सिंटा विवाद: पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे ने उपासना सिंह के तानाशाही वाले आरोपों का दिया कड़ा जवाबछत्तीसगढ़ टूरिज्म की ऑनलाइन बुकिंग से पहले अलर्ट, इन जालसाजों से रहें कोसों दूरसोने की कीमतों में तेजी बरकरार, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और जैक्सन होल भाषण का इंतजारसिरोही में तीन दिन की लुकाछिपी के बाद पुलिस गिरफ्त में आया पोक्सो एक्ट का आरोपीराजस्थान निकाय चुनाव: जयपुर नगर निगम पर कब्जा जमाने के लिए कांग्रेस का 'मिशन-100', नहीं होगा किसी से गठबंधनयूरो में लगातार सुधार की उम्मीद, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पोजीशनिंग मजबूतसोने में तेजी बरकरार, सोशिए जनरल ने बताए अगले बड़े रेजिस्टेंस लेवलन्यूजीलैंड के खुदरा बिक्री आंकड़ों में गिरावट के बावजूद ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदनासा का नया स्पेस टेलीस्कोप ब्रह्मांड के अनछुए रहस्यों को सुलझाने के लिए तैयारमणिपुर के सेनापति में भड़की हिंसा, घरों में आगजनी और गोलीबारी में CRPF जवान घायल
बड़वानी में एकलव्य विद्यालय के छात्रों का लंबा पैदल मार्च, बुनियादी सुविधाओं और प्रताड़ना के खिलाफ कलेक्ट्रेट का घेरावमध्य प्रदेश
24 अग॰ 2026, 3:14 pm (2 घंटे पहले)· 2

बड़वानी में एकलव्य विद्यालय के छात्रों का लंबा पैदल मार्च, बुनियादी सुविधाओं और प्रताड़ना के खिलाफ कलेक्ट्रेट का घेराव

सेंधवा के जामली स्थित एकलव्य आदर्श विद्यालय के सैकड़ों छात्र अपनी समस्याओं और जातिसूचक प्रताड़ना के विरोध में करीब 17 किलोमीटर पैदल चलकर बड़वानी कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया।

मध्य प्रदेश के सेंधवा के जामली स्थित एकलव्य आदर्श विद्यालय के सैकड़ों छात्र-छात्राएं अपनी विभिन्न समस्याओं और गंभीर शिकायतों को लेकर बड़वानी कलेक्टर जयंती सिंह से मिलने के लिए पैदल ही कलेक्ट्रेट की ओर रवाना हो गए। इन बच्चों का मुख्य आरोप है कि शैक्षणिक संस्थान के भीतर उन्हें जरूरी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं, और इसके अलावा उन्हें जातिसूचक शब्दों से प्रताड़ित भी किया जा रहा है। इन गंभीर मुद्दों से नाराज होकर छात्र बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए और लंबा सफर तय करके अपनी बात प्रशासन तक पहुँचाने की जिद पर अड़े रहे। इस घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया और फौरन पुलिस व प्रशासनिक अमला बच्चों को समझाने के लिए मौके पर पहुँच गया।

छात्रों के इस लंबे पैदल मार्च की शुरुआत सुबह 7:00 बजे हुई थी और वे लगातार चलते हुए अब तक करीब 17 किलोमीटर का सफर तय कर चुके हैं। इतनी लंबी दूरी तय करने के बावजूद कलेक्ट्रेट पहुँचने पर जब उनकी मुलाकात कलेक्टर से नहीं हो पाई, तो बच्चों का गुस्सा और अधिक बढ़ गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेंधवा के एसडीएम, बड़वानी के एडिशनल एसपी और तीन प्रमुख थानों जिनमें सेंधवा, जुलवानिया और नांगलवाड़ी शामिल हैं, का भारी पुलिस बल मौके पर तैनात कर दिया गया। ये सभी अधिकारी और पुलिसकर्मी लगातार बच्चों को समझाने और शांत करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर पूरी तरह से अड़े हुए हैं और पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

ये भी पढ़ें

स्वास्थ्य सेवाओं के लिए डॉक्टर भी मौके पर तैनात

लगातार कई किलोमीटर पैदल चलने और बच्चों की बढ़ती नाराजगी तथा थकान को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और सेहत के पुख्ता इंतजाम किए हैं। सेंधवा एसडीएम आशीष के विशेष निर्देशों के बाद स्वास्थ्य विभाग की एक पूरी टीम को तुरंत मौके पर बुलाया गया ताकि जरूरत पड़ने पर छात्रों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा सके और उन्हें चिकित्सीय सहायता दी जा सके। इसके अलावा कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सेंधवा ग्रामीण थाना और नागलवाड़ी थाना पुलिस बल लगातार बच्चों के साथ मौजूद है और हालात पर कड़ी नजर बनाए हुए है।

छात्रों की प्रमुख मांगें और विरोध प्रदर्शन की वजह

जामली के एकलव्य आदर्श विद्यालय से शुरू हुए इस अनोखे और लंबे विरोध प्रदर्शन में छात्रों ने व्यवस्था के खिलाफ खुलकर अपनी बात रखी है। बच्चों का कहना है कि उन्हें हॉस्टल और स्कूल परिसर में बुनियादी जरूरतों से वंचित रखा जा रहा है, और ऊपर से जातिसूचक टिप्पणियां करके मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर बच्चों को हरसंभव आश्वासन देने की कोशिश की, लेकिन छात्र सीधे कलेक्टर से मिलकर अपनी शिकायत दर्ज कराने की मांग पर अड़े रहे। बच्चों की भारी संख्या और उनके लंबे सफर को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार मुस्तैद रही। प्रशासनिक अमला लगातार समझाइश दे रहा है, लेकिन छात्र अपनी मांगों को लेकर किसी भी समझौते के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं।

भोपाल के नीलम पार्क में शिक्षकों का धरना

दूसरी तरफ राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में शिक्षक अभ्यर्थी चार दिन से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं। ये सभी अभ्यर्थी शिक्षक भर्ती 2025 के वर्ग-2 और वर्ग-3 के अंतर्गत पदों की संख्या में बढ़ोतरी करने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल को तैनात किया गया है जो लगातार नजर रखे हुए है। इसके साथ ही, वर्ष 2023 में आयोजित शिक्षक भर्ती वर्ग-1 के एक हजार से अधिक वेटिंग अभ्यर्थी भी सड़कों पर उतरकर बड़ा विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं।

सवाल-जवाब

एकलव्य विद्यालय के छात्रों ने कहां से कहां तक पैदल मार्च निकाला?
छात्रों ने सेंधवा के जामली स्थित एकलव्य आदर्श विद्यालय से शुरू करके बड़वानी कलेक्टर कार्यालय तक करीब 17 किलोमीटर का पैदल मार्च निकाला।
छात्रों के मुख्य आरोप और मांगें क्या थीं?
छात्रों का आरोप था कि विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है और उन्हें जातिसूचक शब्दों से प्रताड़ित किया जा रहा है, तथा वे कलेक्टर से मुलाकात की मांग कर रहे थे।
छात्रों को समझाने के लिए कौन-से अधिकारी मौके पर पहुंचे?
सेंधवा के एसडीएम, बड़वानी के एडिशनल एसपी और तीन थानों का पुलिस बल मौके पर पहुंचकर बच्चों को समझाने का प्रयास कर रहा था।
बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए क्या कदम उठाए गए?
सेंधवा एसडीएम आशीष के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम को मौके पर बुलाया गया और सेंधवा ग्रामीण तथा नागलवाड़ी थाने की पुलिस सुरक्षा के लिए तैनात की गई।
भोपाल के नीलम पार्क में क्या चल रहा है?
भोपाल के नीलम पार्क में शिक्षक अभ्यर्थी शिक्षक भर्ती 2025 के वर्ग-2 और वर्ग-3 में पदवृद्धि की मांग को लेकर चार दिन से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

एकलव्य आवासीय विद्यालयों जैसे संवेदनशील परिसरों में बच्चों का 17 किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्ट्रेट पहुँचना गंभीर प्रशासनिक और व्यवस्थागत खामियों को उजागर करता है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव के साथ-साथ जातिसूचक प्रताड़ना के आरोप बेहद चिंताजनक हैं, जो केवल बच्चों की नाराजगी नहीं बल्कि प्रबंधन की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करते हैं। यदि इन गंभीर शिकायतों पर तत्काल निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो यह आक्रोश अन्य जिलों में भी फैल सकता है और छात्र आंदोलनों का एक बड़ा केंद्र बन सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

एक क्राइम संवाददाता के रूप में मेरा मानना है कि किशोर न्याय अधिनियम और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत इन गंभीर आरोपों की स्वतंत्र न्यायिक जाँच अनिवार्य है। यदि आवासीय विद्यालयों में इस प्रकार की संस्थागत लापरवाही और भेदभाव की शिकायतों को समय रहते प्रशासनिक स्तर पर नहीं सुलझाया गया, तो यह मामला मानवाधिकार आयोग और उच्च न्यायपालिका के संज्ञान में आ सकता है, जिससे व्यवस्था की जवाबदेही तय होना तय है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR