम किए हैं। सेंधवा एसडीएम आशीष के विशेष निर्देशों के बाद स्वास्थ्य विभाग की एक पूरी टीम को तुरंत मौके पर बुलाया गया ताकि जरूरत पड़ने पर छात्रों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा सके और उन्हें चिकित्सीय सहायता दी जा सके। इसके अलावा कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सेंधवा ग्रामीण थाना और नागलवाड़ी थाना पुलिस बल लगातार बच्चों के साथ मौजूद है और हालात पर कड़ी नजर बनाए हुए है।
छात्रों की प्रमुख मांगें और विरोध प्रदर्शन की वजह
जामली के एकलव्य आदर्श विद्यालय से शुरू हुए इस अनोखे और लंबे विरोध प्रदर्शन में छात्रों ने व्यवस्था के खिलाफ खुलकर अपनी बात रखी है। बच्चों का कहना है कि उन्हें हॉस्टल और स्कूल परिसर में बुनियादी जरूरतों से वंचित रखा जा रहा है, और ऊपर से जातिसूचक टिप्पणियां करके मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर बच्चों को हरसंभव आश्वासन देने की कोशिश की, लेकिन छात्र सीधे कलेक्टर से मिलकर अपनी शिकायत दर्ज कराने की मांग पर अड़े रहे। बच्चों की भारी संख्या और उनके लंबे सफर को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार मुस्तैद रही। प्रशासनिक अमला लगातार समझाइश दे रहा है, लेकिन छात्र अपनी मांगों को लेकर किसी भी समझौते के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं।
भोपाल के नीलम पार्क में शिक्षकों का धरना
दूसरी तरफ राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में शिक्षक अभ्यर्थी चार दिन से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं। ये सभी अभ्यर्थी शिक्षक भर्ती 2025 के वर्ग-2 और वर्ग-3 के अंतर्गत पदों की संख्या में बढ़ोतरी करने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल को तैनात किया गया है जो लगातार नजर रखे हुए है। इसके साथ ही, वर्ष 2023 में आयोजित शिक्षक भर्ती वर्ग-1 के एक हजार से अधिक वेटिंग अभ्यर्थी भी सड़कों पर उतरकर बड़ा विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं।





















